भारत में सरकार पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाने पर लगातार जोर दे रही है. इसका मकसद पेट्रोल पर निर्भरता कम करना, प्रदूषण घटाना और किसानों को फायदा पहुंचाना है. इसी कड़ी में E30 जैसे ईंधन को बढ़ावा देने की तैयारी चल रही है. लेकिन इस बीच लग्जरी कार निर्माता BMW के CEO ने बड़ी जानकारी दी है. कंपनी का कहना है कि उसकी मौजूदा या पुरानी कारों को E30 फ्यूल के लिए अपग्रेड नहीं किया जा सकेगा.
BMW इंडिया के CEO ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि कंपनी की जो कारें पहले से ग्राहकों के पास हैं, उन्हें E30 फ्यूल के हिसाब से बनाने के लिए बाद में कोई तकनीकी अपग्रेड उपलब्ध नहीं कराया जाएगा. यानी अगर कोई पुरानी BMW कार E30 फ्यूल के लिए डिजाइन नहीं की गई है, तो उसे सिर्फ सॉफ्टवेयर अपडेट या छोटे बदलावों से E30 के लिए तैयार नहीं किया जा सकता.
क्या है कंपनी का कहना?
कंपनी का कहना है कि E30 जैसे फ्यूल के लिए इंजन, फ्यूल पाइप, फ्यूल इंजेक्शन सिस्टम और कई अन्य मैकेनिकल पार्ट्स को शुरू से ही उसी हिसाब से डिजाइन करना पड़ता है. एथेनॉल की मात्रा बढ़ने पर फ्यूल का व्यवहार बदल जाता है, इसलिए इंजन की इंजीनियरिंग भी अलग तरीके से करनी होती है. यही कारण है कि पुरानी कारों को बाद में बदलकर E30 के अनुरूप बनाना आसान नहीं है.
BMW ने यह भी स्पष्ट किया कि कंपनी भविष्य में आने वाले नियमों को ध्यान में रखते हुए नई कारों पर काम कर रही है. यानी आने वाले समय में लॉन्च होने वाले नए मॉडल ऐसे फ्यूल के लिए तैयार किए जा सकते हैं, लेकिन वर्तमान में सड़क पर चल रही कारों के लिए ऐसा पॉसिबल नहीं होगा.
क्या होता है E30 फ्यूल?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि E30 फ्यूल क्या होता है. E30 का मतलब ऐसे फ्यूल से है, जिसमें 30 प्रतिशत एथेनॉल और 70 प्रतिशत पेट्रोल मिला हो.एथेनॉल एक प्रकार का बायोफ्यूल है, जिसे मुख्य रूप से गन्ने और अन्य कृषि उत्पादों से बनाया जाता है.सरकार चाहती है कि पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाई जाए ताकि कच्चे तेल के आयात पर खर्च कम हो सके. अभी भारत में बड़े लेवल पर E30 फ्यूल उपलब्ध भी नहीं है. फिलहाल देश में E20 पेट्रोल को बढ़ावा दिया जा रहा है और नई कार कंपनियां अपनी गाड़ियों को E20 के अनुकूल बना रही हैं.
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