आजकल तेज धूप और प्राइवेसी के चलते कई लोग अपनी कार के शीशों पर ब्लैक फिल्म लगवा लेते हैं. कम लोगों को यह पता होता है कि भारत में कार के शीशों पर ब्लैक फिल्म लगाना कानूनन गलत है और इसके लिए जुर्माना भी देना पड़ सकता है. यही वजह है कि ट्रैफिक पुलिस समय-समय पर ऐसे वाहनों पर कार्रवाई करती है.

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असल में यह नियम सेफ्टी को ध्यान में रखकर बनाया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने साल 2012 में एक अहम फैसला सुनाते हुए गाड़ियों के शीशों पर किसी भी तरह की काली फिल्म या टिंट लगाने पर रोक लगा दी थी. इसका मतलब साफ है कि आप अपनी कार के शीशों पर बाद में कोई भी फिल्म नहीं लगवा सकते, चाहे वह हल्की हो या गहरी, दोनों ही नियम के खिलाफ मानी जाती हैं.

नियम तोड़ने पर कितना जुर्माना?

अब सवाल आता है कि अगर कोई इस नियम को तोड़ता है तो क्या होता है? ऐसे मामलों में ट्रैफिक पुलिस चालान काट सकती है. कई शहरों और राज्यों में जुर्माना 500 से लेकर 1000 रुपये या उससे ज्यादा का चालान भी काटा जाता है. कई बार पुलिस मौके पर ही गाड़ी की फिल्म हटाने को भी कह देती है.

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यह नियम सिर्फ जुर्माना लगाने के लिए नहीं बनाया गया है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा सुरक्षा कारण है. जब कार के शीशों पर काली फिल्म लगी होती है, तो बाहर से अंदर का दृश्य साफ दिखाई नहीं देता. इससे अपराधियों को छिपने में आसानी हो सकती है या किसी गलत गतिविधि का पता लगाना मुश्किल हो जाता है. इसके अलावा ट्रैफिक पुलिस के लिए भी यह देखना जरूरी होता है कि ड्राइवर सीट बेल्ट पहने हुए है या नहीं, या वह मोबाइल का इस्तेमाल तो नहीं कर रहा—काली फिल्म होने पर यह सब देखना मुश्किल हो जाता है.

सेफ ऑप्शन्स का करें इस्तेमाल

कार के शीशों से जुड़ा एक और नियम भी है, जिसे लोग अक्सर समझ नहीं पाते. कार बनाने वाली कंपनी जो ग्लास लगाती है, उसमें पहले से ही एक तय लिमिट तक टिंट होता है. नियम के अनुसार, सामने और पीछे के शीशों से कम से कम 70 फीसदी रोशनी अंदर आनी चाहिए, जबकि साइड विंडो से कम से कम 50 फीसदी रोशनी गुजरनी चाहिए. यह फैक्ट्री फिटेड ग्लास के लिए मान्य है, लेकिन इसके ऊपर कोई अलग से फिल्म लगाना मना है.

गर्मियों में लोग यह सोचकर फिल्म लगवा लेते हैं कि इससे कार ठंडी रहेगी, लेकिन इसके लिए और भी सेफ ऑप्शन मौजूद हैं. जैसे सनशेड का इस्तेमाल करना, पार्किंग में कार को छांव में खड़ा करना या अच्छी क्वालिटी का AC सिस्टम इस्तेमाल करना. ये तरीके कानून के दायरे में भी आते हैं और सुरक्षित भी होते हैं.

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