Vehicle AI Quality Control: ऑटोमोबाइल मार्केट बहुत तेजी से बदला और इसका असर आज की नई गाड़ियों पर देखने को मिल रहा है. अब कारों में ऐसे-ऐसे फीचर्स आ गए हैं जिससे ग्राहक और कंपनियों की परेशानी कम कर दी है. इसमें सबसे बड़ा रोल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का माना जा रहा है. क्योंकि इंडस्ट्री में कारों को बेहतर बनाने के लिए क्लाउड-टू-एज AI ऑपरेटिंग मॉडल और क्लोज्ड-लूप सिस्टम का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है.

Continues below advertisement

बता दें कि यह टेक्नोलॉजी गाड़ियों में खराबी होने से पहले ही उसे पकड़ लेता है और ठीक कर सकता है. जिसके चलते ऑटो कंपनियों का रिकॉल और वारंटी का खर्च घट रहा है. तो चलिए जानते हैं कि एआई टेक्नोलॉजी कारों की दुनिया में क्या और कैसे कमाल कर रही है.

हो रही हैं रियल-टाइम मॉनिटरिंग

आजकल की नई गाड़ियों में लगे एज-एआई सेंसर्स और AI एल्गोरिदम कार की हर छोटी-बड़ी मूवमेंट पर हर पल नजर रखती हैं. चाहे वह बैटरी की हेल्थ हो, ब्रेकिंग सिस्टम हो या इंजन की परफॉर्मेंस एआई किसी भी असामान्य व्यवहार को तुरंत भांप लेता है.

Continues below advertisement

इससे सबसे बड़ा फायदा यह हुआ है कि अब अगर किसी हिस्से में खराबी आती है तो यह सिस्टम तुरंत उसकी पहचान कर कार चालक और कंपनी को अलर्ट भेज देता है. जिससे समय रहते समस्या का हल पहले ही हो जाता है.

यह भी पढ़ें: Aston Martin Price Cut: अब कम कीमत में मिलेगी James Bond की लग्जरी कार, जानें नया दाम

कार हुई पहले से ज्यादा अपडेट

बता दें कि सॉफ्टवेयर और एआई के इस्तेमाल से सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब छोटी-मोटी परेशानी और सॉफ्टवेयर बग्स को ठीक करने के लिए सर्विस सेंटर जाने की जरूरत नहीं पड़ती. क्लाउड एआई पूरी फ्लीट के डेटा का विश्लेषण करता है और ओवर-द-एयर (OTA) अपडेट्स के जरिए गाड़ियों के सॉफ्टवेयर को सीधे कार में ही अपडेट कर देता है. इससे कार की परफॉर्मेंस और क्वालिटी बिना किसी झंझट के समय के साथ बेहतर होती रहती है.

वारंटी और रीकॉल के खर्च होंगे कम

आपको बता दें कि कार कंपनियों के लिए गाड़ियों में खराबी के कारण बड़े लेवल पर होने वाले रिकॉल और वारंटी दावों पर मोटा खर्च हो जाता है. लेकिन एआई ऑपरेटिंग मॉडल से टेस्टिंग और वैलिडेशन का समय काफी कम हो गया है.

जिससे सड़क पर चलने वाली गाड़ियों से मिले रियल डेटा का इस्तेमाल कर इंजीनियर नई और पुरानी दोनों गाड़ियों के डिजाइन तथा सॉफ्टवेयर को तुरंत रीफाइन कर सकते हैं. जिससे क्वालिटी से जुड़ी समस्याएं पहले ही खत्म हो जाती हैं.

आफ्टर-सेल्स सर्विस में सुधार

वहीं सर्विस सेंटर्स पर भी एआई का जलवा साफ देखने को मिल रहा है. क्योंकि एआई-पावर्ड डायग्नोस्टिक्स टूल्स सर्विस टेक्नीशियन को सही और जल्द सलूशन देते हैं. इससे मैकेनिक को गाड़ी की असली खराबी खोजने में ज्यादा समय बर्बाद नहीं करना पड़ता. जबकि कार चालकों को भरोसा, कम मेंटेनेंस लागत और एक प्रीमियम ड्राइविंग एक्सपीरियंस मिलता है. जिससे ऑटो कंपनियों और ग्राहकों दोनों को फायदा पहुंच रहा है.

यह भी पढ़ें: Helmet Expiry Date: आपका हेलमेट कितना पुराना, जानें कब आ जाती है इसकी एक्सपायरी डेट?


Car loan Information:

Calculate Car Loan EMI