Future of EV: पहले की तरह अब ऑटोमोबाइल मार्केट नहीं रहा है और अब सब कुछ बदल चुका है. क्योंकि पहले जहां पेट्रोल और डीजल गाड़ियों का बोलबाला था अब ऐसा नहीं रहा है. मार्केट में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की डिमांड बढ़ रही है. पुरे वर्ल्ड सहित इंडिया में भी EV कारों की डिमांड तेजी से बढ़ी है. जिसके चलते ऐसा माना जा रहा है कि आने वाले कुछ साल में इलेक्ट्रिक गाड़ियों का दबदबा और भी बढ़ जायेगा और सड़कों पर हमें ज्यादातर EV गाड़ी देखने को मिल सकती है.
जबकि इस बीच एक रिपोर्ट ने बड़ा खुलासा किया है और सभी को हैरान कर दिया है. दरअसल हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की ओर से आई एक स्टडी में बताया गया है कि ईवी मार्केट बहुत तेजी से बदल रहा है और आने वाले समय में इन गाड़ियों का ग्राफ तेजी से बढ़ने वाला है. तो चलिए जानतें हैं कि 2030 तक इलेक्ट्रिक गाड़ियों का नंबर कितना बढ़ सकता है.
सस्ती इलेक्ट्रिक कारों का दौर
आपको बता दें कि इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बिक्री में आने वाली इस बंपर तेजी का सबसे बड़ा कारण बैटरी टेक्नोलॉजी में हो रहे लगातार सुधारों को जाता है. रिपोर्ट के मुताबिक पिछले कुछ सालों में लिथियम-आयन बैटरी पैक्स की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है. क्योंकि पहले जहां बैटरी की ऊंची कीमत के कारण ईवी काफी महंगी होती थीं.
वहीं अब बैटरी का प्रोडक्शन कॉस्ट कम होने से कंपनियां कम बजट में भी लंबी रेंज वाली कारें तैयार कर रही हैं. जबकि ऑटो एक्सपर्ट्स का मानना है कि 2030 तक इलेक्ट्रिक कारों की शुरुआती कीमत पेट्रोल और डीजल कारों के बिल्कुल बराबर आ जाएगी. जिससे आम ग्राहक बिना हिचकिचाहट के ईवी को ही चुनना पसंद करेंगे.
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पहले से ज्यादा हुई ईवी की बिक्री
ताजा स्टडी में यह भी बताया गया है कि वर्ल्ड लेवल पर गाड़ियों के मार्केट मिक्स में कितना बड़ा बदलाव आ चुका है. दुनिया भर के 25 से ज्यादा प्रमुख ऑटो बाजारों में नए वाहनों की बिक्री में ईवी का शेयर 10 से 20 प्रतिशत के आंकड़े को पार कर चुका है.
अमेरिका, यूरोप और चीन के अलावा भारत जैसे तेजी से बढ़ते विकासशील देशों में भी टू-व्हीलर्स, थ्री-व्हीलर्स और पैसेंजर कारों में इलेक्ट्रिक मॉडल्स की डिमांड बहुत तेजी से बढ़ रही है. अलग-अलग बजट में नए-नए ईवी मॉडल्स के आने से ग्राहकों के पास अब ऑप्शंस की कोई कमी नहीं है. जिससे मार्केट में EV बिक्री 38% तक पहुंचा जायेगा और इसका मतलब है कि आने वाले समय में 10 में से 4 गाड़ियों इलेक्ट्रिक होंगी.
सर्विस नेटवर्क के सामने होंगी चुनौतियां
जानकारी दें दे कि सड़कों पर इतनी बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक वाहनों के आने से सिर्फ गाड़ियों की बिक्री ही नहीं बदलेगी बल्कि ऑटो इंश्योरेंस और आफ्टर-सेल सर्विस सेक्टर पर भी इसका बड़ा असर पड़ेगा. क्योंकि इलेक्ट्रिक कारों में पेट्रोल कारों की तुलना में कम मूविंग पार्ट्स होते हैं लेकिन इनकी बैटरी और इलेक्ट्रॉनिक्स काफी महंगे होते हैं.
जिसके चलते इंश्योरेंस कंपनियों को क्लेम प्रोसेस और प्रीमियम दरों में नए बदलाव करने होंगे. इसके अलावा लोकल गैरेज और मैकेनिक्स को ईवी रिपेयरिंग के लिए हाई-टेक ट्रेनिंग देनी होगी और देश भर में स्पेयर पार्ट्स और बैटरी रीसाइक्लिंग का एक मजबूत नेटवर्क तैयार करना होगा ताकि ग्राहकों को कोई दिक्कत न हो.
2030 तक बदल जाएगी तस्वीर
कुल मिलाकर देखें तो इस रिपोर्ट के हिसाब से ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री का भविष्य पूरी तरह से इलेक्ट्रिक होने वाला है. क्योंकि 2030 तक 38 प्रतिशत की यह रिकॉर्ड हिस्सेदारी यह साबित करेगी कि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ रनिंग कॉस्ट में बचत के चलते लोग ईवी को प्राथमिकता दे रहे हैं.
भले ही शुरुआत में इंफ्रास्ट्रक्चर और सर्विसिंग को लेकर कुछ चुनौतियां आएं लेकिन कम कीमतें और फास्ट चार्जिंग स्टेशंस का नेटवर्क आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की गाड़ियों को बहुत पीछे छोड़ देगा जिससे प्रदूषण भी कम हो जायेगा.
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