Mahatma Vidur Niti: महात्मा विदुर हस्तिनापुर के महामंत्री थे. उन्होंने महाभारत के दौरान महाराजा धृतराष्ट्र को हर असमंजस के समय उचित बातें बताते थे. उन्हीं बातों का संकलन विदुर नीति है. विदुर नीति में उन दुर्गुणों को बताया गया है. जिन पर व्यक्ति यदि कंट्रोल न करे तो वह जीवन भर परेशान रहता है. अपने इस दुर्गुणों के कारण यह बार-बार पछताता रहता है. आइये जानें विदुर नीति में वर्णित इन दुर्गुणों के बारे में:-
चोरीकरना: विदुर नीति के अनुसार, जो व्यक्ति चोरी करके धन इकठ्ठा कर लेता है, बेईमानी या धोखे से किसी दूसरे का धन हडप लेता है. ऐसे लोग चाहे जितनी भी तरक्की कर लें. उन्हें जीवन में कभी सुख प्राप्त नहीं होता है. यही नही उन्हें इसकी कई गुना अधिक कीमत चुकानी पड़ती है. इस लिए कभी भी चोरी और किसी दूसरे का हिस्सा या धन नहीं हड़पना चाहिए. विदुर नीति के अनुसार चोरी करने वाले का समाज व परिवार में कभी सम्मान नही होता है. हर व्यक्ति उसे बुरी नजर से देखता है.
अच्छेकर्मोंऔरअच्छेपुरुषोंपरविशवासनकरना
जो पुरुष अच्छे लोगों और अच्छे कर्मों पर विश्वास नहीं करते हैं, गुरुजनों के स्वभाव पर शंका करते हैं, मित्रों का परित्याग करते हैं और जरूरत आने पर मित्रों को अकेला छोड़ देते हैं. वे लोग निश्चित तौर पर अधर्मी होते हैं. ऐसे लोगों का जीवन कभी सुखमय नहीं रहता है. इस लिए विदुर नीति के अनुसार व्यक्ति को जीवन में मजबूती से खड़े रहना चाहिए तथा मन में किसी प्रकार की शंका नहीं करनी चाहिए.
काम, क्रोधऔरलोभ
विदुर नीति के अनुसार काम, क्रोध और लोभ, ये 3 अवगुण व्यक्ति को नरक अर्थात दुखों की ओर ले जाते हैं. ये तीनों अवगुण व्यक्ति की आत्मा का नाश कर देते है. इस लिए हर व्यक्ति को इन 3 अवगुणों से सदैव दूर रहना चाहिए. यदि जीवन में आगे बढ़ना है और परिवार की तरक्की करनी है, तो व्यक्ति को इन 3 अवगुणों से सदैव दूर रहना चाहिए.
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