Surya Gochar 2026: 16 जुलाई 2026 को सूर्य देव कर्क राशि में प्रवेश कर चुके हैं. इस गोचर के साथ ही राहु और केतु के साथ बनने वाले दो महत्वपूर्ण योग षडाष्टक योग और द्विद्वादश योग ज्योतिषियों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं. वर्तमान में राहु कुंभ राशि और केतु सिंह राशि में स्थित हैं. ऐसे में सूर्य और राहु के बीच षडाष्टक योग तथा सूर्य और केतु के बीच द्विद्वादश योग का निर्माण हो रहा है.

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वैदिक ज्योतिष में सूर्य को शासन, प्रशासन, नेतृत्व, ऊर्जा, कृषि और अर्थव्यवस्था का कारक माना जाता है. वहीं राहु अचानक घटनाओं, भ्रम, अस्थिरता और अप्रत्याशित बदलावों का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि केतु अलगाव और अनिश्चित परिस्थितियों का सूचक माना जाता है.

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इसी कारण कई ज्योतिषाचार्य मानते हैं कि ऐसे योगों के दौरान व्यक्तिगत जीवन के साथ-साथ व्यापक स्तर पर भी कुछ उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं.

शेयर बाजार पर क्या हो सकता है असर?

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, सूर्य और राहु का संबंध बाजार में अस्थिरता बढ़ाने वाला माना जाता है. अगले एक महीने के दौरान शेयर बाजार में अचानक उतार-चढ़ाव, तेज मुनाफावसूली और निवेशकों की बदलती धारणा देखने को मिल सकती है.

विशेषज्ञों के अनुसार, इस दौरान-

  • बाजार में वोलैटिलिटी (Volatility) बढ़ सकती है.
  • सरकारी नीतियों से जुड़े सेक्टरों में तेज हलचल देखने को मिल सकती है.
  • बैंकिंग, पावर, इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकारी कंपनियों के शेयरों में उतार-चढ़ाव संभव है.
  • शॉर्ट टर्म निवेशकों को जोखिम प्रबंधन के साथ आगे बढ़ने की सलाह दी जाती है.

मौसम पर क्या पड़ सकता है प्रभाव?

कर्क राशि जल तत्व की राशि मानी जाती है और सूर्य का इसमें गोचर मानसून के सक्रिय चरण के दौरान होता है. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, राहु और केतु के प्रभाव से मौसम में असामान्य बदलाव देखने को मिल सकते हैं.

संभावित संकेत:

  • कुछ क्षेत्रों में भारी वर्षा की स्थिति.
  • कहीं-कहीं बारिश में असमानता.
  • आंधी और तेज हवाओं की घटनाओं में बढ़ोतरी.
  • बाढ़ प्रभावित इलाकों में सतर्कता की आवश्यकता.

कृषि और अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव

सूर्य कृषि और प्रशासन का भी कारक माना जाता है. यदि मौसम में असंतुलन बढ़ता है तो कुछ फसलों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है. हालांकि वास्तविक असर वर्षा की मात्रा और स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा.

पंडित सुरेश श्रीमाली के अनुसार, सूर्य-राहु और सूर्य-केतु के ये योग परिवर्तन और अनिश्चितता के संकेत माने जाते हैं. व्यक्तिगत स्तर पर धैर्य, सोच-समझकर निर्णय लेना और अनावश्यक जोखिम से बचना लाभदायक माना जाता है. वहीं सामाजिक स्तर पर ऐसे समय में संयम और सतर्कता बनाए रखना बेहतर रहता है.

सूर्य के कर्क राशि में गोचर के साथ बने षडाष्टक और द्विद्वादश योग को ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इन योगों के प्रभाव को लेकर मौसम, शेयर बाजार और आर्थिक गतिविधियों में कुछ उतार-चढ़ाव के संकेत बताए जाते हैं. हालांकि वास्तविक परिस्थितियां अनेक अन्य कारकों पर भी निर्भर करती हैं. इसलिए इन ज्योतिषीय संकेतों को संभावनाओं के रूप में ही देखा जाना चाहिए.

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.