Solar New Year 2026: हिंदू पंचांग 2 मुख्य प्रणालियों पर आधारित है, जिसे सौर और चंद्र सौर कहते हैं. सौर पंचांग के मुताबिक, सूर्य की स्थिति के आधार पर नव वर्ष मनाया जाता है, जो आमतौर पर कई क्षेत्रों में मेष संक्रांति की शुरुआत का प्रतीक है. इसके विपरीत, चंद्र पंचांग चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा (पहले दिन) को मनाया जाता है. 

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यह लेख उन अलग-अलद राज्यों के पंचांगों का विश्लेषण करता है, जो मेष संक्रांति के अनुसार नया साल मनाते हैं, जो भारतीय सौर नव वर्ष का प्रतीक है. इस दिन सूर्य मीन राशि से मेष राशि में प्रवेश करता है. साल 2026 में मेष संक्रांति 14 अप्रैल को मनाई जाएगी, और भारत के अलग राज्यों में इसे अलग-अलग नामों से मनाया जाता है. 

भारत में कैलेंडर (Calendar in India)

भारत में विशेष रूप से दो पंचांग प्रचलित है- शक संवत और विक्रम संवत. इन पंचांगों के आधार पर ही अलग-अलग राज्यों में नव वर्ष की शुरुआत अलग-अलग समय पर होती है. 

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सौर वर्ष के पर्व में सबसे खास उत्सवों में बैसाखी, विशु, पुथंडु, पना संक्रांति, बोहाग बिहू और बिखूटी शामिल है. 

सौर वर्ष उत्सव में गुड़ी पड़वा, चैत्र प्रतिपदा, युगादि, नवसंवत्सर और चेटी चंड जैसे उत्सव शामिल हैं. 

शक संवत और विक्रम संवत में अंतर

शक संवत

यह पंचांग दक्षिण भारत में काफी ज्यादा प्रचलित है और चैत्र माह ( 21 या 22 मार्च) से शुरू होता है. इसमें चंद्र और सौर तत्वों का संयोजन होता है, लेकिन यह खास तौर से सौर ऊर्जा पर आधारित है, जिसमें निश्चित दिन होते हैं (चैत्र में 30 दिन या 31 दिन).

यह वसंत विषुव के साथ मेल खाते हुए 22 मार्च (या लीप वर्ष में 21 मार्च) से शुरू होता है.

विक्रम संवत

विक्रम संवत खासतौर से उत्तर भारत में प्रयुक्त यह पंचांग चैत्र नवरात्रि के पहले दिन (मार्च और अप्रैल के बीच) से प्रारंभ होता है. इसमें चंद्र और सौर तत्वों का मिश्रण है, लेकिन इसकी संरचना मुख्य रूप से चंद्र आधारित है.

महीने चंद्रमा की कलाओं द्वारा निर्धारित होते हैं, और सौर वर्ष के साथ तालमेल बिठाने के लिए प्रत्येक तीन साल में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है. 

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क्षेत्रीय उत्सव

पंजाब और हरियाणा

पंजाब में नए साल को बैसाखी के रूप में मनाया जाता है, जो एक प्राचीन कृषि उत्सव है और सभी समुदाय मिलकर मनाते हैं. इसे सिख नववर्ष के रूप में भी मान्यता प्राप्त है, जो 1699 में गुरु गोविंद सिंह जी द्वारा खालसा पंथ की स्थापना का प्रतीक है, यह सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के साथ भी मेल खाता है. 

पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल में नया साल जिसे पोइला बैसाख के नाम से जाना जाता है, बंगाली पंचांग के पहले दिन से शुरू होता है, जो मेष संक्रांति के साथ मेल खाता है. बंगाली साल 1433 का प्रारंभ होने वाला है, जिसकी जड़ें राजा शशांक के शासनकाल में 7वीं शताब्दी तक जाती हैं. 

तमिलनाडु

तमिलनाडु में नए साल को पुथांडु के रूप में मनाया जाता है, जो कि चिथिराई (अप्रैल के मध्य) माह के पहले दिन पड़ता है. तमिल पंचांग सौर पर आधारित है और वर्तमान में तमिल संवत 1948 चल रहा है. 

केरल

केरल में नए साल को विशु कहा जाता है, जो पारंपरिक सौर पंचांग कोल्लावर्षम का अनुसरण करता है, जिसकी शुरुआत 825 ईस्वी में हुई थी. साल 2026 इस पंचांग का 1202वां वर्ष होगा, हालांकि आधिकारिक नया साल चिंगम (अगस्त-सितंबर) से शुरू होता है. 

ओडिशा

ओडिशा में नए साल को सूर्य की स्थिति के आधार पर पाना संक्रांति या महा विश्वुव संक्रांति के रूप में मनाया जाता है. वर्तमान में ओडिशा संवत 1433-34 चल रहा है, जिसमें महीनों के नाम अन्य पंचांगों के समान ही रखे गए हैं. 

असम

असम में नए साल को बोहाग बिहू भी कहा जाता है, जो असमिया सौर पंचांग के अनुसार मनाया जाता है और मेष संक्रांति से शुरू होता है. बोहाग, जेठ और आहार जैसे महीनों के नाम संस्कृत मूल से लिए गए हैं. 

उत्तराखंड

इस त्योहार को बिखोटी के नाम से जाना जाता है, जिसका पारंपरिक पंचांग सौर गणनाओं पर आधारित है. 

मिथिला (बिहार)

मिथिला में नए साल के उत्सव को जुर शीतल कहा जाता है, जिसमें बड़े बुजुर्ग रात भर रख पानी को बच्चों पर छिड़ककर उन्हें आशीर्वाद देते हैं. इस परंपरा के अंतर्गत इस दिन हनुमंत ध्वज भी फहराया जाता है.

पूरे भारत में मनाए जाने वाले ये अलग-अलग उत्सव सौर नव वर्ष से जुड़ी समृद्ध सांस्कृतिक विविधता को उजागर करते हैं, जो राज्यों के मुताबिक भिन्न-भिन्न अनूठी परंपराओं और रीति-रिवाजों को दर्शाते हैं. 

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