Shukra Gochar 2026: धनतेरस के दिन, शुक्रवार 6 नवंबर 2026 को रात 12:45 बजे, वक्री शुक्र तुला से कन्या राशि में लौटेंगे. यानी गोचर 5 नवंबर की रात, तारीख बदलने के 45 मिनट बाद होगा. वैदिक ज्योतिष की चंद्र राशि आधारित गणना में वृश्चिक के लिए अटके भुगतान और पुराने संपर्कों से अवसर के संकेत हैं.
वृषभ और मकर के लिए अधूरे काम आगे बढ़ाने की गुंजाइश है. वहीं सिंह, तुला और कुंभ राशि वालों के लिए खर्च और साझा पैसों का हिसाब अहम रहेगा.
धनतेरस पर शुक्र वक्री होंगे या सिर्फ राशि बदलेंगे?
शुक्र 3 अक्टूबर से ही वक्री हैं. 6 नवंबर को इसी चाल में वे अपनी राशि तुला से पीछे लौटकर कन्या में प्रवेश करेंगे. 14 नवंबर को सुबह 5:57 बजे वे कन्या में ही मार्गी होंगे और 22 नवंबर को शाम 5:38 बजे फिर तुला में प्रवेश करेंगे. इसलिए इस गोचर के दो चरण हैं. पहले कन्या में वक्री चाल, फिर उसी राशि में सीधी चाल.
धनतेरस की त्रयोदशी 6 नवंबर को सुबह 10:30 बजे शुरू होगी. नई दिल्ली में लक्ष्मी-कुबेर पूजन का मुहूर्त शाम 6:02 से 7:57 बजे तक है. यानी शुक्र का राशि परिवर्तन त्रयोदशी शुरू होने से पहले हो जाएगा.
वक्री शुक्र के कन्या में आने से राशियों का फल क्यों बदलेगा?
पराशरी ज्योतिष में तुला शुक्र की स्वराशि है और कन्या उनकी नीच राशि मानी जाती है. इस बदलाव का फल समझने के लिए जन्म की चंद्र राशि से देखना होगा कि शुक्र किस भाव से निकलकर किस भाव में आ रहे हैं. जैसे वृश्चिक के लिए शुक्र बारहवें भाव से ग्यारहवें में आएंगे, जबकि तुला के लिए पहले से बारहवें में. इसी अंतर से एक राशि के लिए आय और पुराने संपर्कों का विषय उभरता है, तो दूसरी के लिए खर्च का.
किन राशियों के लिए बन सकते हैं लाभ के मौके?
वृश्चिक राशि: शुक्र बारहवें से ग्यारहवें भाव में आएंगे. ग्यारहवां भाव आय, लाभ और संपर्कों से जुड़ा है. वृश्चिक के लिए शुक्र साझेदारी के सातवें भाव के स्वामी भी हैं. ऐसे में पुराने ग्राहक से दोबारा काम मिलने, अटके भुगतान पर बात आगे बढ़ने या किसी परिचित से काम का प्रस्ताव मिलने के संकेत माने जा सकते हैं.
वृषभ राशि: राशि स्वामी शुक्र छठे से पांचवें भाव में आएंगे. पांचवां भाव पढ़ाई, रचनात्मक काम और अपनी प्रतिभा दिखाने से जुड़ा है. पुराने प्रोजेक्ट, पोर्टफोलियो या इंटरव्यू की तैयारी पर दोबारा काम करना फलदायी हो सकता है. यहां लाभ का संकेत अपने कौशल के बेहतर इस्तेमाल से जुड़ा है.
मकर राशि: मकर के लिए पंचम और दशम भाव के स्वामी शुक्र दशम से नवम भाव में लौटेंगे. नवम भाव उच्च शिक्षा, मार्गदर्शन और लंबी यात्राओं से जुड़ा है. अधूरे आवेदन, ट्रेनिंग या किसी वरिष्ठ से रुकी हुई बातचीत को फिर आगे बढ़ाने का अवसर मिल सकता है.
किन राशियों को खर्च और लेनदेन पर ध्यान देना चाहिए?
सिंह राशि: शुक्र तीसरे से दूसरे भाव में आएंगे. दूसरा भाव बचत, परिवार और वाणी से जुड़ा है. त्योहार की खरीदारी और परिवार के लिए किए गए खर्च एक साथ बजट पर असर डाल सकते हैं. काम से जुड़ा कोई भुगतान लंबित है तो उसकी तारीख और रकम लिखित में स्पष्ट कर लें.
तुला राशि: राशि स्वामी शुक्र पहले से बारहवें भाव में लौटेंगे. इस भाव का संबंध खर्च और दूरस्थ काम से है. यात्रा, उपहार या ऑनलाइन खरीदारी पर बजट खिंच सकता है. पुराने सब्सक्रिप्शन, लंबित रिफंड और पहले से तय खर्चों का हिसाब देखने का समय है.
कुंभ राशि: शुक्र नवम से आठवें भाव में आएंगे. आठवां भाव साझा धन, बीमा और कर जैसे विषयों से जुड़ा है. परिवार या पार्टनर के साथ कोई बड़ा खर्च साझा करना है तो पहले तय कर लें कि किसका कितना हिस्सा होगा. पुरानी पॉलिसी या किस्त की शर्तें भी दोबारा पढ़ें.
ये संकेत जन्म की चंद्र राशि से भावों की गणना पर आधारित हैं. व्यक्तिगत फल के लिए जन्मकुंडली में शुक्र की स्थिति, चल रही दशा और दूसरे ग्रहों के गोचर भी देखे जाते हैं.
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