Shani Dosh Upay, Shanivar Puja: आषाढ़ माह प्रारंभ हो चुका है. धार्मिक एवं पूजा-पाठ की दृष्टि से यह माह विशेष महत्त्व रखता है. आज इस माह के शनिवार के दिन शनि दोष से मुक्ति के लिए विशेष योग का निर्माण भी हुआ है. ऐसे में जिन लोगों के ऊपर शनि की साढ़ेसाती और शनि की ढैय्या का प्रकोप है. उन्हें आज शनिदेव की विधि पूर्वक पूजा-उपासना करनी चाहिए और राजा दशरथ कृत शनि स्तोत्र का पाठ करना चाहिए. मान्यता है कि इससे जातकों पर शनि देव की कृपा होती है और शनि दोष कम होता है.

ज्योतिष के मुताबिक़, न्याय के देवता शनि देव 30 साल बाद 29 अप्रैल 2022 को मकर राशि से निकलकर अपनी दूसरी स्वराशि कुंभ राशि में प्रवेश किये. उसके बाद शनि 5 जून से कुंभ राशि में उल्टी चाल से चल रहें हैं. वे यहां से 13 जुलाई 2022 को वक्री होकर पुनः मकर राशि में प्रवेश करेंगे तथा 17 जनवरी 2023 को पूर्ण रूप से कुंभ राशि में आ जाएंगे. शनि के कुंभ राशि में वक्री होने से कुंभ, मकर, मीन राशि पर शनि की साढ़ेसाती और कर्क, वृश्चिक राशि पर शनि की ढैय्या चल रही है. इसलिए इन राशि के जातकों को शनि स्त्रोत का पाठ करना चाहिए.

राजादशरथकृतशनिस्तोत्र

नम: कृष्णाय नीलाय शितिकण्ठनिभाय च।

नम: कालाग्निरूपाय कृतान्ताय च वै नम: ।।

 

नमो निर्मांस देहाय दीर्घश्मश्रुजटाय च।

नमो विशालनेत्राय शुष्कोदर भयाकृते।।

 

नम: पुष्कलगात्राय स्थूलरोम्णेऽथ  वै नम:।

नमो दीर्घायशुष्काय कालदष्ट्र नमोऽस्तुते।।

 

नमस्ते कोटराक्षाय दुर्निरीक्ष्याय वै नम:।

नमो घोराय रौद्राय भीषणाय कपालिने।।

 

नमस्ते सर्वभक्षाय वलीमुखायनमोऽस्तुते।

सूर्यपुत्र नमस्तेऽस्तु भास्करे भयदाय च।।

 

अधोदृष्टे: नमस्तेऽस्तु संवर्तक नमोऽस्तुते।

नमो मन्दगते तुभ्यं निरिस्त्रणाय नमोऽस्तुते।।

 

तपसा दग्धदेहाय नित्यं  योगरताय च।

नमो नित्यं क्षुधार्ताय अतृप्ताय च वै नम:।।

 

ज्ञानचक्षुर्नमस्तेऽस्तु कश्यपात्मज सूनवे।

तुष्टो ददासि वै राज्यं रुष्टो हरसि तत्क्षणात्।।

 

देवासुरमनुष्याश्च  सिद्घविद्याधरोरगा:।

त्वया विलोकिता: सर्वे नाशंयान्ति समूलत:।।

 

प्रसाद कुरु  मे  देव  वाराहोऽहमुपागत।

एवं स्तुतस्तद  सौरिग्र्रहराजो महाबल:।।

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