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Rishi Panchami 2026: तस्वीर न होने पर सात सुपारी से कैसे करें सप्तऋषि पूजन?

Rishi Panchami 2026: सप्तऋषि की तस्वीर या मूर्ति न हो तो पूजा अधूरी नहीं होगी. जानें सात सुपारी रखकर सांकेतिक पूजन करने की आसान विधि.

Rishi Panchami 2026: घर में ऋषि पंचमी की पूजा की तैयारी पूरी है, लेकिन सप्तऋषियों की तस्वीर नहीं मिली तो क्या पूजा अधूरी रह जाएगी? यह परेशानी कई घरों में होती है. खासकर इस बार, जब गणपति स्थापना के अगले ही दिन ऋषि पंचमी पड़ रही है और बाजार में पूजा सामग्री खरीदने का समय भी कम मिला है.

ऐसी स्थिति में घबराने या केवल तस्वीर के लिए पूजा रोकने की जरूरत नहीं है. धार्मिक पूजा में मूर्ति या चित्र के साथ प्रतीक बनाकर देवताओं का आह्वान करने की परंपरा भी रही है. इसी आधार पर सात साफ सुपारियों को सप्तऋषियों का प्रतीक मानकर पूजा की जा सकती है.

हालांकि, यह समझना जरूरी है कि सात सुपारी रखना ऋषि पंचमी का अनिवार्य शास्त्रीय नियम नहीं, बल्कि चित्र उपलब्ध न होने पर अपनाई जाने वाली सांकेतिक पूजा-विधि है. पूजा का मुख्य आधार सप्तऋषियों का स्मरण, संकल्प और श्रद्धा है.

यह भी पढ़ें- Rishi Panchami 2026: तीज पारण के बाद दूसरा व्रत कैसे शुरू करें?

15 सितंबर को ऋषि पंचमी

ऋषि पंचमी भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है. इस वर्ष यह व्रत मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को रखा जाएगा. पंचांग के अनुसार पंचमी तिथि 15 सितंबर की सुबह शुरू होकर 16 सितंबर की सुबह तक रहेगी. पूजा का समय शहर के अनुसार थोड़ा बदल सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग देखकर ही समय तय करें.

इस दिन कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वशिष्ठ ऋषि की पूजा की जाती है. कई परंपराओं में सप्तऋषियों के साथ माता अरुंधती का भी पूजन होता है.

तस्वीर न हो तो सात सुपारी कैसे रखें?

सबसे पहले पूजा की चौकी को साफ करके उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं. कपड़े के ऊपर अक्षत यानी साबुत चावल से सात छोटे स्थान बनाएं. अब प्रत्येक स्थान पर एक-एक साफ और साबुत सुपारी रखें.

इन सात सुपारियों को क्रम से इन ऋषियों का प्रतीक मानें-

  • कश्यप ऋषि
  • अत्रि ऋषि
  • भारद्वाज ऋषि
  • विश्वामित्र ऋषि
  • गौतम ऋषि
  • जमदग्नि ऋषि
  • वशिष्ठ ऋषि

सुपारियों पर हल्का चंदन या रोली लगाकर अक्षत और फूल अर्पित करें. चाहें तो प्रत्येक सुपारी पर मौली भी बांध सकती हैं. माता अरुंधती के पूजन के लिए अलग फूल या परिवार की परंपरा के अनुसार एक अतिरिक्त सुपारी रखी जा सकती है.

इस तरह करें आसान पूजा

पूजा शुरू करने से पहले भगवान गणेश का ध्यान करें. इसके बाद हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर व्रत एवं सप्तऋषि पूजन का संकल्प लें. अब सातों ऋषियों का नाम एक-एक करके बोलें और प्रत्येक सुपारी पर जल, रोली, अक्षत तथा फूल चढ़ाएं.

सप्तऋषियों के स्मरण के लिए यह श्लोक पढ़ा जा सकता है-

कश्यपोऽत्रिर्भरद्वाजो विश्वामित्रोऽथ गौतमः.
जमदग्निर्वसिष्ठश्च सप्तैते ऋषयः स्मृताः॥

इसके बाद धूप-दीप दिखाएं, मौसमी फल या घर में बना सात्विक प्रसाद अर्पित करें और ऋषि पंचमी की कथा पढ़ें या सुनें. मंत्र की संख्या से अधिक जरूरी है कि सातों ऋषियों के नाम ध्यान से लिए जाएं.

क्या तस्वीर के बिना पूजा का फल नहीं मिलता?

धार्मिक मान्यता में चित्र या प्रतिमा मन को पूजा में लगाने का माध्यम है, पूजा की अकेली शर्त नहीं. यदि तस्वीर, मूर्ति या विशेष सामग्री उपलब्ध नहीं है तो नाम लेकर किया गया आह्वान भी सांकेतिक पूजन माना जाता है. पूजा में सुपारी को देवता का प्रतीक मानने की परंपरा दूसरे धार्मिक अनुष्ठानों में भी मिलती है.

इसलिए तस्वीर न मिलने को पूजा में बाधा न बनाएं. सात सुपारियां सामने रखें, सात ऋषियों के नाम लें और अपनी किसी भूल के लिए मन से क्षमा मांगें. आखिर ऋषि पंचमी की पूजा सामग्री दिखाने के लिए नहीं, अपने भीतर झांकने के लिए है, तस्वीर न हो तो भी ऋषियों तक आपका स्मरण जरूर पहुंचता है.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

हृदेश कुमार सिंह, Senior Vedic Astrologer | Astro Media Editor | Digital Strategy Leader

'ज्योतिष केवल भविष्य बताने की विद्या नहीं, बल्कि समय को समझने की कला है.'

हृदेश कुमार सिंह लंबे समय से ज्योतिष, धर्म, अध्यात्म और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे उन चुनिंदा लोगों में माने जाते हैं जिन्होंने पारंपरिक ज्योतिष को आज की बदलती दुनिया, डिजिटल संस्कृति और नई पीढ़ी की सोच से जोड़ने का प्रयास किया है. उनके लिए ज्योतिष केवल ग्रहों की गणना नहीं, बल्कि मानव व्यवहार, सही समय और जीवन के निर्णयों को समझने का माध्यम है.

वर्तमान में वे ABP Live में Astro, Religion और Dharma LIVE से जुड़े कंटेंट और डिजिटल रणनीति का नेतृत्व कर रहे हैं. यहां उनका फोकस ज्योतिष और धर्म को ऐसे रूप में प्रस्तुत करना है, जो आज के पाठकों और दर्शकों की जिंदगी से सीधे जुड़ सके. यही कारण है कि उनके लेखन और विश्लेषण में केवल पारंपरिक बातें नहीं, बल्कि करियर, रिश्ते, मानसिक तनाव, सामाजिक बदलाव, तकनीक और बदलती जीवनशैली जैसे विषय भी दिखाई देते हैं.

उन्होंने Indian Institute of Mass Communication (IIMC), New Delhi से पत्रकारिता और IIMT University, Meerut से ज्योतिष शास्त्र व वास्तु शास्त्र की पढ़ाई की है. इसके साथ ही उन्होंने Semrush Academy से 'Content Marketing Essentials for SEO and AI Search with Semrush’ सर्टिफिकेशन प्राप्त किया है, जिसमें Keyword Research, Topic Clusters, E-E-A-T आधारित कंटेंट और AI Search Optimization शामिल हैं. वे Astrosage और Astrotalk जैसे प्लेटफॉर्म्स के साथ भी काम कर चुके हैं. मीडिया, ऑडियंस बिहेवियर, डिजिटल पब्लिशिंग और कंटेंट रणनीति की समझ ने उनके काम को अलग पहचान दी है.

हृदेश कुमार सिंह के कई ज्योतिषीय और सामाजिक विश्लेषण समय-समय पर चर्चा में रहे हैं. राजनीति, शेयर बाजार, मनोरंजन जगत, AI और बदलते सामाजिक माहौल जैसे विषयों पर उनके आकलनों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है.

वर्तमान में Youth Protest, CJP आंदोलन और एक्टर शाहरुख खान को लेकर उनकी भविष्यवाणियां सत्य साबित हुईं हैं, उनके विश्लेषण वैदिक गणना, गोचर, मेदिनी ज्योतिष और समाज की बदलती मानसिकता की समझ पर आधारित होते हैं.

वे वैदिक ज्योतिष, होरा शास्त्र, संहिता, मेदिनी ज्योतिष, अंक ज्योतिष, शकुन शास्त्र और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों के विशेषज्ञ है और लेखन करते हैं. करियर, विवाह, व्यापार, शिक्षा और जीवन के महत्वपूर्ण फैसलों से जुड़े विषयों पर वे पारंपरिक ज्योतिष को आधुनिक जीवन की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़कर देखने का प्रयास करते हैं.

डिजिटल दौर में ज्योतिष को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए उन्होंने 'Gen-Z Horoscope' जैसे कॉन्सेप्ट पर भी काम किया, जिसमें राशिफल को केवल भाग्य या डर से जोड़कर नहीं, बल्कि career pressure, relationship confusion, emotional wellbeing और real-life decision making जैसी बातों से जोड़ा गया.

उनका मानना है कि आज के समय में सबसे बड़ी चुनौती जानकारी की कमी नहीं, बल्कि सही समझ की कमी है. वे ज्योतिष को ऐसा माध्यम मानते हैं, जो व्यक्ति को डराने के बजाय उसे बेहतर निर्णय लेने और खुद को समझने में मदद कर सकता है.

श्रीमद्भगवद्गीता के कर्म सिद्धांत, भगवान बुद्ध के संतुलन के विचार, सूफी चिंतन और आधुनिक मनोविज्ञान से प्रभावित उनकी सोच उनके लेखन में भी दिखाई देती है. यही वजह है कि उनका काम केवल भविष्यवाणी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लोगों को सोचने और अपने जीवन को नए नजरिए से देखने के लिए प्रेरित करता है.

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