Ranchi Student Protest: रांची की सड़कों पर आज यानी 10 अगस्त को जो कुछ हुआ, उसकी आशंका चार दिन पहले ही जता दी गई थी. तारीख 9 से 11 अगस्त बताई गई. विधानसभा मार्च की संभावना लिखी गई. छात्रों और प्रशासन के आमने-सामने आने का संकेत दिया गया. मार्च रोके जाने पर विवाद और पुलिस कार्रवाई का खतरा भी बताया गया.
10 अगस्त को घटनाक्रम ने चौंका दिया. JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ हजारों छात्र विधानसभा की ओर बढ़े. पुलिस ने बैरिकेड लगाए. कंटीले तारों से रास्ते बंद किए. छात्र नहीं रुके. इसके बाद वाटर कैनन चला. आंसू गैस के गोले छोड़े गए. कई स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारी आमने-सामने आ गए.
घटना के बाद अब भारत की कुंडली पर आधारित वह भविष्यवाणी चर्चा में है. सवाल है कि आखिर ग्रहों में ऐसा क्या दिखाई दे रहा था, जिससे आंदोलन की तारीख और दिशा का अनुमान पहले ही लगा लिया गया?
भविष्यवाणी में क्या लिखा गया था?
6 अगस्त को प्रकाशित इस भविष्यवाणी में 7 से 10 अगस्त को आंदोलन के विस्तार का समय बताया गया था. इसमें चार बड़े संकेत दिए गए थे.
दूसरे जिलों से छात्र रांची पहुंच सकते हैं. विधानसभा मार्च या घेराव को बड़ा समर्थन मिल सकता है. प्रशासन सुरक्षा और प्रतिबंध बढ़ा सकता है. आंदोलन की तस्वीरें राष्ट्रीय स्तर पर वायरल हो सकती हैं.
इसके तुरंत बाद 9 से 11 अगस्त को टकराव का जोखिम बताया गया. आशंका थी कि मार्च रोके जाने पर विवाद होगा. छात्र और प्रशासन आमने-सामने आ सकते हैं. किसी वीडियो या बयान से तनाव बढ़ सकता है.
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रांची में घटनाएं लगभग इसी क्रम में आगे बढ़ीं. जैसा की ऊपर दिए लिंक में बताया गया था.
9 अगस्त से ही बनने लगा था टकराव का मंच
9 अगस्त को सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच लंबी बैठक हुई. कुछ मांगों पर सहमति बनी, लेकिन पूरा समाधान नहीं निकला. छात्रों ने 10 अगस्त का विधानसभा घेराव वापस लेने से इनकार कर दिया.
उधर प्रशासन ने भी तैयारी तेज कर दी. विधानसभा के 750 मीटर के दायरे में निषेधाज्ञा लागू हुई. बैरिकेडिंग की गई. कंटीले तार लगाए गए. अतिरिक्त सुरक्षाबल तैनात किए गए.
यह केवल सुरक्षा की तैयारी नहीं थी. यह उस टकराव की भूमिका थी, जिसकी आशंका भविष्यवाणी में पहले ही लिखी जा चुकी थी.
10 अगस्त को वैसा ही हुआ, जैसा संकेत था
झारखंड के अलग-अलग जिलों से छात्र रांची पहुंचे. भीड़ विधानसभा की ओर बढ़ी. पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की. प्रदर्शनकारी बैरिकेड के करीब पहुंच गए. इसके बाद हालात तेजी से बदलने लगे.
पानी की तेज बौछार छोड़ी गई. आंसू गैस का इस्तेमाल हुआ. पुलिस ने लाठियां उठाईं तो छात्र राष्ट्रगान गाने लगे. इस घटनाक्रम के वीडियो सोशल मीडिया पर फैल गए. आंदोलन कुछ ही घंटों में राज्य की सीमा से बाहर राष्ट्रीय चर्चा बन गया.
यही वह बिंदु था, जहां भविष्यवाणी और वास्तविक घटनाक्रम एक-दूसरे से मिलते दिखाई दिए.
मंगल ने क्यों बढ़ाया टकराव का खतरा?
इस भविष्यवाणी का आधार भारत की स्वतंत्रता कुंडली थी. 9 अगस्त के आसपास चंद्रमा मिथुन राशि में पहुंचा. भारत की कुंडली में इसी राशि में मंगल स्थित है.
ज्योतिष में चंद्रमा जनता और सामूहिक मन का कारक है. मंगल संघर्ष, पुलिस, चोट, आग और आक्रोश का प्रतिनिधित्व करता है. चंद्रमा ने जन्मकालीन मंगल को सक्रिय किया तो जनता की बेचैनी के आक्रोश में बदलने का जोखिम बढ़ गया.
देश पर मंगल की महादशा और राहु की अंतर्दशा भी प्रभावी है. राहु भीड़, भ्रम, वायरल सूचना और अचानक बिगड़ते हालात से जुड़ा है. मिथुन संचार की राशि है. इसलिए नारे, बयान, वीडियो और सोशल मीडिया इस आंदोलन के बड़े हथियार बने.
कहानी अभी खत्म नहीं हुई
ग्रहों के संकेत बताते हैं कि रांची का आंदोलन अभी अपने निर्णायक मोड़ पर है. 11 से 13 अगस्त के बीच इसका भावनात्मक असर बढ़ सकता है. घायल छात्र, अनशनकारी की सेहत या पुलिस कार्रवाई का कोई वीडियो आंदोलन को और बड़ा बना सकता है.
13 से 18 अगस्त के बीच सरकार पर ठोस फैसला लेने का दबाव बढ़ेगा. जांच, लिखित आश्वासन या कुछ मांगों पर सहमति सामने आ सकती है. लेकिन केवल बातचीत से मामला शांत होना मुश्किल है.
रांची की घटना ने एक बात साफ कर दी है. यह आंदोलन अब केवल एक परीक्षा का विवाद नहीं रहा. यह रोजगार, पारदर्शिता और युवाओं के टूटते भरोसे का सवाल बन चुका है. ग्रहों ने खतरे की तारीख बता दी थी. अब समाधान की तारीख सरकार को बतानी होगी.
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