Pitru Paksha Abroad: भारत में माता-पिता हैं, लेकिन बेटा अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन या किसी दूसरे देश में रहता है. पितृ पक्ष आते ही एक सवाल अक्सर सामने आता है कि श्राद्ध भारत में बताई गई तारीख पर किया जाए या जिस देश में बेटा रह रहा है, वहां के पंचांग के अनुसार?

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इसका सीधा नियम है, श्राद्ध जहां किया जा रहा है, उस स्थान की स्थानीय तिथि और समय को देखा जाना चाहिए. केवल भारत में चल रही तारीख देखकर विदेश में श्राद्ध करना सही तरीका नहीं है.

विदेश में रहने वाले व्यक्ति को कौन सा पंचांग देखना चाहिए?

अगर बेटा न्यूयॉर्क में रहकर स्वयं पिता या माता का श्राद्ध कर रहा है तो उसे न्यूयॉर्क की लोकेशन के अनुसार पंचांग देखना चाहिए. इसी तरह लंदन में रहने वाला व्यक्ति लंदन और सिडनी में रहने वाला व्यक्ति सिडनी के अनुसार श्राद्ध की तिथि और समय निकालेगा.

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इसकी वजह भी आसान है. हिंदू पंचांग की तिथि सूर्य और चंद्रमा की स्थिति से बनती है, लेकिन किसी स्थान पर उसका उपयोग वहां के स्थानीय सूर्योदय, समय और दिन के अलग-अलग हिस्सों के अनुसार किया जाता है. श्राद्ध में तो खास तौर पर अपराह्न काल (Afternoon) का महत्व माना गया है.

पितृ पक्ष के पार्वण श्राद्ध के लिए कुतुप, रौहिण और उसके बाद अपराह्न काल तक का समय महत्वपूर्ण माना जाता है. पंचांग में भी श्राद्ध के समय प्रत्येक शहर की लोकेशन के अनुसार अलग दिए जाते हैं.

भारत और विदेश में श्राद्ध की तारीख अलग भी हो सकती है

यही वह बात है जहां सबसे ज्यादा भ्रम होता है. 2026 का उदाहरण लें. न्यूयॉर्क के Centereach में चतुर्थी श्राद्ध 29 सितंबर 2026 को है. वहां चतुर्थी तिथि 29 सितंबर को सुबह 7:39 बजे शुरू होकर 30 सितंबर सुबह 5:25 बजे तक है और स्थानीय अपराह्न में चतुर्थी मिल रही है.

वहीं भारत में कई स्थानों पर चतुर्थी श्राद्ध 30 सितंबर 2026 को निर्धारित है. उदाहरण के तौर पर राजस्थान और असम में स्थानीय अपराह्न के आधार पर चतुर्थी श्राद्ध 30 सितंबर को है.

इसलिए यह मान लेना कि दिल्ली में 30 सितंबर को श्राद्ध है तो अमेरिका में भी 30 सितंबर को ही करना है, सही नहीं होगा.

अगर परिवार भारत में श्राद्ध कर रहा हो तो?

मान लीजिए बेटा विदेश में है, लेकिन उसकी ओर से भाई या परिवार के दूसरे सदस्य भारत में पुरोहित के साथ श्राद्ध कर रहे हैं. ऐसी स्थिति में जहां वास्तविक श्राद्ध कर्म हो रहा है, उसी स्थान का पंचांग देखा जाएगा.

यानी श्राद्ध दिल्ली में हो रहा है तो दिल्ली की तिथि और अपराह्न काल लिया जाएगा. बेटा विदेश से केवल संकल्प में शामिल है तो उसके देश की तारीख के कारण भारत में होने वाले कर्म की तिथि नहीं बदलेगी.

इसके उलट अगर बेटा स्वयं विदेश में तर्पण, पिंडदान या श्राद्ध कर रहा है तो वहां की स्थानीय तिथि देखी जाएगी.

मृत्यु भारत में हुई थी, तब भी विदेश का पंचांग?

यह भी एक आम भ्रम है. किसी व्यक्ति की मृत्यु भारत में हुई हो और बेटा बाद में विदेश जाकर रहने लगा हो, तब भी हर साल श्राद्ध करते समय मृत्यु वाली तिथि जरूर देखी जाएगी, लेकिन उस तिथि का निर्धारण श्राद्ध करने वाले स्थान के पंचांग में किया जाएगा.

श्राद्ध सामान्य अंग्रेजी तारीख से नहीं बल्कि मृत्यु की हिंदू तिथि से किया जाता है. पंचांग परंपरा में भी संबंधित तिथि पर ही श्राद्ध करने का विधान बताया गया है.

एक बात जरूर ध्यान रखें

विदेश में रहने वाले लोग इंटरनेट पर केवल Pitru Paksha 2026 India dates देखकर श्राद्ध की तारीख तय न करें. पंचांग में पहले अपनी सिटी और देश की सही लोकेशन सेट करें, फिर देखें कि संबंधित तिथि स्थानीय अपराह्न में किस दिन पड़ रही है.

यही कारण है कि भारत, अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन या ऑस्ट्रेलिया में एक ही पितृ पक्ष होने के बावजूद किसी विशेष श्राद्ध की अंग्रेजी तारीख अलग हो सकती है.

बेटा विदेश में स्वयं श्राद्ध कर रहा है तो भारत की तारीख नहीं, बल्कि उस शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार श्राद्ध करे. और यदि श्राद्ध भारत में परिवार या पुरोहित कर रहे हैं तो भारत में जिस स्थान पर कर्म हो रहा है, वहां की तिथि मानी जाएगी.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.