Wolf Moon Paush Purnima 2026: समय-समय पर आकाश में अद्भुत आकाशीय घटना देखने को मिलती है, जिसमें पूर्णिमा का दिन भी एक है. हर महीने पूर्णिमा तिथि को आकाश में चंद्रमा का अद्भुत दृश्य देखा जाता है. लेकिन साल की पहली पूर्णिमा कई मायनों में खास रहने वाली है.

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शनिवार, 3 जनवरी 2026 को साल की पहली पूर्णिमा है, जिसे वुल्फ मून (Wolf Moon 2026) कहा जा रहा है. इस दिन आसमान में आप बेहद सुंदर नजारा देख जाएंगे. रात में चंद्रमा की रोशनी आपको आकर्षित करेगी. आइए जानते हैं कितने बजे होगी यह घटना.

भारत में कब दिखेगा वुल्फ मून (January 2026  Wolf Moon Time in India)

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पौष पूर्णिमा पर महत्वपूर्ण खगोलीय घटना घटेगी, जिसे वुल्फ मून के नाम से जाना जाता है. भारतीय समयानुसार 3 जनवरी 2026 को रात करीब 10 बजकर 45 मिनट पर पृथ्वी अपनी कक्षा में सूर्य के सबसे नजदीक बिंदु पर होगा. ऐसी स्थिति को उपसौर के नाम से भी जाना जाता है. इस समय पृथ्वी और सूरज के बीच की दूरी करीब 14 करोड़ 70 लाख 99 हजार894 किलोमीट होगी. उपसौर यानी Perihelion के समय पृथ्वी अपनी कक्षा में सबसे तीव्र गति (लगभग 30.27 कि.मी.) से घूमती है.

क्यों कहते हैं वुल्फ मून (Wolf Moon History)

साल के सभी 12 माह की पूर्णिमा को अलग-अलग नामों से जाना जाता है. जनवरी महीने की पूर्णिमा को वुल्फ मून कहा जाता है, जोकि साल की पहली पूर्णिमा होती है. खगोलविदों के अनुसार, इस महीने की पूर्णिमा का नाम वुल्फ मून होने का ऐतिहासिक कारण यह है कि, प्राचीन समय में जनवरी के महीने में कड़ाके की ठंड पड़ती थी और उत्तरी गोलार्ध में भेडियों के झुंड की आवाज सुनाई देती थी. इसलिए इस पूर्णिमा का नाम भेड़िये यानी वुल्फ के नाम पर रखा गया.

धार्मिक दृष्टि से भी जनवरी की पूर्णिमा खास

हिंदू धर्म में पूर्णिमा की तिथि को धार्मिक दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है. आमतौर पर जनवरी के महीने में पौष या माघ महीना होता है. हिंदू कैलेंडर के अनुसार, इस साल 2026 में 3 जनवरी को पौष या पूस पूर्णिमा है. इस तिथि पर लोग स्नान, दान, व्रत, पूजा आदि जैसे धार्मिक कार्य करते हैं. साथ ही पौष पूर्णिमा माघ मेला (Magh Mela 2026) का पहला स्नान भी किया जाता है. 

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