Navratri: शारदीय नवरात्रि आते ही देशभर में मां दुर्गा की पूजा शुरू हो जाती है. उत्तर भारत में नौ दिनों तक नवरात्रि, व्रत और कन्या पूजन की चर्चा होती है, जबकि पश्चिम बंगाल में षष्ठी से दशमी तक दुर्गा पूजा की सबसे ज्यादा धूम दिखाई देती है. ऐसे में सवाल उठता है कि नवरात्रि और दुर्गा पूजा क्या एक ही पर्व हैं या दोनों अलग हैं?

Continues below advertisement

सीधी बात यह है कि दोनों का धार्मिक आधार देवी की उपासना है, लेकिन पूजा-पद्धति और सांस्कृतिक परंपरा अलग है. शारदीय नवरात्रि नौ रातों तक चलने वाली देवी आराधना की परंपरा है, जबकि बंगाल की दुर्गा पूजा इसी शारदीय देवी उपासना का एक विशिष्ट क्षेत्रीय और सांस्कृतिक स्वरूप है.

शास्त्रों में नवरात्रि का क्या आधार है?

देवी भागवत पुराण के सप्तम स्कंध में देवी उपासना से जुड़े व्रतों का वर्णन मिलता है. इसमें वर्ष में दो प्रमुख नवरात्र, एक शरद ऋतु और दूसरा वसंत ऋतु में, करने का उल्लेख है. इससे शारदीय और चैत्र नवरात्र की प्राचीन धार्मिक परंपरा का आधार मिलता है.

Continues below advertisement

नवरात्रि में प्रतिपदा से नवमी तक देवी के अलग-अलग स्वरूपों की आराधना की जाती है. उत्तर भारत में शैलपुत्री से सिद्धिदात्री तक नवदुर्गा की पूजा का प्रचलन है. इस दौरान घटस्थापना, व्रत, दुर्गा सप्तशती का पाठ और अष्टमी या नवमी को कन्या पूजन जैसी परंपराएं निभाई जाती हैं.

दुर्गा पूजा में पांच दिन ही प्रमुख क्यों?

बंगाल में देवी दुर्गा की पूजा का सबसे प्रमुख दौर षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी और दशमी माना जाता है. षष्ठी को देवी के आगमन और बोधन से मुख्य पूजा आरंभ होती है. सप्तमी में नवपत्रिका पूजा, अष्टमी में महाअष्टमी और संधि पूजा, नवमी में महानवमी तथा दशमी को विजयादशमी और प्रतिमा विसर्जन होता है.

यही वजह है कि आम बोलचाल में दुर्गा पूजा को पांच दिनों का त्योहार कहा जाता है. हालांकि इसकी धार्मिक और सांस्कृतिक तैयारी इससे पहले शुरू हो जाती है. UNESCO भी दुर्गा पूजा को देवी दुर्गा की व्यापक दस-दिवसीय उपासना परंपरा के रूप में दर्ज करता है, जिसकी शुरुआत महालया से जुड़ी मानी जाती है और समापन दशमी पर विसर्जन के साथ होता है. 2021 में Durga Puja in Kolkata को UNESCO की Intangible Cultural Heritage सूची में शामिल किया गया था.

दुर्गा सप्तशती से क्या संबंध है?

मार्कण्डेय पुराण का प्रसिद्ध हिस्सा देवी माहात्म्य, जिसे दुर्गा सप्तशती या चंडी पाठ भी कहा जाता है, देवी दुर्गा की उपासना का महत्वपूर्ण ग्रंथ है. इसमें महिषासुर पर देवी की विजय सहित देवी के विभिन्न युद्धों और स्वरूपों का वर्णन मिलता है. दुर्गा पूजा और नवरात्रि दोनों में इसके पाठ की परंपरा है.

बंगाल में दुर्गा पूजा का इतिहास

बंगाल में देवी पूजा की परंपरा काफी पुरानी है, लेकिन आज दिखने वाले भव्य दुर्गा पूजा उत्सव का स्वरूप समय के साथ विकसित हुआ. इतिहासकारों के अनुसार 18वीं शताब्दी में बंगाल के जमींदार और संपन्न परिवारों में भव्य दुर्गा पूजा प्रतिष्ठा और सामाजिक आयोजन का बड़ा माध्यम बनी. बाद में सामुदायिक पूजा और सार्वजनिक पंडालों की परंपरा मजबूत हुई.

इसलिए नवरात्रि और दुर्गा पूजा को दो बिल्कुल असंबंधित त्योहार कहना भी सही नहीं है और दोनों को पूरी तरह एक जैसा मानना भी ठीक नहीं. नवरात्रि नौ रातों की व्यापक शक्ति-उपासना है, जबकि दुर्गा पूजा उसी शारदीय देवी आराधना की बंगाल और पूर्वी भारत में विकसित विशिष्ट पूजा परंपरा है, जिसके पांच दिन सबसे प्रमुख माने जाते हैं.

FAQ

1. नवरात्रि और दुर्गा पूजा में क्या अंतर है?नवरात्रि नौ दिनों की देवी उपासना है, जबकि दुर्गा पूजा खासकर बंगाल और पूर्वी भारत में प्रचलित मां दुर्गा की विशिष्ट पूजा परंपरा है.

2. दुर्गा पूजा केवल 5 दिन की क्यों मानी जाती है?दुर्गा पूजा का मुख्य उत्सव षष्ठी से दशमी तक चलता है. इन पांच दिनों में प्रमुख पूजा, अनुष्ठान और विसर्जन होते हैं.

3. नवरात्रि में 9 दिन किसकी पूजा होती है?नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों, जिन्हें नवदुर्गा कहा जाता है, की प्रतिपदा से नवमी तक पूजा की जाती है.

4. दुर्गा पूजा की शुरुआत षष्ठी से क्यों होती है?बंगाल की परंपरा में षष्ठी के दिन देवी का बोधन और आमंत्रण किया जाता है. इसी दिन से दुर्गा पूजा का मुख्य चरण शुरू माना जाता है.

5. क्या नवरात्रि और दुर्गा पूजा एक ही पर्व हैं?दोनों का आधार देवी शक्ति की उपासना है, लेकिन पूजा-पद्धति और परंपराएं अलग हैं. दुर्गा पूजा शारदीय देवी उपासना का विशिष्ट क्षेत्रीय स्वरूप है.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.