Kark Sankranti 2026: सनातन धर्म में कर्क संक्रांति का विशेष महत्व माना जाता है. यह वह दिन होता है जब सूर्य देव मिथुन राशि से निकलकर कर्क राशि में प्रवेश करते हैं. इसी के साथ दक्षिणायन की शुरुआत भी मानी जाती है, जिसे देवताओं की रात्रि का आरंभ कहा जाता है.

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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन स्नान, दान, जप, तप और सूर्य उपासना करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है. 

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भविष्यवक्ता एवं कुंडली विश्लेषक डा. अनीष व्यास के अनुसार, कर्क संक्रांति केवल एक ज्योतिषीय घटना नहीं, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जाती है. इस दिन सूर्य देव की आराधना करने और जरूरतमंदों को दान देने का विशेष महत्व बताया गया है.

कर्क संक्रांति 2026 कब है?

पंचांग के अनुसार कर्क संक्रांति 16 जुलाई 2026, गुरुवार को मनाई जाएगी. इस दिन सूर्य देव रात्रि 11:45 बजे कर्क राशि में प्रवेश करेंगे.

कर्क संक्रांति 2026 शुभ मुहूर्त

  • तिथि: 16 जुलाई 2026, गुरुवार
  • सूर्य का कर्क राशि में प्रवेश: रात्रि 11:45 बजे
  • पुण्यकाल: दोपहर 12:22 बजे से शाम 6:47 बजे तक
  • महापुण्यकाल: शाम 4:39 बजे से 6:47 बजे तक 

कर्क संक्रांति का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यता है कि कर्क संक्रांति से सूर्य की उत्तरायण यात्रा समाप्त होकर दक्षिणायन आरंभ होता है. शास्त्रों में दक्षिणायन को साधना, आत्मचिंतन और आध्यात्मिक उन्नति का समय माना गया है. यही कारण है कि इस दिन भगवान सूर्य की पूजा, पितरों का स्मरण और दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है. 

मान्यता है कि इस दिन किए गए शुभ कार्यों का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है. इसलिए श्रद्धालु नदी या पवित्र जल में स्नान कर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करते हैं.

कर्क संक्रांति पर क्या करें?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन-

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें.
  • तांबे के लोटे से सूर्य देव को जल अर्पित करें.
  • "ॐ घृणि सूर्याय नमः" मंत्र का जाप करें.
  • गेहूं, गुड़, लाल वस्त्र या अन्न का दान करें.
  • जरूरतमंद लोगों की सहायता करें.
  • भगवान विष्णु और सूर्य देव की पूजा करें.

किन कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कर्क संक्रांति के दिन—

  • क्रोध और विवाद से बचें.
  • किसी का अपमान न करें.
  • नशे और तामसिक भोजन से दूरी रखें.
  • दान करते समय दिखावा न करें.
  • असत्य बोलने और छल-कपट से बचें.

ज्योतिष में कर्क संक्रांति का महत्व

डा. अनीष व्यास के अनुसार सूर्य आत्मबल, नेतृत्व, ऊर्जा और आत्मविश्वास का कारक ग्रह माना जाता है. सूर्य के कर्क राशि में प्रवेश को संवेदनशीलता, परिवार और भावनात्मक पक्ष से भी जोड़कर देखा जाता है. हालांकि, इसका प्रभाव व्यक्ति की जन्म कुंडली, ग्रहों की स्थिति और दशा के अनुसार अलग-अलग हो सकता है.

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.