Israel Election Results 2026: इजरायल में वोट पड़ चुके हैं, लेकिन अगली सरकार की तस्वीर साफ नहीं है. बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड सबसे बड़ी पार्टी बनती दिख रही है, फिर भी उनका खेमा बहुमत के लिए जरूरी समर्थन से पीछे है.

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ज्योतिषीय नजरिये से भी उनके लिए यह समय आसान नहीं दिखता. सत्ता भाव में केतु का गोचर और लाभेश बुध पर वक्री शनि की दृष्टि चुनौती बढ़ाने वाले संकेत हैं. हालांकि, उच्च गुरु उनकी वापसी की संभावना बनाए रखता है.

सबसे बड़ी पार्टी, फिर भी सत्ता की गारंटी नहीं

इजरायली समाचार वेबसाइट Ynet के 48.43 प्रतिशत मतगणना वाले अपडेट में नेतन्याहू का खेमा 55 सीटों पर था. सरकार बनाने के लिए 61 सांसदों का समर्थन चाहिए. ये आंशिक आंकड़े हैं, अंतिम नतीजे नहीं. द टाइम्स ऑफ इजरायल के अनुसार विपक्ष को भी अरब दलों के सहयोग पर अपने चुनावी वादों की बाधा पार करनी होगी. यही पेच नेतन्याहू के लिए चुनौती और अवसर, दोनों है.

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नेतन्याहू की कुंडली में मंगल-केतु क्यों अहम?

नेतन्याहू की वृश्चिक लग्न कुंडली में लग्नेश मंगल सत्ता के दसवें भाव, सिंह राशि में है. 28 अक्टूबर के गोचर में केतु भी सिंह में है. मध्यम केतु और जन्मकालीन मंगल के बीच लगभग डेढ़ डिग्री का अंतर है.

ज्योतिषीय में सत्ता भाव में मंगल के इतना करीब केतु का पहुंचना नेतृत्व और राजनीतिक नियंत्रण की परीक्षा का संकेत माना जाता है. इसलिए उनके लिए जरूरी समर्थन जुटाना कठिन हो सकता है.

वहीं मीन राशि में वक्री शनि की सप्तम दृष्टि जन्मकालीन बुध पर पड़ रही है. बुध उनकी कुंडली में लाभ के ग्यारहवें भाव का स्वामी है. यह स्थिति सहयोग जुटाने, सहमति बनाने और अपेक्षित राजनीतिक लाभ मिलने में बाधा या देरी की ओर संकेत करती है. यानी राह आसान नहीं है.

इजरायल की कुंडली में शासन पर शनि की दृष्टि

इजरायल की कन्या लग्न कुंडली में वक्री शनि सातवें भाव से लग्न और सत्ता के दसवें भाव को देख रहा है. मेदिनी ज्योतिष में इसे साझेदारी और शासन पर दबाव की स्थिति माना जाता है.

राहु की महादशा के बीच यह गोचर राजनीतिक अनिश्चितता की व्याख्या को बल देता है. चुनाव से पहले प्रकाशित विश्लेषण में भी कठिन मुकाबले और समझौतों पर निर्भरता के संकेत दिए गए थे. शुरुआती गतिरोध उसी संभावना से मेल खाता है. यहां पढ़ें ये लेख-

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वापसी का रास्ता क्यों खुला है?

कर्क राशि में उच्च गुरु नेतन्याहू के वृश्चिक लग्न पर पंचम दृष्टि डाल रहा है. यह अनुकूल संकेत सहयोग और संकट से रास्ता निकलने की संभावना बचाता है.

दोनों कुंडलियों के संकेत बताते हैं कि नेतन्याहू के लिए सत्ता बचाने की राह आसान नहीं है. ग्रहों की स्थिति राजनीतिक खींचतान और सहयोगियों पर बढ़ती निर्भरता की ओर इशारा करती है. विपक्ष बहुमत जुटाने में सफल रहा तो उनकी विदाई हो सकती है, लेकिन विरोधी दलों के मतभेद उन्हें एक और मौका दे सकते हैं. फिलहाल सत्ता परिवर्तन तय नहीं है. अंतिम तस्वीर मतगणना पूरी होने और गठबंधन के समीकरण साफ होने के बाद ही सामने आएगी.

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