Gemstone Astrology: रत्नों को हमेशा से सौभाग्य, सफलता और ऊर्जा का प्रतीक माना गया है. क्या आप जानते हैं कि हर रत्न हर व्यक्ति के लिए शुभ नहीं होता. अगर बिना सोच-समझे कोई रत्न पहन लिया जाए, तो उसका उल्टा असर भी हो सकता है. इसलिए किसी भी रत्न को धारण करने से पहले ज्योतिषीय सलाह लेना बेहद जरूरी है. आइए जानते हैं इसके बारे में-
किसी भी रत्न को पहनने से पहले सबसे अहम बात यह है कि वह आपकी कुंडली और ग्रह स्थिति के अनुसार शुभ हो. अपने मन से रत्न नहीं पहनने की सलाह दी जाती है. पहले किसी योग्य ज्योतिष से अपनी जन्मपत्रिका दिखाएं.
वह बताएगा कि आपके लिए कौन-सा रत्न लाभकारी रहेगा. हर ग्रह का एक विशेष रत्न होता है और कई बार दो ग्रह आपस में शत्रु भी होते हैं. ऐसे में मोती और नीलम एक साथ नहीं पहने जाते. इनके ग्रह परस्पर विरोधी हैं.
रत्न की गुणवत्ता, रत्ती और धातु पर ध्यान दें
रत्न पहनने से पहले उसकी शुद्धता जांचना जरूरी है. कभी भी टूटा-फूटा या खंडित रत्न नहीं पहनें. नकली रत्न से शुभ फल की जगह हानि भी हो सकती है. ज्योतिष के अनुसार, प्रत्येक रत्न का एक निर्धारित वज़न (रत्ती) होता है. आपको कितने रत्ती का रत्न पहनना है. यह आपकी कुंडली के अनुसार तय किया जाता है.
रत्न को हमेशा संबंधित धातु में ही पहनें. माणिक्य या मोती को लोहे की अंगूठी में नहीं पहनना चाहिए. ध्यान रखें कि रत्न आपकी त्वचा से स्पर्श करता रहे. तभी उसकी ऊर्जा आपके शरीर में प्रवेश करेगी.
सही दिन, समय और अंगुली का चयन
हर रत्न को पहनने का एक विशेष दिन और तिथि होती है. उदाहरण के लिए, पुखराज गुरुवार को, नीलम शनिवार को और पन्ना बुधवार को धारण किया जाता है. रत्न को उसकी निर्धारित अंगुली में ही पहनें. गलत उंगली में पहनने से उसका असर कम हो सकता है. विपरीत परिणाम भी मिल सकते हैं. किसी दूसरे का पहना हुआ रत्न कभी नहीं पहनें.
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