मानसून की विदाई के साथ ही सितंबर का महीना सर्दियों की सब्जियों की नर्सरी तैयार करने के लिए सबसे अच्छा समय माना जाता है. उत्तर भारत में इस दौरान तापमान 25 से 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता है, जो टमाटर, बैंगन, पत्तागोभी, फूलगोभी और शिमला मिर्च जैसी सब्जियों के पौधे तैयार करने के लिए बेहद अनुकूल होता है. किसानों के बीच एक कहावत भी मशहूर है कि स्वस्थ और मजबूत नर्सरी तैयार कर लेना ही आधी फसल उगाने के बराबर होता है. आइए जानते हैं कि सर्दियों की सब्जियों की नर्सरी तैयार करते समय किन-किन बातों का खास ध्यान रखना चाहिए.

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किन सब्जियों के लिए जरूरी है नर्सरी?

टमाटर, बैंगन, पत्तागोभी, फूलगोभी, ब्रोकली, शिमला मिर्च और मिर्च जैसी सब्जियां सीधे खेत में बीज बोने से अच्छी तरह नहीं उगतीं, इसलिए इन्हें पहले नर्सरी में तैयार किया जाता है और फिर करीब एक महीने बाद खेत में रोपा जाता है. वहीं भिंडी, सरसों और फलियों जैसी सब्जियों के बीज सीधे खेत में बोए जा सकते हैं, इसलिए इनके लिए अलग से नर्सरी तैयार करने की जरूरत नहीं पड़ती.

बेड की सही दिशा का रखें ध्यान

नर्सरी के लिए बेड हमेशा पूर्व से पश्चिम दिशा में तैयार करनी चाहिए, जबकि बीज बुवाई के लिए बनाई जाने वाली क्यारियां उत्तर से दक्षिण दिशा की ओर होनी चाहिए. इससे पौधों को दिनभर सूरज की रोशनी बराबर मात्रा में मिलती है, जिससे उनकी बढ़वार अच्छी होती है. बेड बनाते समय मिट्टी को अच्छी तरह भुरभुरा बना लेना चाहिए और उसमें सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाना फायदेमंद रहता है.

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प्रो-ट्रे तकनीक भी है एक बेहतर विकल्प

पारंपरिक तरीके के अलावा अब प्रो-ट्रे तकनीक भी काफी लोकप्रिय हो रही है, जिसमें अलग-अलग खानों वाली ट्रे में हर बीज को अलग-अलग बोया जाता है. इस तकनीक से पौधे की जड़ों को कोई नुकसान पहुंचाए बिना उन्हें आसानी से खेत में रोपा जा सकता है, जिससे पौधे जल्दी और मजबूती से जमीन पकड़ लेते हैं. इस तरीके से शिमला मिर्च और मिर्च के बीज 8 से 10 दिन में, टमाटर 4 से 6 दिन में, बैंगन 7 से 8 दिन में और पत्तागोभी सिर्फ 2 से 3 दिन में अंकुरित हो जाते हैं.

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बीज उपचार करना है बेहद जरूरी

बुवाई से पहले बीजों को फफूंदनाशक दवा से उपचारित करना बेहद जरूरी है, ताकि बीज जनित बीमारियों से बचाव हो सके. इसके बिना कई बार पौधे उगने के तुरंत बाद ही मुरझाकर मर जाते हैं, जिसे डैंपिंग ऑफ रोग कहा जाता है. यह समस्या खासकर ज्यादा नमी वाली मिट्टी में ज्यादा देखने को मिलती है, इसलिए मिट्टी में उचित जल निकासी की व्यवस्था भी जरूर करनी चाहिए.

पानी और छांव का रखें ध्यान

नर्सरी में बीज बोने के बाद हल्की सिंचाई करनी चाहिए, ताकि मिट्टी नम बनी रहे लेकिन ज्यादा गीली न हो. शुरुआती दिनों में तेज धूप से बचाने के लिए हल्के शेड नेट का इस्तेमाल फायदेमंद रहता है, खासकर जब सितंबर में गर्मी और उमस दोनों बनी रहती हैं. जैसे-जैसे पौधे बड़े होते जाएं, धीरे-धीरे उन्हें ज्यादा धूप की आदत डलवानी चाहिए, ताकि खेत में रोपने के बाद वे झटका सहन कर सकें.

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