Fruits Expensive During Monsoon Reasons : बारिश का मौसम आते ही बाजार में फलों की कीमतें अचानक बढ़ने लगती हैं. आम, केला, सेब, नाशपाती और दूसरे कई फलों के दाम पहले की तुलना में काफी ज्यादा हो जाते हैं. ऐसे में अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है कि आखिर हर साल मानसून आते ही फल इतने महंगे क्यों हो जाते हैं. क्या सिर्फ बारिश इसकी वजह है या इसके पीछे और भी कारण हैं. दरअसल फलों की बढ़ती कीमतों के पीछे सिर्फ एक नहीं बल्कि कई वजहें जिम्मेदार होती हैं. तो आइए जानते हैं कि आखिर बरसात के मौसम में फल क्यों महंगे हो जाते हैं और इसके पीछे की वजह क्या है. 

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बरसात के मौसम में फल क्यों महंगे हो जाते हैं?

विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून में फलों की महंगाई की सबसे बड़ी वजह फसल का नुकसान, सप्लाई चेन में रुकावट, परिवहन लागत में बढ़ोतरी, कोल्ड स्टोरेज की कमी और ज्यादा नमी के कारण फलों का जल्दी खराब होना है. ऐसे में जब उत्पादन घटता है और बाजार में मांग बनी रहती है, तो फलों की कीमतें बढ़ जाती हैं.

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इसके पीछे की वजह क्या है?

1. लगातार बारिश और कई जगहों पर जलभराव होने से फलों की फसल को काफी नुकसान पहुंचता है. ज्यादा पानी भरने से पौधों की जड़ें खराब होने लगती हैं. वहीं तेज हवा और आंधी के कारण पेड़ों से कच्चे फल गिर जाते हैं. इससे उत्पादन कम हो जाता है और बाजार में फलों की उपलब्धता घट जाती है और फल महंगे हो जाते हैं. 

2. मानसून के दौरान कई जगह सड़कें खराब हो जाती हैं और बाढ़ या भारी बारिश की वजह से ट्रकों की आवाजाही भी प्रभावित होती है. ऐसे में खेतों से मंडियों तक फल समय पर नहीं पहुंच पाते हैं. जब बाजार में फलों की सप्लाई कम होती है और मांग बनी रहती है, तो कीमतें बढ़ना तय हो जाता है. 

3. बारिश के मौसम में माल ढुलाई आसान नहीं रहती है. खराब रास्तों और ट्रैफिक की वजह से ट्रकों को ज्यादा समय लगता है और ईंधन साथ ही परिवहन का खर्च भी बढ़ जाता है. यही अतिरिक्त लागत बाद में फलों की कीमतों में जुड़ जाती है, जिसका असर सीधे ग्राहकों पर पड़ता है. 

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4. मानसून में हवा में नमी काफी ज्यादा रहती है. ऐसे मौसम में फल जल्दी सड़ने लगते हैं और उन पर फफूंद या कीट लगने का खतरा भी बढ़ जाता है. किसानों और व्यापारियों को फलों को सुरक्षित रखने के लिए ज्यादा खर्च करना पड़ता है. नुकसान की भरपाई के लिए भी कीमतें बढ़ जाती हैं. 

5. फलों को लंबे समय तक ताजा रखने के लिए कोल्ड स्टोरेज और मजबूत कोल्ड चेन की जरूरत होती है. हालांकि कई जगहों पर ऐसी सुविधाएं नहीं हैं. बारिश के दौरान बिजली और लॉजिस्टिक्स की दिक्कतों के कारण फलों को सुरक्षित रखना और महंगा हो जाता है. इससे फलों की बर्बादी बढ़ती है और बाजार में कीमतें ऊपर चली जाती हैं. 

इन फलों की कीमतों पर सबसे ज्यादा असर

साल 2025 के दौरान भारी बारिश और बाढ़ का असर कई राज्यों में फलों की खेती पर देखने को मिला. आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र में बारिश से केले की फसल प्रभावित हुई, जिससे इसकी कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई. वहीं जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में बाढ़ और खराब मौसम की वजह से सेब की फसल और उसकी सप्लाई प्रभावित हुई. इसके अलावा लीची, नाशपाती, बेर और दूसरे ताजे फलों की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखी गई. 

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