केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा किसानों की आर्थिक मदद के लिए कई तरह की कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं. इनमें पीएस किसान सम्मान निधि योजना से लेकर फसल बीमा और खाद-बीज पर मिलने वाली सब्सिडी शामिल हैं. हालांकि, कई बार ऐसा देखा जाता है कि किसानों के पास खेती की जमीन के पुख्ता कागज होने के बावजूद उन्हें योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता.

Continues below advertisement

सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने के बाद भी उनकी किस्तें रुक जाती हैं या आवेदन निरस्त हो जाते हैं. इस समस्या के पीछे जमीन के कागजात की कमी नहीं, बल्कि कुछ अन्य तकनीकी और प्रशासनिक कमियां होती हैं, जिन्हें समय रहते ठीक न करने पर किसान भाई सरकारी मदद से वंचित रह जाते हैं. 

भू-सत्यापन या लैंड सीडिंग की कमी

जमीन के कागज होने के बाद भी योजना का लाभ न मिलने की सबसे मुख्य वजह लैंड सीडिंग का अधूरा होना है. सरकार ने फर्जीवाड़े को रोकने के लिए अब अनिवार्य कर दिया है कि किसान की जमीन का रिकॉर्ड डिजिटल रूप से उनके आधार कार्ड और योजना के पोर्टल से लिंक होना चाहिए. कई बार किसानों के पास कागजी खतौनी तो होती है, लेकिन सरकारी पोर्टल पर उनका भू-लेख सत्यापन अपडेट नहीं हो पाता है. यदि आपके आवेदन स्टेटस में लैंड सीडिंग नो दिखाई दे रहा है तो आपके पास कागज होने का कोई फायदा नहीं मिलेगा और आपकी किस्तें तुरंत रोक दी जाएंगी.

Continues below advertisement

आधार और बैंक खाते के नाम में अंतर

एक और बड़ी कमी जो अक्सर सामने आती है, वह है दस्तावेजों में नाम की स्पेलिंग का अलग होना. जमीन के कागजात पर किसान का नाम कुछ और होता है, जबकि आधार कार्ड या बैंक पासबुक में स्पेलिंग थोड़ी अलग होती है. सरकारी सिस्टम पूरी तरह डिजिटल होने के कारण नाम में एक अक्षर की भी गलती होने पर आवेदन को रिजेक्ट कर देता है. इसके अलावा, यदि किसान का आधार कार्ड उनके बैंक खाते से लिंक नहीं है या बैंक अकाउंट में DBT सेवा चालू नहीं है, तो सरकार द्वारा भेजी गई सहायता राशि खाते में ट्रांसफर नहीं हो पाती है.

संयुक्त खाते या पारिवारिक जमीन का पेंच

गांवों में अक्सर जमीन परिवार के बड़े-बुजुर्गों के नाम पर होती है या फिर एक ही खतौनी में कई हिस्सेदारों के नाम दर्ज होते हैं. ऐसी स्थिति में यदि कोई एक सदस्य अपने नाम पर पूरी योजना का लाभ लेना चाहता है, तो तकनीकी कारणों से उसका आवेदन निरस्त हो जाता है.

संयुक्त खाते वाली जमीन के मामलों में जब तक पटवारी या राजस्व विभाग द्वारा जमीन का हिस्सा स्पष्ट करके पोर्टल पर अलग से फीड नहीं किया जाता, तब तक नए आवेदक को योजना का लाभ मिलने में दिक्कत आती है. कई बार किसान बिना पारिवारिक बंटवारे और म्यूटेशन के ही पुराने कागजों के आधार पर अप्लाई कर देते हैं, जो रिजेक्शन का बड़ा कारण बनता है.

यह भी पढ़ें: डेयरी शुरू करने का सुनहरा मौका, पशुपालकों के लोन पर 100% ब्याज सब्सिडी

E-KYC प्रक्रिया का पूरा न होना

डिजिटल सुरक्षा और सही लाभार्थियों की पहचान के लिए सरकार समय-समय पर E-KYC कराना अनिवार्य करती है. जिन किसानों ने अपने मोबाइल नंबर को आधार से लिंक नहीं कराया है या जनसेवा केंद्र पर जाकर अपना बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन नहीं पूरा किया है, उनकी चालू किस्तें भी अचानक बंद कर दी जाती हैं.

यह भी पढ़ें: क्या गाय-भैंस को भी हो सकता है रेबीज, कुत्ता काट ले तो क्या करें?