White Leghorn: किसान खेती के अलावा मुर्गीपालन से भी काफी मुनाफा कमाते हैं. दुनिया में कई तरह की मुर्गियों का पालन किया जाता है. लेकिन जब बात सबसे ज्यादा अंडे देने वाली नस्ल की आती है तो व्हाइट लेगहॉर्न का नाम सबसे पहले लिया जाता है. यही वजह है कि भारत समेत कई देशों के पोल्ट्री फार्मों में इस नस्ल की मांग लगातार बनी रहती है.

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 कम उम्र में अंडे देना शुरू करने वाली यह मुर्गी अपनी बेहतर उत्पादकता और कम रखरखाव लागत के लिए जानी जाती है. अगर किसान कम खर्च में अच्छा मुनाफा कमाना चाहते हैं तो व्हाइट लेगहॉर्न उनके लिए बेहतरीन ऑप्शन साबित हो सकती है. यह नस्ल सालभर शानदार उत्पादन देती है. यही वजह है कि पोल्ट्री फार्मिंग में इसे सबसे भरोसेमंद नस्लों में गिना जाता है.

सालभर में देती है रिकॉर्डतोड़ अंडे

व्हाइट लेगहॉर्न की सबसे बड़ी खासियत इसकी अंडे देने की क्षमता है. यह मुर्गी सामान्य तौर पर एक साल में 280 से 320 अंडे देती है. वहीं अगर इसे अच्छा संतुलित आहार और बढ़िया माहौल मिले तो इसका उत्पादन 340 अंडों तक भी पहुंच सकता है. करीब 18 से 20 सप्ताह की उम्र में यह अंडे देना शुरू कर देती है. इसके अंडों का रंग सफेद होता है और बाजार में इनकी अच्छी मांग रहती है. 

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यह नस्ल ज्यादा चारा खाए बिना भी अच्छा उत्पादन देती है. इसलिए प्रति अंडा लागत कम आती है. इसी वजह से छोटे और बड़े दोनों तरह के पोल्ट्री फार्म इसे प्राथमिकता देते हैं. इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी अच्छी मानी जाती है. जिससे पालन में जोखिम भी ताफी कम रहता है और किसानों को बेहतर मुनाफा मिलता है.

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कितनी है इसकी कीमत?

व्हाइट लेगहॉर्न की कीमत उसकी उम्र, क्वालिटी और उपलब्धता पर निर्भर करती है. एक दिन के चूजे की कीमत आमतौर पर 40 से 80 रुपये के बीच होती है. जबकि तैयार लेयर मुर्गी 350 से 700 रुपये या उससे अधिक कीमत में मिल सकती है. बड़े पोल्ट्री फार्म एक साथ बड़ी संख्या में चूजे खरीदते हैं. जिससे लागत और कम हो जाती है. 

यह नस्ल हल्के वजन की होती है. इसलिए इसका रखरखाव आसान रहता है और चारे की खपत भी कम होती है. लगातार अंडा उत्पादन, कम खर्च और बेहतर लाभ की वजह से यह दुनिया की सबसे लोकप्रिय लेयर नस्लों में शामिल है. 

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