आज के समय में भी भारत की बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है. अगर किसान पारंपरिक फसलों के साथ-साथ फल वाली खेती अपनाएं, तो उनकी आमदनी कई गुना बढ़ सकती है. ऐसी ही एक फायदे की खेती कीनू (किन्नू) की खेती है , जिसे सही मौसम और सही तरीके से किया जाए तो यह किसानों के लिए कमाई का मजबूत जरिया बन सकती है.

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कीनू नींबू वर्ग का एक प्रसिद्ध फल है, जिसमें संतरा, नींबू और मौसमी जैसे गुण पाए जाते हैं. इसका टेस्ट हल्का खट्टा-मीठा होता है, जो लोगों को बहुत पसंद आता है. यही वजह है कि बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है. ऐसे में आइए जानते हैं कि कौन-सा मौसम कीनू की खेती के लिए परफेक्ट रहता है. 

भारत में कीनू की खेती कहां होती है?

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कीनू की खेती मुख्य रूप से उत्तर भारत में की जाती है. पंजाब को कीनू का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य माना जाता है. इसके अलावा हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में भी इसकी खेती बड़े पैमाने पर की जा रही है. अच्छी बात यह है कि भारत के लगभग सभी क्षेत्रों में, जहां मौसम अनुकूल हो, वहां कीनू की खेती आसानी से की जा सकती है. 

कीनू की खेती के लिए कौन-सा मौसम सबसे अच्छा है? कीनू की खेती के लिए उपोष्णकटिबंधीय जलवायु (Subtropical Climate) सबसे उपयुक्त मानी जाती है. इसके पौधों की अच्छी बढ़वार के लिए तापमान 10°C से 35°C के बीच होना चाहिए. इसका फूल आने और फल बनने के समय 20°C से 30°C तापमान सबसे बेहतर रहता है. वहींन बहुत ज्यादा ठंड या पाला कीनू के पौधों को नुकसान पहुंचा सकता है.कीनू की खेती के लिए 300 से 400 मिलीमीटर बारिश पर्याप्त होती है. ज्यादा पानी भराव से पौधों की जड़ें खराब हो सकती हैं, इसलिए जल निकासी बहुत जरूरी है. 

कीनू की खेती से कितनी कमाई हो सकती है?

कीनू की खेती कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाली खेती मानी जाती है. इसका एक पेड़ से लगभग 80 से 150 किलो फल मिल सकता है. इसके एक एकड़ में करीब 200 से 214 पौधे लगाए जाते हैं. वही इसके एक पौधे की कीमत लगभग 50 रुपये होती है. बाजार में कीनू की कीमत 20 से 45 रुपये प्रति किलो तक रहता है. संतरे का सीजन खत्म होने के बाद कीमत 45–50 रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकती है. कीनू की बिक्री देश के बड़े शहरों जैसे दिल्ली, कोलकाता, बेंगलुरु, हैदराबाद और पंजाब में आसानी से हो जाती है. इतना ही नहीं, श्रीलंका और सऊदी अरब जैसे देशों में भी इसकी अच्छी मांग है. 

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