Women farmers in field: खेती में महिलाओं की भूमिका दुनिया भर में लगातार बढ़ रही है. संयुक्त राष्ट्र के फूड एंड ऐग्रीकल्चर के मुताबिक, दुनिया के कृषि और खाद्य प्रणाली से जुड़े कामों में महिलाओं की बड़ी हिस्सेदारी है. हालांकि सबसे ज्यादा महिला किसान किस देश में हैं, इसकी कोई ऑफिसियल  वैश्विक रैंकिंग जारी नहीं की जाती है. अलग अलग देशों में महिलाओं की भागीदारी वहां की आबादी, खेती के तरीके और लेबर सिस्टम के हिसाब से अलग होती है.

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 बड़ी जिम्मेदारी संभालती हैं महिलाएं

संयुक्त राष्ट्र के फूड एंड ऐग्रीकल्चर और विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, उप सहारा अफ्रीका के कई देशों में खेती का बड़ा हिस्सा महिलाओं के भरोसे चलता है. रवांडा, तंजानिया, युगांडा, मलावी और इथियोपिया जैसे देशों में कृषि कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी काफी अधिक है. इन देशों में महिलाएं सिर्फ खेतों में काम ही नहीं करतीं, बल्कि बुआई, सिंचाई, कटाई, पशुपालन और फसल के भंडारण तक की जिम्मेदारी निभाती हैं. कई इलाकों में कृषि कार्यबल का आधे से ज्यादा हिस्सा महिलाओं का है.

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भारत में क्या है महिला किसानों की स्थिति?

भारत में भी खेती किसानी में महिलाओं की भूमिका बेहद अहम है. कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय और राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय  के मुताबिक, देश में कृषि और इससे जुड़े कार्यों में बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हैं. ग्रामीण भारत में लाखों महिलाएं खेती, डेयरी, बागवानी, पशुपालन और मत्स्य पालन से अपनी आजीविका चलाती हैं. कई राज्यों में पुरुषों के रोजगार के लिए बाहर जाने के बाद खेती की जिम्मेदारी महिलाओं के कंधों पर आ गई है.

 क्यों नहीं मिल पाती पूरी पहचान?

खेती में हाथ बटाने के बाद के बावजूद बड़ी संख्या में महिलाओं के नाम पर कृषि भूमि दर्ज नहीं है. इसी वजह से उन्हें कई बार किसान क्रेडिट कार्ड, बैंक लोन, बीमा और सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पाता. विशेषज्ञों का कहना है, कि अगर महिलाओं को जमीन का ओवरनशिप, और ज्यादा तकनीक और प्रशिक्षण की बेहतर सुविधा मिले तो कृषि उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों को मजबूती मिल सकती है.

सरकार और संस्थाएं क्या कर रही हैं?

महिला किसानों को मजबूत बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें कई योजनाएं चला रही हैं. महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना (MKSP), स्वयं सहायता समूह, प्राकृतिक खेती और कौशल प्रशिक्षण जैसे कार्यक्रमों के जरिए महिलाओं को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ा जा रहा है. फूड एंड ऐग्रीकल्चर भी महिलाओं को कृषि संसाधनों तक समान पहुंच देने पर जोर देता है, और मानता है कि इससे फूड सिक्यॉरिटी  और कृषि उत्पादन दोनों में सुधार हो सकता है.

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

विशेषज्ञों का मानना है कि खेती में महिलाओं का योगदान केवल मजदूरी तक सीमित नहीं है, बल्कि वे कृषि प्रबंधन का भी खास हिस्सा हैं. इसलिए उन्हें किसान के रूप में कानूनी पहचान, माली सहायता और तकनीकी संसाधनों तक बराबर पहुंच मिलना जरूरी है. यही कदम भविष्य में ठहराओ और मजबूत कृषि व्यवस्था की नींव बन सकते हैं. 

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