Totapuri Mango Farming: भारत में आम को फलों का राजा कहा जाता है और देश में इसकी सैकड़ों किस्मों की खेती की जाती है. इनमें से एक तोतापुरी आम है, जो अपने अलग आकार, हल्के खट्टे स्वाद और प्रोसेसिंग इंडस्ट्री में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने के कारण किसानों के बीच लोकप्रिय है. यह आम केवल ताजा खाने के लिए ही नहीं, बल्कि जूस, पल्प, शेक, अचार और दूसरे चीजें बनाने के लिए भी बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है. इसलिए इसकी बाजार में भी लगातार मांग बनी रहती है और किसानों को इससे अच्छा मुनाफा भी मिलता है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि तोतापुरी मैंगो सबसे ज्यादा भारत में कहां पैदा होता है और किसान इसकी पैदावार कैसे कर सकते हैं. 

Continues below advertisement

कहां होती है सबसे ज्यादा तोतापुरी आम की खेती? 

तोतापुरी आम की खेती मुख्य रूप से दक्षिण भारत के राज्यों में की जाती है. आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना और तमिलनाडु इसके प्रमुख उत्पादक राज्य है. इसके अलावा गुजरात और महाराष्ट्र में भी इसकी अच्छी पैदावार होती है. कई इलाकों में बड़ी संख्या में पल्प उद्योग होने की वजह से किसानों को अपनी फसल बेचने में ज्यादा परेशानी नहीं होती और उन्हें बेहतर दाम मिल जाते हैं. इस किस्म के आम को अलग-अलग क्षेत्र में अलग-अलग नाम से जाना जाता है, लेकिन इसकी पहचान, लंबी आकृति और तोते की चोंच जैसी नुकीली नाक से होती है, इसलिए इसका नाम तोतापुरी आम भी पड़ा. 

Continues below advertisement

स्वाद में कैसा होता है तोतापुरी आम?

तोतापुरी आम का स्वाद दूसरी मीठी किस्मों से अलग होता है. इसमें हल्की, खटास और कम मिठास होती है, जिससे यह जूस, पल्प, शेक और अचार बनाने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है. पकने पर इसका छिलका पीला और गूदा पीला नारंगी रंग का हो जाता है. एक फल का वजन आमतौर पर 250 से 500 ग्राम तक होता है. वहीं प्रोसेसिंग इंडस्ट्री में इसकी सबसे ज्यादा मांग रहती है, क्योंकि इसका गूदा गाढ़ा होता है और इससे हाई क्वालिटी का पल्प तैयार किया जाता है. 

ये भी पढ़ें-जुलाई में लगाएं यह सब्जी, महज 90 दिनों में किसानों की जेबें कर देगी फुल

तोतापुरी आम की खेती के लिए मिट्टी और जलवायु 

तोतापुरी आम की खेती के लिए गहरी और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है. लाल दोमट, जलोढ़ और लेटराइट मिट्टी में इसकी अच्छी पैदावार होती है. मिट्टी का पीएच 6.5 से 7.5 के बीच होना बेहतर माना जाता है. जलवायु की बात करें तो उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्र इसकी खेती के लिए सबसे अनुकूल है. फसल के बेहतर विकास के लिए 24 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान और पर्याप्त नमी फायदेमंद होती है. फूल आने से पहले गर्म मौसम अच्छा माना जाता है, जबकि फूल आने के दौरान ज्यादा बारिश होने से परागण प्रभावित हो सकता है. 

कब और कैसे करें पौधे की रोपाई?

तोतापुरी आम की रोपाई के लिए अगस्त-सितंबर और फरवरी-मार्च का समय सही माना जाता है. ग्राफ्टेड पौधों के लिए 99 मीटर की दूरी रखना बेहतर रहता है. रोपाई के करीब 1 महीने पहले 1*1*1 मीटर आकार के गड्ढे तैयार किए जाते हैं, जिनमें मिट्टी के साथ गोबर या की खाद या कंपोस्ट मिलाया जाता है. वहीं बेहतर उत्पादन के लिए पेड़ों की सूखी और कमजोर शाखाओं की समय-समय पर छंटनी करना जरूरी होता है. इससे पेड़ों में धूप और हवा का प्रवाह सही रहता है. शुरुआती 4 से 5 वर्षों तक खेत में खरपतवार नियंत्रण पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए, ताकि पौधों को पर्याप्त पोषण और नमी मिल सके.

ये भी पढ़ें-कश्मीर ही नहीं आपके खेत में भी हो सकती है केसर की खेती, जान लीजिए तरीका