रबी सीजन की सबसे मुख्य फसल गेहूं की बुवाई का समय बेहद करीब आ गया है. देश के करोड़ों किसान अपने खेतों को तैयार करने और अच्छी उपज पाने की प्लानिंग में जुट गए हैं। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि गेहूं की खेती में असली मेहनत बुवाई के बाद नहीं, बल्कि बुवाई से ठीक पहले होती है। अगर शुरुआत में ही कुछ जरूरी बातों पर ध्यान न दिया जाए, तो बाद में फसलों में बीमारी लगने, बीज न जमने और पैदावार कम होने जैसी कई गंभीर समस्याएं खड़ी हो जाती हैं। इसलिए हर किसान को गेहूं बोने से पहले 5 बेहद जरूरी काम निपटा लेने चाहिए, ताकि बाद में किसी तरह का नुकसान न उठाना पड़े.

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मिट्टी की जांच और खेत की सही तैयारी

गेहूं की बुवाई से पहले सबसे पहला और जरूरी काम है खेत की मिट्टी की जांच कराना. इससे खेत में मौजूद पोषक तत्वों की सही जानकारी मिलती है. इसके बाद खेत की तैयारी पर विशेष ध्यान दें. सबसे पहले खेत की एक गहरी जुताई करें और फिर दो से तीन बार हल्की जुताई करके पाटा लगाएं ताकि मिट्टी भुरभुरी और समतल हो जाए. समतल खेत में नमी लंबे समय तक बरकरार रहती है और सिंचाई के समय पानी पूरे खेत में एक समान रूप से फैलता है, जिससे पौधे अच्छे से विकास करते हैं.

उन्नत और प्रमाणित किस्मों के बीजों का चयन

अच्छी पैदावार का पूरा दारोमदार बीज की गुणवत्ता पर निर्भर करता है. किसानों को हमेशा अपने क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी के हिसाब से उन्नत और प्रमाणित बीजों का ही चयन करना चाहिए. हमेशा किसी विश्वसनीय सरकारी संस्थान, कृषि विज्ञान केंद्र या मान्यता प्राप्त दुकान से ही बीज खरीदें. कम कीमत के चक्कर में घटिया या बिना जांचे गए बीजों का इस्तेमाल करने से अंकुरण खराब होता है, जिससे बाद में पूरी फसल बर्बाद होने का खतरा रहता है.

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बीजोपचार है बेहद जरूरी

अधिकतर किसान सीधे बाजार से बीज लाकर सीधे खेतों में बो देते हैं, जो कि एक बड़ी गलती है. बुवाई से पहले बीजोपचार करना सबसे जरूरी प्रक्रिया है. बीजों को फफूंदनाशक दवाओं से उपचारित करने से शुरुआती दौर में लगने वाली फंगल बीमारियां, जड़ सड़न और दीमक जैसी समस्याओं से फसल का बचाव होता है. बीजोपचार करने से पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और लगभग सभी बीज अच्छे से अंकुरित होकर बाहर आते हैं.

खाद और उर्वरकों का संतुलित इस्तेमाल

गेहूं की फसल को शुरुआती विकास के लिए नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश की सबसे ज्यादा जरूरत होती है. बुवाई के समय ही खेत में डीएपी, यूरिया और म्यूटेट ऑफ पोटाश की अनुशंसित मात्रा डालनी चाहिए. ध्यान रखें कि खाद की मात्रा मिट्टी की जांच रिपोर्ट के आधार पर ही तय करें. जरूरत से ज्यादा या बहुत कम खाद डालने से फसल की ग्रोथ रुक सकती है. इसके साथ ही, खेत की आखिरी जुताई के समय अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद डालना मिट्टी की सेहत के लिए सबसे फायदेमंद होता है.

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पलेवा और सही समय पर बुवाई

गेहूं की बुवाई हमेशा खेत में पर्याप्त नमी होने पर ही करनी चाहिए. इसके लिए बुवाई से कुछ दिन पहले खेत में पानी लगा दें, जिसे कृषि की भाषा में पलेवा कहा जाता है. जब खेत में पैर टिकने लायक नमी हो जाए, तब जुताई करके बुवाई करें. गेहूं की बुवाई के लिए नवंबर का महीना सबसे उत्तम माना जाता है. सही समय पर और सही नमी में की गई बुवाई से बीज तेजी से उगते हैं और बाद में सिंचाई के प्रबंधन में भी कोई परेशानी नहीं आती है.

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