रबी सीजन में गेहूं की बुआई की तैयारी करते समय किसानों को खेत की मिट्टी और उसकी नमी पर खास ध्यान देना चाहिए. जल्दबाजी में बुआई करने या बिना जांच के खाद डालने से फसल की शुरुआती बढ़त प्रभावित होती है. इसलिए बुआई से पहले खेत की अच्छी तरह तैयारी करें, मिट्टी की जरूरत समझें और खाद का इस्तेमाल कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार करें. इससे खेती का खर्च संभालने और फसल को बेहतर शुरुआत देने में मदद मिलती है.

Continues below advertisement

बुआई से पहले खेत की मिट्टी की जांच कराएं

गेहूं की बुआई से पहले मिट्टी की जांच कराना एक जरूरी कदम है. इससे पता चलता है कि खेत में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और दूसरे पोषक तत्वों की कितनी उपलब्धता है. जांच रिपोर्ट के आधार पर किसान खाद की मात्रा तय कर सकते हैं. इससे जरूरत से ज्यादा खाद डालने और बेवजह खर्च करने से बचने में मदद मिलती है. किसान मिट्टी की जांच के लिए नजदीकी कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क कर सकते हैं.

खेत की जुताई और समतलीकरण पर दें ध्यान

बुआई से पहले खेत की जरूरत के अनुसार, जुताई करें और जमीन को समतल बनाएं. खेत में बड़े ढेले होने या जमीन ऊंची-नीची रहने से बुआई और सिंचाई में परेशानी होती है. खेत में पानी जमा होने की समस्या भी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि जरूरत से ज्यादा नमी फसल की बढ़त को प्रभावित करती है. जुताई कितनी करनी है, यह मिट्टी की स्थिति और बुआई की तकनीक पर निर्भर करता है. जीरो टिलेज जैसी तकनीक में पारंपरिक जुताई की जरूरत कम होती है.

Continues below advertisement

यह भी पढ़ें : मोबाइल पर बुकिंग, क्यूआर कोड से खाद.. रबी के लिए नई तैयारी कर रही सरकार

पराली को खेत में न जलाएं

धान की कटाई के बाद खेत में बचे फसल अवशेषों को जलाने के बजाय उनका सही प्रबंधन करें. पराली को मिट्टी में मिलाने या हैप्पी सीडर और अन्य उपयुक्त मशीनों की मदद से उसके बीच गेहूं की बुआई करने के विकल्प अपनाए . फसल अवशेषों को जलाने से मिट्टी के पोषक तत्वों और जैविक पदार्थ को नुकसान पहुंचता है. सही मशीन और तकनीक का चुनाव खेत की स्थिति और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार करना चाहिए.

 खाद और बीज की तैयारी पहले ही कर लें

गेहूं की बुआई से पहले अच्छी गुणवत्ता वाले बीज की व्यवस्था करें. बीजोपचार की जरूरत हो तो कृषि विशेषज्ञ की सलाह और उत्पाद के निर्देशों के अनुसार ही करें. खाद की मात्रा भी मिट्टी की जांच और स्थानीय कृषि सिफारिशों के आधार पर तय करें. केवल ज्यादा खाद डालने से ज्यादा पैदावार की गारंटी नहीं मिलती. संतुलित पोषण और सही तरीके से बुआई करना जरूरी है.

बुआई के समय मिट्टी में सही नमी रखें

गेहूं की बुआई के लिए खेत में पर्याप्त नमी होना जरूरी है. मिट्टी ज्यादा सूखी हो तो स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार बुआई से पहले हल्की सिंचाई की जरूरत पड़ सकती है. वहीं, खेत में पानी भरा रहने पर बुआई करने से बचें. बीज को सही गहराई और उचित दूरी पर बोना भी जरूरी है, ताकि अंकुरण और पौधों की बढ़त बेहतर हो सके. बुआई का सही समय क्षेत्र, मौसम और गेहूं की किस्म के हिसाब से तय करें.

यह भी पढ़ें :  सर्दियों में सबसे ज्यादा मुनाफा देते हैं ये कम लागत वाले फल, कर लें तैयारी