Hydroponic Farming: अब खेती के लिए खेत और मिट्टी होना जरूरी नहीं रह गया है. बदलते समय के साथ खेती के तरीके भी तेजी से बदल रहे हैं और अब लोग अपने घर की छत, बालकनी और यहां तक कि किचन में भी ताजी सब्जियां उगा रहे हैं.  खास बात यह है कि इस खेती में न तो मिट्टी की जरूरत पड़ती है और न ही ज्यादा जगह की.इसमें पाइप और पानी की मदद से होने वाली इस आधुनिक तकनीक को हाइड्रोपोनिक या पाइप फार्मिंग भी कहा जाता है.  शहरों में रहने वाले लोग भी अब इस तकनीक के जरिए आसानी से घर पर सब्जियां उगा रहे हैं.

Continues below advertisement

क्या है हाइड्रोपोनिक खेती? 

हाइड्रोपोनिक खेती एक ऐसी विधि है, जिसमें पौधों को उगाने के लिए मिट्टी का इस्तेमाल नहीं किया जाता. इसकी जगह पोषक तत्वों से भरपूर पानी का घोल पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है. इस प्रक्रिया में पौधों को सीधे जरूरी पोषण मिलता है, जिससे उनकी वृद्धि तेजी से होती है और कम समय में बेहतर उत्पादन मिलता है. एक्सपर्ट्स बताते हैं की, इस तकनीक में पानी की खपत पारंपरिक खेती के मुकाबले काफी कम होती है और पौधे जल्दी तैयार हो जाते हैं.    

यह भी पढ़ेंः घर में कैसे उगाएं रेनबो मशरूम, इस आसान तरीके से रंगीन हो जाएगा गार्डन

Continues below advertisement

पाइप फार्मिंग कैसे करती है काम?

पाइप फार्मिंग में पाइपों के ऊपर छोटे-छोटे छेद किए जाते हैं और उन्हीं में पौधे लगाए जाते हैं. पौधों की जड़ें पाइप के अंदर बह रहे पोषक तत्वों वाले पानी में रहती हैं. यह तकनीक खासकर उन लोगों के लिए फायदेमंद मानी जा रही है, जिनके पास खेती के लिए जमीन नहीं है. साथ ही छोटे फ्लैट, बालकनी, छत या कमरे के किसी कोने में भी इस सिस्टम को आसानी से लगाया जा सकता है. यही वजह है कि शहरी इलाकों में यह खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है. 

कम पानी में ज्यादा उत्पादन का फायदा

इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें कम पानी में ज्यादा उत्पादन लिया जा सकता है. हाइड्रोपोनिक खेती में पानी को बार-बार इस्तेमाल किया जाता है, जिससे पानी की बर्बादी भी बहुत कम होती है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह तकनीक पारंपरिक खेती की तुलना में करीब 90 प्रतिशत तक कम पानी का उपयोग करती है. वही   उत्तराखंड के श्रीनगर गढ़वाल स्थित एक रिसर्च संस्थान में इस तकनीक से अश्वगंधा और बच जैसे पौधों को कम समय में तैयार किया गया, जबकि सामान्य खेती में इन्हें उगाने में एक से दो साल तक लग जाते हैं.    

भविष्य की स्मार्ट खेती बन रही है पाइप फार्मिंग

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में हाइड्रोपोनिक और पाइप फार्मिंग खेती का बड़ा विकल्प बन सकती है. बढ़ती आबादी, कम होती खेती योग्य जमीन और पानी की कमी के बीच यह तकनीक किसानों और शहरों में रहने वाले लोगों के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आ रही है. इतना ही नहीं, अब सरकार भी इस आधुनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को जागरूक कर रही है. ऐसे में बिना मिट्टी और कम जगह में ताजी और सुरक्षित सब्जियां उगाने की यह तकनीक भविष्य की स्मार्ट खेती मानी जा रही है.    

यह भी पढ़ेंः  जयपुर में होने जा रहा है राजस्थान ग्लोबल एग्रीटेक मीट, जानिए किसानों को क्या होगा फायदा