Crop Loss Compensation: कई महीनों तक किसान खेतों में फसल के तैयार होने का इंतजार करते हैं. लेकिन जब फसल कटने का समय आता है और  अचानक ओले गिरने लगते हैं, तो सारी मेहनत पर पानी फिर जाता है. उत्तराखंड में भी कुछ ऐसा ही हुआ है. यहां अचानक हुई ओलावृष्टि से धान, गन्ना, सब्जियों और बागवानी फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है. इन्में सबसे ज्यादा सेब और आड़ू उगाने वाले किसानों को नुकसान हुआ  है. ऐसे में किसानों को राहत देने के लिए राज्य सरकार ने कुछ जरूरी फैसले लिए हैं.

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ओलावृष्टि से जिन किसानों की फसलें खराब हुई हैं, उन्हें सरकार की ओर से मिलने वाली राहत राशि के बराबर ही अतिरिक्त मदद भी दी जाएगी. यानी किसानों को पहले से मिलने वाली सरकारी सहायता के अलावा उतनी ही और राशि मिलेगी. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को इसके लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं. हालांकि, किस किसान को कितनी मदद मिलेगी, यह फसल को हुए नुकसान और सरकारी नियमों के हिसाब से तय किया जाएगा.

3 महीने के बिजली बिल भरने से राहत

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ओलावृष्टि से फसलें खराब होने के कारण किसानों की कमाई पर भी बड़ा असर पड़ा है. ऐसे में उनके लिए घर और खेती का खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया है. किसानों की इस परेशानी को देखते हुए राज्य सरकार ने अक्टूबर से दिसंबर तक के तीन महीने के बिजली बिल जमा करने पर रोक लगाने का फैसला किया है. इससे प्रभावित किसानों को फिलहाल बिजली बिल भरने की चिंता नहीं करनी पड़ेगी.

किसान क्रेडिट कार्ड के कर्ज पर भी राहत की तैयारी

कई किसान खेती के लिए किसान क्रेडिट कार्ड यानी KCC से कर्ज लेते हैं. लेकिन जब फसल खराब हो जाती है, तो उनके लिए कर्ज की किस्त चुकाना भी मुश्किल हो जाता है. किसानों की इस परेशानी को देखते हुए मुख्यमंत्री ने कहा है कि प्रभावित किसानों को केसीसी के कर्ज की किस्त चुकाने के लिए तीन महीने की छूट देने की मांग केंद्र सरकार से की जाएगी. इसके लिए केंद्रीय वित्त मंत्रालय को पत्र भेजा जाएगा. हालांकि, अभी इस पर केंद्र सरकार की मंजूरी मिलना बाकी है.

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नौ जिलों में फसलों को नुकसान

उत्तराखंड के कई जिलों में ओलावृष्टि से किसानों की फसलों को काफी नुकसान हुआ है. इनमें उधमसिंह नगर, हरिद्वार, देहरादून, अल्मोड़ा, चम्पावत, नैनीताल, रुद्रप्रयाग, टिहरी और पौड़ी के कई इलाके शामिल हैं. सरकारी आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि ओलावृष्टि के कारण 8,300 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन पर फसलें प्रभावित हुई हैं. कहीं धान की फसल को नुकसान पहुंचा है, तो कहीं गन्ने, सब्जियों और बागवानी फसलों पर ओलों की मार पड़ी है. अलग-अलग इलाकों में फसलों को 10 से 70 फीसदी तक नुकसान होने की बात कही गई है.

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