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'लखपति दीदी' को एक-एक लाख देगी यूपी सरकार, कैसे करें आवेदन?

यूपी सरकार ग्रामीण महिला किसानों और स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को लखपति दीदी योजना के तहत 1 लाख रुपये तक की आर्थिक मदद और बिना ब्याज लोन दे रही है. जानिए आवेदन का पूरा तरीका क्या है?

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  • यूपी सरकार ने महिला उद्यमी क्रेडिट योजना शुरू की है.
  • ब्याज-मुक्त एक लाख ऋण तीन किस्तों में दिया जाएगा.
  • कृषि, पशुपालन, छोटे व्यवसाय में इस्तेमाल की जा सकती है मदद.

देश में खेती में महिलाओं का योगदान काफी अहम माना जाता है. ग्रामीण इलाकों में बहुत सी महिला किसान दिन-रात खेतों में मेहनत करती हैं. फसलें उगाती हैं और पशुपालन संभालती हैं. इसके बावजूद कई बार उन्हें आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता है. केन्द्र सरकार और देश के अलग-अलग राज्यों की सरकारों की ओर से किसानों के लिए कई तरह की योजनाएं चलाई जाती हैं. जिससे उन्हें मदद मिल सके. महिलाओं उन्हें आर्थिक तौर पर और मजबूत बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. 

कृषि और ग्रामीण आजीविका से जुड़ी महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए  महिला उद्यमी क्रेडिट योजना के तहत मदद दी जा रही है. सरकार की इस शानदार पहल का मकसद ग्रामीण महिलाओं की सालाना कमाई को कम से कम एक लाख रुपये तक पहुंचाना है. खेती और पशुपालन जैसे कृषि क्षेत्रों में जुटी महिलाओं को इस योजना के ट्रेनिंग दी जाती है और बिजनेस शुरू करने के लिए आर्थिक सपोर्ट भी मिलता है. जानें क्या है आवेदन की प्रोसेस. 

कृषि क्षेत्र से जुड़ी महिलाओं को एक लाख

उत्तर प्रदेश सरकार ने स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को बिना ब्याज के 1 लाख तक का क्रेडिट देने का शानदार फैसला किया है. यह पूरी रकम एक बार में न मिलकर तीन चरणों में दी जाएगी. शुरुआत में पहली किस्त के रूप में 20000 रुपये का इंटरेस्ट फ्री लोन मिलता है. इस पहली किस्त को समय पर चुकाने वाली महिलाएं अगली किस्त के तौर पर 30000 रुपये पाने की हकदार बनती हैं. 

इसके बाद तीसरी और आखिरी किस्त के तौर पर 50000 रुपये की रकम दी जाती है. इस तरह कुल 1 लाख की यह मदद पूरी तरह बिना ब्याज के महिलाओं को दी जाती है. जिसे महिलाएं कृषि, डेयरी फार्मिंग या अपने छोटे-मोटे बिजनेस को आगे बढ़ाने में इस्तेमाल कर सकती हैं.


लखपति दीदी' को एक-एक लाख देगी यूपी सरकार, कैसे करें आवेदन?

योजना का लाभ लेने के लिए जरूरी शर्तें और पात्रता 

अगर आप भी एक महिला किसान हैं और ग्रामीण इलाके में रहती हैं. तो इस योजना का लाभ उठाने के लिए कुछ जरूरी नियमों को पूरा करना होगा. सबसे पहली शर्त यह है कि महिला का उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (UPSRLM) के तहत किसी स्थानीय महिला स्वयं सहायता समूह यानी एसएचजी (SHG) से जुड़ा होना जरूरी है. 

ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत चलने वाले इन समूहों से जुड़कर महिलाएं बचत करना और मिलकर काम करना सीखती हैं. इस योजना का लाभ पहले चरण में करीब 1 करोड़ महिलाओं तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है. आवेदन करते समय बुनियादी दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, बैंक पासबुक और समूह से जुड़ी सदस्यता का प्रमाण होना जरूरी है. इन सभी दस्तावेजों के जरिए महिला के बैंक खाते को सीधे सरकार की इस योजना से जोड़ा जाता है. 

यह भी पढ़ें: बिना जमीन खरीदे किसान कैसे कर सकते हैं मोती की खेती? जानें आसान तरीका

इस तरह करें योजना में लाभ के लिए आवेदन 

इस योजना के तहत महिलाओं को बिना बैंकों के चक्कर लगाए आसानी से पैसा मिल सके इसके लिए यूपी सरकार की ओर से एक खास तरह का डिजिटल क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराने की तैयारी कर रही है. आवेदन करने की प्रक्रिया बेहद आसान है. इसके लिए सबसे पहले ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को अपने गांव के नजदीकी महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ना होता है. समूह की बैठकों में हिस्सा लें और अपनी रुचि के हिसाब से खेती, पशुपालन या किसी अन्य स्वरोजगार का प्लान शेयर करें. 


लखपति दीदी' को एक-एक लाख देगी यूपी सरकार, कैसे करें आवेदन?

इसके बाद अपने सभी जरूरी दस्तावेज अपने ग्रुप लीडर के पास जमा कराने होते हैं. स्वयं सहायता समूह और बैंकों के सहयोग से आपका आवेदन वेरीफाई होता है. जिसके बाद महिलाओं को ट्रेनिंग दी जाती है और कृषि के साथ बिजनेस से जुड़ा काम शुरू करने के लिए सरकार की ओर से किस्तों में मिलने वाली आर्थिक मदद सीधे आपके खाते में पहुंच जाती है.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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