किसान अब पारंपरिक फसलों के साथ पेड़ों की खेती में भी दिलचस्पी दिखा रहे हैं. सागवान ऐसी ही एक लकड़ी है, जिसकी मांग फर्नीचर, दरवाजे और दूसरे सामान बनाने में रहती है. इसकी लकड़ी मजबूत और टिकाऊ होती है. ऐसे में किसान अपनी खाली जमीन पर सागवान के पौधे लगाकर लंबे समय के लिए कमाई का रास्ता बना सकते हैं.  पर इसके लिए सही तरीके से खेती करना जरूरी है.

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सागवान के लिए कैसी मिट्टी है सही?

सागवान की अच्छी बढ़त के लिए गहरी, उपजाऊ और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी बेहतर मानी जाती है. मिट्टी का पीएच मान 6.5 से 7.5 के बीच होना अच्छा माना जाता है. पौधे लगाने के लिए मानसून की शुरुआत सही समय मानी जाती है. इसके लिए खेत की जुताई करके करीब 45 सेंटीमीटर गहरे और चौड़े गड्ढे तैयार करें. पौधों के बीच पर्याप्त दूरी रखना भी जरूरी है, ताकि पेड़ों को बढ़ने के लिए जगह मिल सके.

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एक एकड़ में कितने पौधे लगेंगे?

अगर सागवान के पौधों के बीच 4 मीटर x 4 मीटर की दूरी रखी जाए, तो एक एकड़ में करीब 250 पौधे लगाए जा सकते हैं. इसकी शुरुआती लागत पौधों की कीमत, खेत की तैयारी, खाद और सिंचाई की व्यवस्था पर निर्भर करती है. इसलिए पौधे खरीदने से पहले स्थानीय नर्सरी से उनकी कीमत पता कर लें. साथ ही, अपने खेत की मिट्टी के हिसाब से कृषि विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें.

पौधों की देखभाल कैसे करें?

सागवान के पौधों को शुरुआती तीन साल तक खास देखभाल की जरूरत होती है. खेत में उगने वाली खरपतवार को समय-समय पर हटाते रहें, ताकि पौधों को पर्याप्त पोषण मिल सके. बारिश न होने पर जरूरत के अनुसार सिंचाई करें और पौधों के आसपास पानी जमा न होने दें. पेड़ों की अच्छी बढ़त के लिए समय पर खाद डालना और सूखी या अनावश्यक शाखाओं की छंटाई करना भी जरूरी है.

कब होगी कमाई और मिलेगी सब्सिडी?

सागवान की खेती में कमाई के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है. पेड़ों की अच्छी गुणवत्ता वाली लकड़ी तैयार होने का समय उनकी किस्म, मिट्टी और देखभाल पर निर्भर करता है. कुछ राज्य सरकारें एग्रोफॉरेस्ट्री के तहत किसानों को आर्थिक सहायता देती हैं. 100 प्रतिशत सब्सिडी हर किसान को मिले, यह जरूरी नहीं है. इसलिए खेती शुरू करने से पहले कृषि या वन विभाग से योजना, पात्रता और पेड़ों की कटाई से जुड़े नियमों की जानकारी जरूर लें.

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