मानसून के बाद या मौसम बदलते ही खेतों में कीटों और कीड़ों का हमला तेजी से बढ़ने लगता है. यह छोटे-छोटे उड़ने वाले कीड़े और दुश्मन कीट किसानों की महीनों की कड़ी मेहनत को पल भर में बर्बाद कर देते हैं. अक्सर किसान इन दुश्मनों से अपनी फसल को बचाने के लिए महंगे और जहरीले रसायनों का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि बिना किसी रसायन या जहर के, महज रंगीन कार्ड्स की मदद से इन कीटों को आसानी से खत्म किया जा सकता है? कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए नीले और पीले रंग के स्टिकी कार्ड लगाने की सलाह दी है.

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क्या हैं नीले और पीले स्टिकी कार्ड?

यह नीले और पीले कार्ड असल में प्लास्टिक या कड़क कागज के बने हुए विशेष बोर्ड होते हैं. इनके ऊपर एक बेहद चिपचिपा और तेज गोंद लगा होता है. यह गोंद धूप और तेज बारिश में भी सूखता या खराब नहीं होता है. इन कार्ड्स को खेतों में पौधों की ऊंचाई के बराबर डंडों के सहारे लटका दिया जाता है. इस तकनीक की सबसे अच्छी बात यह है कि यह पूरी तरह से सुरक्षित है और इससे पर्यावरण या फसल पर किसी भी तरह का कोई बुरा रासायनिक असर नहीं पड़ता है.

पीला कार्ड कैसे करता है दुश्मनों का शिकार?

खेतों में उड़ने वाले हानिकारक कीट पीले रंग की तरफ बहुत तेजी से आकर्षित होते हैं. यह कीड़ों का प्राकृतिक स्वभाव होता है कि वे पीले रंग को देखकर उसकी और खिंचे चले आते हैं.

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जब किसान अपने खेत में पीला कार्ड लगाते हैं, तो सफेद मक्खी, एफिड्स, जैसिड्स और माहो जैसे खतरनाक कीट इस पीले रंग को कोई फूल या चमकदार पत्ती समझकर उस पर बैठ जाते हैं. कार्ड पर मजबूत गोंद होने के कारण वे वहीं चिपक कर मर जाते हैं.

नीला कार्ड किन कीड़ों का करता है खात्मा? 

पीले कार्ड की तरह ही नीला कार्ड भी खेत में मौजूद अन्य दुश्मनों को फंसाने का काम करता है. कुछ विशेष प्रकार के उड़ने वाले कीड़े, जैसे थ्रिप्स, नीले रंग की तरफ सबसे ज्यादा आकर्षित होते हैं.

थ्रिप्स एक ऐसा खतरनाक कीट है जो मिर्च,टमाटर, प्याज और कई हरी सब्जियों के पत्तों का रस चूसकर उन्हें पूरी तरह सड़ा देता है. जब खेत में नीले रंग का कार्ड लगाया जाता है, तो थ्रिप्स पत्तों को छोड़कर नीले कार्ड की तरफ भागते हैं और उस पर चिपक कर दम तोड़ देते हैं.

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कार्ड लगाने के बड़े फायदे 

इस तकनीक को अपनाने से किसानों को एक नहीं बल्कि कई बेहतरीन फायदे मिलते हैं. पहला फायदा यह है कि यह बहुत ही सस्ती तकनीक है. बाजार में एक कार्ड महज 10 से 20 रुपये में आसानी से मिल जाता है. दूसरा फायदा यह है कि इसके इस्तेमाल से महंगे रासायनिक कीटनाशकों पर होने वाला किसानों का भारी खर्च बच जाता है. इसके अलावा, खेत में इन कार्ड्स को देखकर किसान यह भी अंदाजा लगा सकते हैं कि उनके खेत में किस कीड़े का हमला ज्यादा हुआ है.

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