खेती करने वाले किसानों के लिए बहुत जरूरी है कि फसल को कीड़ों से बचाया जाए. अगर आप गोभीकी खेती करते हैं. तो जानते होंगे कि इस पर कीड़ों का काफी अटैक देखने को मिलता है. खासकर डायमंड बैक मॉथयानी हीरक कीट और इल्लियां यह पूरी फसल को चंद दिनों में खराब कर जाते हैं. कीटनाशकों के नाम पर मार्केट में ढेरों दवाइयां भरी पड़ी हैं. लेकिन किसानों के बीच आजकल जिस दवा के सबसे ज्यादा चर्चे हैं वह है स्पिनोसैड.

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अब सवाल ये उठता है कि क्या वाकई यह दवा गोभी के लिए इतनी असरदार है जितनी लोग बात करते हैं? क्या यह सच में फसल को इल्लियों से बचा सकती है? चलिए आपको समझाते हैं स्पिनोसैड कैसी दवा है. यह कैसे काम करती है और इसे खेत में इस्तेमाल करने का सही तरीका क्या है. 

क्या है स्पिनोसैड दवा?

अगर टेक्निकल टर्म में बात न करें तो स्पिनोसैड एक ऐसी मार्डन और नैचुरल तरीके से डिराइव की गई दवा है जो मिट्टी के एक खास बैक्टीरिया से बनाई जाती है. यानी इसे आप एक तरह का बायो-पेस्टिसाइड या फिर एडवांस कीटनाशक मान सकते हैं. गोभी की फसल में लगने वाली डायमंड बैक मॉथ की इल्लियां, तंबाकू की इल्ली और फल खाने वाले छेदक कीड़े ऐसे होते हैं जो आम दवाओं से दूर नहीं होते हैं. उन पर पुरानी दवाइयां बेअसर साबित होने लगती हैं.

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यहीं पर स्पिनोसैड काम करती है. जैसे ही इल्ली इस दवा के संपर्क में आती है या इसे खाती है. उसका नर्वस सिस्टम पूरी तरह ब्लॉक हो जाता है. कीड़ा लकवाग्रस्त हो जाता है, कांपने लगता है और कुछ ही घंटों में उसका खेल खत्म हो जाता है.यह दवा कांटेक्ट और पेट के जहर दोनों तरह से काम करती है. यानी कीड़ा अगर पौधे को छू भी ले या चबा ले तो उसका बचना नामुमकिन है. किसानों के लिए यह  इसलिए भी बढ़िया है क्योंकि ये पर्यावरण और खेत ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचाती. बशर्ते इसका सही मात्रा में इस्तेमाल किया जाए.

इस्तेमाल करने का सही तरीका क्या?

दवा चाहे कितनी भी दमदार क्यों न हो अगर इस्तेमाल करने का तरीका गलत हुआ तो समझो पैसा बर्बाद हो गया. स्पिनोसैड के साथ भी यही बात है. बाजार में यह आमतौर पर स्पिनोसैड 45% एससी फॉर्मूलेशन में मिलती है. इसका इस्तेमाल करते वक्त सबसे पहला नियम यह है कि अंदाजे से काम बिल्कुल न चलाएं.

  • सही डोज़: आमतौर पर गोभी के खेत के लिए 15 लीटर वाले पंप में लगभग 7 से 8 मिलीलीटर स्पिनोसैड 45% एससी दवा मिलाई जाती है. अगर एकड़ के हिसाब से देखें. तो लगभग 70 से 80 मिलीलीटर दवा को 200 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ छिड़काव करना एकदम सही रहता है.
  • छिड़काव का सही समय: धूप तेज हो तब कभी स्प्रे मत कीजिए. सुबह का वक्त या फिर हल्की ठंडी शाम का वक्त इसके लिए बेस्ट होता है. स्प्रे करते वक्त इस बात का ध्यान रखें कि पौधे के पत्ते, खासकर गोभी के फूल और पत्तों की निचली सतह अच्छे से भीग जानी चाहिए क्योंकि इल्लियां ज्यादातर वहीं छिपकर बैठती हैं.
  • मौसम का ध्यान: अगर छिड़काव के तुरंत बाद बारिश आ गई तो दवा धुल जाएगी और मेहनत खराब हो जाएगी. इसलिए मौसम देखकर ही कदम उठाएं.

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सावधानियां और जरूरी बातें 

स्पिनोसैड एक बहुत ही ताकतवर दवा है. इसलिए इसके इस्तेमाल में थोड़ी सावधानी बरतना बहुत जरूरी है. सबसे पहली बात तो यह है कि लगातार एक ही कीटनाशक का इस्तेमाल खेतों में नहीं करना चाहिए. वरना कीड़े उस दवा के खिलाफ इम्युनिटी बना लेते हैं जिसे रेजिस्टेंस कहते हैं. इसलिए अगर इस बार स्पिनोसैड का इस्तेमाल किया है. तो अगली बार फसल चक्र या दवा बदल-बदल कर स्प्रे करें.

दूसरी सबसे जरूरी बात स्प्रे करते वक्त हाथों में दस्ताने, मुंह पर मास्क र आंखों पर चश्मा जरूर लगाएं. यह कोई साधारण पानी नहीं है. केमिकल है जो शरीर के संपर्क में आने पर नुकसान पहुंचा सकता है. स्प्रे करने के बाद हाथ-पैर अच्छी तरह साबुन से धोएं. इसके अलावा, दवा के डिब्बे पर लिखी एक्सपायरी डेट और मैन्युफैक्चरिंग कंपनी की गाइडलाइंस को जरूर पढ़ लें. 

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