मानसून के जाने और हल्की ठंड शुरू होने के बीच सितंबर का महीना खेती के लिए सबसे बढ़िया मौका माना जाता है. इस समय मौसम न तो बहुत गर्म रहता है और न ही बहुत ठंडा. इस मौसम में कई तरह की नकदी और अगेती सब्जियों की खेती की जा सकती है. खरीफ की फसल कटने के बाद और रबी की बुवाई से पहले जो खाली वक्त मिलता है, उसमें सही प्लानिंग करके किसान कम समय में मोटा मुनाफा कमा सकते हैं. 

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अगर आप भी पुराने तरीके की खेतीसे हटकर कुछ नया और जल्दी कमाई देने वाला ऑप्शन तलाश रहे हैं. तो सितंबर का महीना आपकी किस्मत बदल सकता है. इस दौरान लगाई जाने वाली कुछ खास फसलें 30 से लेकर 85 दिनों के भीतर पूरी तरह तैयार होकर बिकने के लिए तैयार हो जाती हैं. चलिए आपको बताते हैं उन 6 फसलों के बारे में जो कम लागत में किसानों की जेब को बंपर मुनाफे से भर सकती हैं.

मूली और गाजर

सितंबर महीने में जड़ वाली सब्जियों की अगेती बुवाई सबसे ज्यादा मुनाफे का सौदा साबित होती है. इसमें पहला नाम आता है मूली का. अगर आप सितंबर के पहले या दूसरे हफ्ते में मूली की उन्नत किस्में लगाते हैं तो यह महज 35 से 45 दिनों में उखड़कर मंडी जाने के लिए तैयार हो जाती है. उस वक्त बाजार में नई मूली की आवक कम होने से किसानों को 40 से 50 रुपये किलो तक का थोक भाव आसानी से मिल जाता है. 

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इसी तरह गाजर की अगेती खेती के लिए भी सितंबर का समय सबसे बेस्ट रहता है. गाजर की फसल 75 से 85 दिनों में पूरी तरह तैयार हो जाती है. खेत की गहरी जुताई करके मेड़ों या बेड पर गाजर और मूली लगाने से इनकी जड़ें लंबी, बेदाग और मोटी बैठती हैं. इससे वजन तो बढ़ता ही है इसके साथ ही मंडी में बढ़िया क्वालिटी देखकर व्यापारी तुरंत ऊंची कीमत देने को तैयार हो जाते हैं.

फूलगोभी और पत्तागोभी

सब्जियों के बाजार में फूलगोभी और पत्तागोभी की मांग पूरे साल बनी रहती है. लेकिन जो किसान सितंबर में इनकी अगेती खेती करते हैं. असली कमाई वही बटोरते हैं. सितंबर के महीने में अगेती फूलगोभी और पत्तागोभी की नर्सरी से तैयार पौधों की रोपाई सीधे खेतों में की जाती है. रोपाई के बाद यह फसल लगभग 60 से 75 दिनों के भीतर ठोस और बड़े फूलों में तब्दील हो जाती है. 

नवंबर और दिसंबर की शुरुआत में जब शादियों और त्योहारों का सीजन पीक पर होता है उस वक्त बाजार में गोभी की मांग सबसे ज्यादा होती है और सप्लाई काफी कम. इस समय मंडी में गोभी 50 से 70 रुपये प्रति किलो के थोक भाव में बिकती है. सही खाद, कीटों से बचाव और हल्की सिंचाई का ध्यान रखकर किसान एक एकड़ से लाखों की शुद्ध कमाई बेहद कम समय में कर सकते हैं.

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पालक और हरी धनिया

अगर आप सबसे कम लागत और तुरंत रिटर्न चाहते हैं. तो पत्तेदार सब्जियों का कोई मुकाबला नहीं है. सितंबर में लगाई जाने वाली हरी धनिया और पालक किसानों के लिए रोज की कमाई का जरिया बन जाती हैं. हाइब्रिड या देशी धनिया की बुवाई के 35 से 40 दिन बाद पहली कटाई शुरू हो जाती है. सितंबर-अक्टूबर के दौरान मंडियों में हरी धनिया 100 से 150 रुपये किलो तक बिकती है. 

जिससे लागत कई गुना होकर तुरंत वापस लौट आती है. वहीं दूसरी तरफ पालक की बुवाई के मात्र 25 से 30 दिन बाद ही पहली कटाई मिल जाती है और एक बार लगाने के बाद इसकी 4 से 5 बार तक लगातार कटाई की जा सकती है. इन दोनों फसलों में कीटनाशक और खाद का खर्च न के बराबर आता है और लोकल मंडियों में इन्हें तुरंत नकद भाव में बेचा जा सकता है. यह फसलें रबी सीजन से पहले ही पूरा खर्च निकालकर तगड़ा फायदा दे जाती हैं.

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