खेती में अच्छी पैदावार के लिए केवल अच्छे बीज, पर्याप्त पानी और खाद का इस्तेमाल करना ही काफी नहीं होता. फसल की गुणवत्ता और उत्पादन काफी हद तक खेत की मिट्टी की सेहत पर भी निर्भर करते हैं. अगर मिट्टी में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम या अन्य जरूरी पोषक तत्वों की कमी होती है, तो इससे फसल की बढ़वार प्रभावित हो सकती है.
वहीं जरूरत से ज्यादा खाद डालने से खेती की लागत बढ़ने के साथ मिट्टी और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है. ऐसे में किसानों के लिए यह जानना जरूरी है कि उनके खेत की मिट्टी में कौन से पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में हैं और किनकी कमी है. इसके लिए मिट्टी की जांच कराना एक उपयोगी तरीका होता है.
मिट्टी की जांच क्यों जरूरी है?
मिट्टी की जांच से खेत में मौजूद पोषक तत्वों की स्थिति, मिट्टी का पीएच और जरूरत के अनुसार कुछ अन्य गुणों की जानकारी मिलती है. पीएच से पता चलता है कि मिट्टी अम्लीय है, क्षारीय है या सामान्य स्थिति में है. जांच की मदद से किसानों अपने खेत के लिए सही फसल का चुनाव कर सकते हैं. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि फसल अच्छी होने की संभावना बढ़ जाती है.
ऐसे लें मिट्टी का नमूना
मिट्टी की जांच के लिए सबसे जरूरी है कि नमूना सही तरीके से लिया जाए. गलत तरीके से लिए गए नमूने की रिपोर्ट पूरे खेत की सही स्थिति नहीं बता पाती. सबसे पहले खेत के उस हिस्से को चुनें, जिसकी मिट्टी और फसल की स्थिति लगभग एक जैसी हो. खेत में अलग-अलग जगहों से मिट्टी के छोटे नमूने लें. आमतौर पर जिग-जैग तरीके से 8 से 10 स्थानों से नमूने लेना उपयोगी माना जाता है.
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इन बातों का ध्यान रखें
यह भी ध्यान रखें कि नमूना लेने से पहले ऊपर की घास, पत्तियां और कचरा हटा दें. सभी नमूनों को साफ बर्तन में मिलाकर एक समान मिश्रण तैयार करें. उसमें से लगभग आधा किलोग्राम मिट्टी अलग कर लें. खाद के ढेर, मेड़, पानी जमा होने वाली जगह या किसी असामान्य हिस्से से नमूना न लें. यदि खेत के अलग-अलग हिस्सों की मिट्टी में काफी अंतर है, तो उनके नमूने अलग-अलग रखें. किसान अपने क्षेत्र के सरकारी मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला, कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग से मिट्टी की जांच के लिए संपर्क कर सकते हैं.
रिपोर्ट मिलने के बाद क्या करें?
मिट्टी की जांच रिपोर्ट में पोषक तत्वों की स्थिति और उनकी कमी या अधिकता के बारे में जानकारी मिलती है. ऐसे में रिपोर्ट मिलने के बाद किसानों को उसके आधार पर ही खाद और उर्वरकों का चुनाव करना चाहिए. इस वजह से अगर किसी पोषक तत्व की कमी है, तो आप उसे पूरा कर सकते हैं. इसी तरह मिट्टी का पीएच बैलेंस न होने पर सुधार के लिए उचित उपाय अपनाए जा सकते हैं.
नियमित कराएं मिट्टी की जांच
मिट्टी की जांच समय-समय पर कराना उपयोगी होता है. नियमित जांच से मिट्टी में पोषक तत्वों के बदलाव को समझने और लंबे समय तक उसकी उर्वरता बनाए रखने में मदद मिलती है. आमतौर पर फसल बोने से पहले मिट्टी की जांच कराना फायदेमंद माना जाता है.
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