Sarson Ki Kheti: रबी सीजन में अगर आफ भी सरसों की बुबाई करने जा रहे हैं तो इसकी नई किस्म RH 1427 एक अच्छा विकल्प बन सकती है. इसकी खास बात यह है कि, यह कम पानी और कम लागत में अच्छी पैदावार देने की क्षमता रखती है. साथ ही, ज्यादा ठंड, कोहरा और पाले का असर भी इस पर दूसरी किस्मों के मुकाबले कम पड़ता है. 

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सरसों में लगने वाली सफेद रतुआ बीमारी को सहन करने की क्षमता भी इसमें बताई गई है. इस किस्म में तेल की मात्रा 40 से 42 प्रतिशत तक होती है. ऐसे में जिन किसानों ने अभी सरसों की बुवाई नहीं की है, वे इस किस्म के बारे में जानकारी ले सकते हैं.

एक एकड़ में मिल सकती है 10 से 12 क्विंटल पैदावार

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RH 1427 किस्म से एक हेक्टेयर में करीब 25 से 30 क्विंटल सरसों की पैदावार मिल सकती है. वहीं, एक एकड़ के हिसाब से देखें तो इससे 10 से 12 क्विंटल तक उत्पादन मिलने की उम्मीद है. हालांकि, असली पैदावार खेत की मिट्टी, मौसम, पानी और फसल की देखभाल पर निर्भर करती है. 

इस किस्म में तेल की मात्रा 40 से 42 प्रतिशत तक बताई गई है. तेल की अच्छी मात्रा और क्वालिटी की वजह से बाजार में इसकी मांग अच्छी रह सकती है. किसानों को इससे अपनी उपज का बेहतर भाव मिलने की उम्मीद रहती है.

12 से 15 हजार रुपये तक आएगा खर्च

सरसों की इस किस्म की खेती में एक एकड़ पर करीब 12 से 15 हजार रुपये तक खर्च आ सकता है. इसमें बुवाई से लेकर फसल की कटाई तक का खर्च शामिल है. अगर किसान को बाजार में 7,000 से 7,500 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिलता है और एक एकड़ में 10 से 12 क्विंटल उपज होती है, तो कुल बिक्री करीब 70 हजार से 90 हजार रुपये तक हो सकती है.

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ठंड और सफेद रतुआ से बचाव की क्षमता

सर्दियों में कई बार पाला और घना कोहरा सरसों की फसल को नुकसान पहुंचा देता है. इसके अलावा सफेद रतुआ जैसी बीमारी भी पौधों को प्रभावित कर सकती है. RH 1427 में इन हालात को सहन करने की अच्छी क्षमता बताई गई है. इससे फसल को नुकसान का खतरा कम हो सकता है और किसानों को बार-बार दवा पर खर्च करने की जरूरत भी घट सकती है.

नवंबर में बुवाई करना रहेगा सही

इस किस्म की बुवाई के लिए नवंबर का समय अच्छा माना जाता है. अगर बारिश के कारण खेत में नमी ज्यादा है, तो 15 नवंबर तक भी बुवाई की जा सकती है. ध्यान रखें कि खेत में नमी सही हो और पानी जमा न हो. 

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