Salt Tolerant Wheat: मिट्टी में फसल, रेत में फसल के बारे में अक्सर हर किसी ने सुना और देखा होगा, लेकिन कल्पना कीजिए एक ऐसी जमीन है जिस पर कुछ भी नहीं उगाया जा सकता है, लेकिन तभी वहां आपको हरा-भरा लहलहाती गेहूं की फसल दिखाई पड़ जाए.  यह देखकर हर किसी को अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो पाएगा और यह हर किसी को जादू जैसा लगेगा. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि यह कोई कल्पना नहीं है, बल्कि वैज्ञानिकों ने इस कल्पना को सच में बदलने का एक ऐसा तरीका खोज निकाला है, जिससे खारी और बंजर मिट्टी में भी गेहूं उगाया जा सकता है. यह खबर उन सभी लाखों किसानों के लिए एक उम्मीद की किरण है, जिनकी जमीन समुद्र के बढ़ते पानी की वजह से बेकार हो जाती है और वे बस एक बंजर जमीन बनकर रह जाते हैं. आइए जानते हैं इसके बारे में पूरी जानकारी.

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समुद्री पानी और बढ़ता नमक कैसे बना खेती का सबसे बड़ा दुश्मन

रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में कई जगहों पर खेती की जमीन धीरे-धीरे खराब होती जा रही है, और इसकी सबसे बड़ी वजह मिट्टी में नमक बढ़ जाना मानी जाती है. जब समुद्री पानी खेतों तक पहुंच जाता है या फिर जमीन में अगर सही तरीके से सिंचाई न हो, तो जमीन खारी हो जाती है और किसानों के लिए ऐसी जमीन में फसल उगाना मुश्किल हो जाता है.  आंकड़ों के मुताबिक आज के समय में दुनिया में 8 प्रतिशत किसानों की खेती करने वाली जमीन नमक की वजह से बेकार हो चुकी है, और यह समस्या दुनिया भर के कई देशों में है.  बता दें कि मिस्र, केन्या और अर्जेंटीना जैसे देशों में तो बड़े इलाकों में गेहूं उगाना ही मुश्किल हो गया है.  साथ ही यूरोप में नीदरलैंड जैसे नीचले इलाके भी इसी परेशानी से जूझ रहे हैं.  हर दिन करीब दो हजार हेक्टेयर जमीन समुद्र के बढ़ते जलस्तर और गलत सिंचाई की वजह से बेकार होती जा रही है.

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स्वीडिश वैज्ञानिकों ने तैयार की नमक-सहनशील गेहूं की नई किस्म 

इसी समस्या का हल ढूंढने के लिए स्वीडन की गोथेनबर्ग यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक शानदार काम किया है. उन्होंने बांग्लादेश के समुद्र किनारे वाले खेतों में उगने वाली गेहूं की एक खास किस्म को चुना, जिसमें पहले से ही नमक सहने की थोड़ी ताकत थी.  इस गेहूं के बीजों में जीन बदलाव यानी म्यूटेशन करके वैज्ञानिकों ने करीब दो हजार नई गेहूं की किस्में तैयार कीं. इसके बाद इन सबकी जांच करके सबसे बेहतर पैंतीस किस्में छांटी गईं, जो खारी मिट्टी में सबसे अच्छी तरह उगती हैं. फिर जो नतीजा सामने आया, उसने वाकई हर किसी को चौंका दिया. नई तैयार की गई गेहूं की किस्मों में दाने का वजन मूल किस्म के मुकाबले तीन गुना ज्यादा पाया गया, और यह बीज पहले से लगभग दोगुनी बार अंकुरित हुए. 

लाखों किसानों के लिए बदल सकती है खेती की तस्वीर

यानी न सिर्फ यह गेहूं खारी जमीन में जिंदा रह पाती है, बल्कि उसकी पैदावार भी काफी बेहतर है.  वैज्ञानिकों का कहना है कि गेहूं की यह किस्म आने वाले समय में खाने की कमी से जूझ रहे इलाकों के लिए बहुत काम आ सकती है, खासकर एशिया के उन हिस्सों में जहां अभी चावल की खेती ज्यादा होती है, क्योंकि गेहूं उगाने में पानी की जरूरत चावल से काफी कम होती है. हालांकि अभी तक यह प्रयोग सिर्फ ग्रीनहाउस यानी नियंत्रित माहौल में हुआ है, अभी असली खेतों में टेस्ट होना बाकी है. वैज्ञानिकों के मुताबिक अब अगला कदम यह है कि इन नमक-सहनशील किस्मों को बांग्लादेश के असली खेतों में लगाकर देखा जाएगा. अगर यह टेस्ट सफल रहते हैं, तो अंदाजा है कि करीब पांच साल में यह गेहूं किसानों तक बड़े पैमाने पर पहुंच सकती है. 

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