खेती-किसानी में आजकल बिना मशीनरी के काम चलाना नामुमकिन सा हो गया है. मजदूरों की बढ़ती मजदूरी और उनकी कमी ने छोटे से छोटे किसान को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है. लेकिन जब जमीन छोटी हो यानी एक या दो एकड़ तब किसान असमजंस में पड़ जाता है. मन में सवाल आता है कि क्या लाखों रुपये का कर्ज लेकर ट्रैक्टर खरीदा जाए या फिर कम बजट में आने वाला पावर वीडर ही काम निपटा देगा

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अक्सर किसान बिना सोचे-समझे दूसरों की होड़ में बड़ा ट्रैक्टर घर ले आते हैं. जिसकी ईएमआई और भारी डीजल का खर्च बाद में कमर तोड़ देता है. वहीं कुछ किसान जरूरत से हल्की मशीन चुन लेते हैं और बाद में पछताते हैं. छोटी जोत, बागवानी और सब्जियों की खेती करने वाले किसान के लिए दोनों मशीनों की कीमत, काम करने का तरीका और उनकी उपयोगिता जानना बेहद जरूरी है. जिससे  सही फायदा मिल सके.

बजट के हिसाब से कौन सा ज्यादा सही?

अगर बात इन मशीनों की कीमतों की करें तो दोनों ही मशीनों की कीमत में जमीन-आसमान का फासला है. एक बढ़िया क्वालिटी का पावर वीडर आपको बाजार में लगभग 25 हजार से 45 हजार रुपये के भीतर आसानी से मिल जाता है. वहीं दूसरी तरफ अगर आप एक छोटा ट्रैक्टर लेने की सोचते हैं. तो कम से कम 3 लाख से 6 लाख रुपये का भारी-भरकम बजट तैयार रखना पड़ता है.

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छोटी जोत वाले किसान के लिए इतनी बड़ी रकम फंसाना या बैंक का कर्ज सिर पर लेना घाटे का सौदा साबित हो सकता है. इसके अलावा रोज के ईंधन खर्च पर नजर डालें तो पावर वीडर बेहद किफायती है. यह मशीन एक घंटे में महज आधा से एक लीटर पेट्रोल या डीजल पीती है. इसके उलट ट्रैक्टर प्रति घंटा कम से कम 2 से 4 लीटर डीजल लेता है. यानी कम जमीन पर गुड़ाई और निराई के लिए पावर वीडर आपके लिए ज्यादा मंहगा.

कौनसा करता है तेजी से काम?

सब्जियों, गन्ने, मक्के और फलों के बागों में पौधों के बीच की जगह काफी संकरी होती है. ऐसे काम में पावर वीडर का कोई मुकाबला नहीं है. यह मशीन काफी कॉम्पैक्ट, हल्की और संभालने में बेहद आसान होती है. जहां ट्रैक्टर के बड़े-बड़े पहिए पौधों को रौंद सकते हैं. वहां पावर वीडर दो लाइनों के बीच आराम से घुसकर मिट्टी भुरभुरी कर देता है और खरपतवार का जड़ से सफाया कर देता है.

खेत के कोनों पर और पेड़ों की निचली टहनियों के नीचे इसे मोड़ना बाएं हाथ का खेल है. इसे चलाने के लिए बहुत ज्यादा खुली जगह की जरूरत नहीं पड़ती. वहीं ट्रैक्टर को मुड़ने के लिए बड़ा घेरा चाहिए और संकरी क्यारियों में उसके जाने से फसल खराब होने का पूरा खतरा रहता है. बागवानी और इंटर-कल्टीवेशन जैसे बारीक कामों में पावर वीडर की फुर्ती और लचीलापन ट्रैक्टर से कहीं ज्यादा बेहतर साबित होता है.

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जुताई के लिए कौनसा बढ़िया?

अगर आपकी जरूरत सिर्फ निराई-गुड़ाई के लिए ही नहीं है और आपको खेत की गहरी जुताई, भारी मिट्टी पलटना और ढुलाई करनी है. तो खेल पूरी तरह बदल जाता है. यहां ट्रैक्टर अपनी असली ताकत दिखाता है. ट्रैक्टर में ज्यादा हॉर्सपावर का दमदार इंजन, मजबूत हाइड्रोलिक लिफ्ट और पीटीओ सिस्टम मिलता है. इसके पीछे आप कल्टीवेटर, रोटावेटर, प्लाउ, डिस्क हैरो और पानी का पंप जैसे भारी उपकरण आसानी से जोड़ सकते हैं.

सबसे अहम बात यह है कि ट्रैक्टर के पीछे ट्रॉली जोड़कर आप खेत से फसल सीधे मंडी ले जा सकते हैं या खाद-बीज ढो सकते हैं, जो पावर वीडर से बिल्कुल मुमकिन नहीं है. सख्त और पथरीली जमीन पर पावर वीडर जल्दी थक जाता है और किसान को भी थका देता है. अगर जमीन बड़ी है और भारी काम ज्यादा हैं. तो ट्रैक्टर ही लंबे समय में असली ताकतवर ऑप्शन साबित होता है. 

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