PM Fasal Bima Yojana: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों और उनके परिवारों को बड़ी राहत देते हुए सरकार ने क्लेम सेटलमेंट की पूरी प्रक्रिया को बेहद आसान और पारदर्शी बना दिया है. अक्सर देखा जाता था कि किसान की मृत्यु के बाद उसके परिवार को इंश्योरेंस का पैसा लेने के लिए सरकारी दफ्तरों और बैंकों के चक्कर काटने पड़ते थे और लंबी कागजी कार्रवाई के कारण क्लेम महीनों तक पेंडिंग रहता था.

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इस गंभीर समस्या को दूर करने के लिए अब नियमों में बहुत बड़ा बदलाव किया गया है जिससे पीड़ित परिवारों को बिना किसी मानसिक तनाव के उनका हक मिल सके. इस नई व्यवस्था के लागू होने से न सिर्फ पेंडिंग पड़े क्लेम्स का निपटारा रॉकेट की रफ्तार से होगा, बल्कि संकट की घड़ी में किसान के आश्रितों को बहुत बड़ा आर्थिक संबल भी तुरंत मिल सकेगा.

नॉमिनी वेरिफिकेशन की प्रक्रिया हुई डिजिटल और फास्ट

पुराने सिस्टम में मृत किसान के उत्तराधिकारी या कानूनी वारिस का पता लगाने और दस्तावेजों की जांच करने में महीनों का समय बर्बाद हो जाता था. नए नियमों के मुताबिक अब पूरी वेरिफिकेशन प्रोसेस को पूरी तरह से ऑनलाइन और सेंट्रलाइज्ड कर दिया गया है. जिससे बेवजह की देरी पर पूरी तरह लगाम लग गई है. बीमा फॉर्म भरते समय दिए गए नॉमिनी के विवरण को अब सीधे आधार और बैंक अकाउंट से लिंक करके तुरंत वेरीफाई कर लिया जाता है.

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अगर किसी मामले में नॉमिनी की जानकारी स्पष्ट नहीं है. तो स्थानीय राजस्व अधिकारियों की मदद से बहुत कम समय में कानूनी वारिस का सर्टिफिकेट मानकर क्लेम अप्रूव करने के निर्देश दिए गए हैं. जिससे कागजी उलझनें बिल्कुल खत्म हो गई हैं.

खत्म होगा बिचौलियों का खेल

इस आधुनिक और सुधरे हुए सिस्टम का सबसे बड़ा प्लस पॉइंट यह है कि क्लेम की मंजूरी मिलते ही पैसा सीधे मृत किसान के परिवार या नॉमिनी के बैंक अकाउंट में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए भेज दिया जाता है. इस पारदर्शी व्यवस्था के कारण अब बीच में किसी भी तरह के बिचौलियों या दलालों के हस्तक्षेप की गुंजाइश पूरी तरह से खत्म हो चुकी है.

सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर होगी राशि 

सरकार का पूरा फोकस इस बात पर है कि प्राकृतिक आपदा या किसी भी कारण से फसल के नुकसान का जो मुआवजा है, वह सही समय पर और सही हकदार तक बिना किसी कटौती के पहुंचे. यह कदम ग्रामीण इलाकों में रहने वाले किसान परिवारों को सुरक्षित भविष्य देने और खेती-किसानी के पूरे इकोसिस्टम को मजबूत बनाने में मील का पत्थर साबित होगा.

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