ग्रामीण इलाकों में पशुपालन खेती-किसानी की रीढ़ है. लेकिन पशुओं के बीमार पड़ने पर समय पर सही इलाज और सस्ती दवाएं मिलना आज भी एक बड़ी चुनौती है. किसानों को आज भी इसके लिए कई किलोमीटर दूर शहर जाना पड़ता है. 

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जहां ब्रांडेड दवाएं उनकी जेब पर भारी पड़ती हैं. इसी दिक्कत से निपटने के लिए और डेयरी सेक्टर को मजबूती देने के लिए सरकार अब जन औषधि केंद्र की तर्ज पर ग्रामीण क्षेत्रों में पशु औषधि केंद्र खोलने की योजना पर काम कर रही है. 

केंद्र सरकार का टारगेट मार्च 2027 तक देशभर में 25000 केंद्र तैयार करने का है. जिससे हर ब्लॉक लेवल पर कम से कम एक केंद्र संचालित हो सके. अगर आप ग्रामीण क्षेत्र में रहते हैं और एग्री-बिजनेस या मेडिकल रिटेल सेक्टर में उतरना चाहते हैं. तो यह पशु औषधि केंद्र आपके लिए एक बेहतरीन ऑप्शन साबित हो सकता है. 

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पशु औषधि केंद्र के लिए कितनी पढ़ाई जरूरी?

पशु औषधि केंद्र शुरू करने के लिए पढ़ाई के लिए तय योग्यता और बाकी की शर्तों को पूरा करना जरूरी है. अगर आवेदक खुद रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट यानी D.Pharma या B.Pharma पास है. तो वह सीधे अपने नाम से यह केंद्र शुरू कर सकता है. वहीं अगर कोई व्यक्ति खुद फार्मासिस्ट नहीं है. 

तो भी वह आवेदन करने के लिए पूरी तरह पात्र है. कोई भी सामान्य नागरिक, डॉक्टर, रजिस्टर्ड एनजीओ, ट्रस्ट या निजी संस्थान अपनी दुकान पर किसी सर्टिफाइड फार्मासिस्ट को बतौर कर्मचारी नियुक्त करके यह केंद्र चला सकते हैं. इसमें सबसे जरूरी वैलिड ड्रग सेल लाइसेंस और दुकान के लिए ठीकठाक जगह की है. 

इसके लिए गांव में या कस्बे के बाजार में कम से कम 120 वर्ग फुट की पक्की कमर्शियल या सेमी-कमर्शियल जगह होनी चाहिए. यानी आवेदक की अपनी एजुकेशनल क्वालिफिकेशन इतनी जरूरी नहीं है, बस नियम अनुसार रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट को साथ जोड़ना जरूरी है.

आवेदन का पूरा प्रोसेस क्या है?

पशु औषधि केंद्र के आवंटन की पूरी प्रोसेस डिजिटल है. इसके लिए किसी सरकारी दफ्तर के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं है. बल्कि आधिकारिक पोर्टल https://pashuaushadhi.dahd.gov.in/पर जाकर ऑनलाइन आवेदन करना होता है. पोर्टल के होमपेज पर जाकर रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरना पड़ता है. इसके साथ जरूरी दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड, दुकान का मालिकाना हक या वैध रेंट एग्रीमेंट और फार्मासिस्ट का काउंसिल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट अपलोड करना होता है. 

आवेदन पत्र जमा करते समय 5000 रुपये का नॉन-रिफंडेबल सरकारी आवेदन शुल्क ऑनलाइन भुगतान करना जरूरी है. इसके बाद संबंधित विभाग की ओर से पहले आपके दस्तावेजों और जगह की जांच की जाती है. सभी मानक पूरे पाए जाने पर आवेदक को केंद्र खोलने की मंजूरी और ड्रग लाइसेंस की प्रोसेस पूरी करने का अप्रूवल मिल जाता है.

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सरकार से कितनी मदद मिलेगी?

ग्रामीण स्तर पर इस बिजनेस को खड़ा करने के लिए सरकार आर्थिक प्रोत्साहन भी उपलब्ध करा रही है. विशेष श्रेणियों जैसे महिला उद्यमियों, दिव्यांगजनों, पूर्व सैनिकों और अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के आवेदकों को केंद्र का बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए सरकार 2 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता देती है. बिजनेस स्कोप की बात करें तो इन केंद्रों के नेटवर्क में 2100 से अधिक जेनेरिक दवाइयां और लगभग 300 सर्जिकल उत्पाद शामिल हैं. 

जिनकी कीमतें बाजार की ब्रांडेड दवाओं से 50 से 90 प्रतिशत तक कम होती हैं. जब किसानों को गांव के पास ही बेहद किफायती दरों पर पशुओं की दवाएं और सप्लीमेंट्स मिलेंगे. तो बढ़िया कमाई होती रहेगी. दवाओं की बिक्री पर मिलने वाला निर्धारित रिटेल मार्जिन संचालक को हर महीने एक बढ़िया मुनाफा देता रहेगा. 

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