Stubble Management Tips: धान का कटाई करने के बाद पराली किसानों की सबसे बड़ी परेशानी बन जाती है. मशीन से कटाई होने पर खेतों में काफी मात्रा में पराली बच जाती है. ऐसे में कई किसान इससे छुटकारा पाने के लिए इसे जला देते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ऐसा करने से न सिर्फ हवा को बल्कि आपके खेतों को भी काफी नुकसान पहुंचता है.
हालांकि, अच्छी बात यह है कि जिस पराली को आप बेकार समझकर जला देते हैं, उसी से बढ़िया जैविक खाद तैयार की जा सकती है. इससे खेत की सफाई भी हो जाती है और साथ ही अगली फसल के लिए मिट्टी को पोषण भी मिलता है. आइए जानते हैं पराली को खाद में बदलने के आसान तरीके.
पराली जलाने से मिट्टी को होता है नुकसान
खेत में पराली जलाने से कुछ समय के लिए खेत साफ जरूर दिखने लगता है, लेकिन इसका असर लंबे समय तक रह सकता है. आग की गर्मी से मिट्टी में मौजूद फायदेमंद सूक्ष्म जीवों को नुकसान पहुंचता है. ये जीव मिट्टी को उपजाऊ बनाए रखने में मदद करते हैं. ऐसे में पराली को जलाने के बजाय खाद बनाने में इस्तेमाल करना किसानों के लिए फायदेमंद हो सकता है.
पूसा डीकंपोजर से तैयार करें खाद
पराली को जल्दी गलाकर खाद बनाने के लिए पूसा डीकंपोजर का इस्तेमाल किया जा सकता है. यह एक ऐसा घोल है, जो फसल के अवशेषों को सड़ाने और उन्हें खाद में बदलने में मदद करता है. इसके लिए डीकंपोजर के कैप्सूल से घोल तैयार किया जाता है. इसमें गुड़ और बेसन जैसी चीजें भी मिलाई जाती हैं. फिर इस घोल का छिड़काव पराली पर किया जाता है. सही तरीके से इस्तेमाल करने पर करीब 15 से 20 दिनों में पराली गल सकती है.
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केंचुओं की मदद से भी बन सकती है खाद
किसान पराली से केंचुआ खाद भी तैयार कर सकते हैं. इसके लिए पराली को किसी सही जगह पर इकट्ठा करें और उसमें गोबर का घोल मिलाएं. इसके बाद केंचुए डालकर ढेर में नमी बनाए रखें. सही देखभाल करने पर करीब दो महीने में यह खाद में बदल सकती है. इस खाद का इस्तेमाल खेत में करने से मिट्टी को जैविक पदार्थ मिलते हैं. ध्यान रखें कि ढेर में न तो बहुत ज्यादा पानी भरने दें और न ही उसे पूरी तरह सूखने दें.
मिट्टी में दबाकर भी निपटा सकते हैं पराली
अगर किसान के पास खाद बनाने के लिए अलग जगह नहीं है, तो पराली को खेत में ही मिट्टी के अंदर मिलाया जा सकता है. इसके लिए मिट्टी पलटने वाले हल से खेत की जुताई करें, ताकि फसल के अवशेष मिट्टी में दब जाएं. समय के साथ ये अवशेष गलकर मिट्टी में मिल जाते हैं. हालांकि, अगली फसल की बुवाई से पहले पर्याप्त समय देना जरूरी है, ताकि पराली ठीक से गल सके और बुवाई में परेशानी न आए.
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