Mushroom Farming Tips: खेती में अब पारंपरिक फसलों के मुकाबले ऐसी फसलों की मांग तेजी से बढ़ रही है जिन्हें कम जगह, कम लागत और कम समय में तैयार किया जा सके. मशरूम की खेती इसी वजह से एग्री-बिजनेस सेक्टर में तेजी से लोकप्रिय हो रही है. खास बात यह है कि मशरूम में मिल्की और ऑयस्टर मशरूम जैसी किस्में गर्मी और उमस वाले मौसम में भी अच्छी पैदावार देती हैं. यानी जहां दूसरी फसलें मौसम की मार झेलती हैं. 

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वहीं यह मशरूम सही तापमान और नमी मिलने पर लगातार उत्पादन देते रहते हैं. इनकी खेती के लिए बड़े खेत की जरूरत नहीं होती बल्कि घर के खाली कमरे, या छोटे हॉल से भी इसकी वर्टिकल फार्मिंग शुरू की जा सकती है. बाजार में कमर्शियल लेवल पर इसकी डिमांड लगातार बनी हुई है. जान लीजिए क्या वाकई मशरूम से किसान बन रहे हैं अमीर.

गर्मी और बारिश में भी शानदार उत्पादन

मिल्की और ऑयस्टर मशरूम की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यह 28 से 38 डिग्री सेल्सियस तक के हाई टेम्परेचर में भी अच्छी तरह ग्रो कर सकते हैं. यही वजह है कि गर्म इलाकों में इसका कल्टीवेशन तेजी से बढ़ रहा है. इस फसल के लिए धान या गेहूं का भूसा सबसे अच्छा और सस्ता जरिया माना जाता है जिससे लागत बेहद कम रहती है. 

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ऐसे शुरू करें खेती

खेती शुरू करने के लिए सबसे पहले भूसे को चूने मिले पानी में 12 से 14 घंटे तक भिगोया जाता है. इसके बाद उसे सुखाकर मशरूम के बीज के साथ पॉलीबैग में भरकर छोटे छेद कर दिए जाते हैं. करीब 20 दिन के इनक्यूबेशन पीरियड के बाद बैग के अंदर सफेद फफूंद जैसी परत दिखने लगती है. इसके बाद बैग में हल्का चीरा लगाकर पानी का छिड़काव किया जाता है और कुछ ही दिनों में मशरूम की यील्ड तैयार हो जाती है.

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कम जगह में बढ़िया खेती होती है

मशरूम की इनडोर खेती तकनीक उन किसानों के लिए बेहतरीन ऑप्शन है जिनके पास खेती के लिए जमीन कम है. इसकी शुरुआत कुछ हजार रुपये से छोटे स्तर पर करके, एक्सपीरियंस बढ़ने के साथ सेटअप बढ़ा किया जा सकता है. 

इन जगहों पर रहती है डिमांड

मार्केट में होटल्स, रेस्टोरेंट्स, सुपरमार्केट्स और लोकल मंडियों में इसकी हाई न्यूट्रिशनल वैल्यू के चलते प्रीमियम डिमांड रहती है. अगर क्वालिटी कंट्रोल और डायरेक्ट मार्केट ले सही तालमेल हो तो यह एक बेहद फायदेमंद फसल साबित होती है. इसे बेचकर किसान वाकई रातों-रात अमीर बन सकते हैं.

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