Multilayer Farming Tips: खेती और किसानी में इन दिनों किसान नए-नए प्रयोग कर रहे हैं. इसी में एक नाम खूब चर्चा में है और वो है दो तल्ला खेती जिसे मल्टी लेयर फार्मिंग भी कहते हैं. इसका मतलब ये है कि जैसे शहरों में कम जगह होने पर लोग बहुमंजिला इमारतें बना लेते हैं. ठीक वैसे ही खेत के एक ही टुकड़े पर एक साथ कई फसलें उगा ली जाती हैं.

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इस तकनीक में जमीन के नीचे से लेकर ऊपर हवा तक के पूरे स्पेस का इस्तेमाल होता है. इस तरीके से खेती करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपकी लागत और मेहनत दोनों बचती है और एक ही बार में मुनाफा सीधे तीन से पांच गुना तक बढ़ जाता है. जान लीजिए दो तल्ला खेती का पूरा तरीका. 

कैसे होती है दो तल्ला खेती?

इस खेती को शुरू करने के लिए खेत में एक खास तरह का वर्टिकल स्ट्रक्चर तैयार किया जाता है. सबसे पहले जमीन के भीतर उगने वाली फसलें जैसे अदरक, हल्दी या कंद जैसी चीजें बोई जाती हैं. इसके ठीक ऊपर जमीन की सतह पर पत्तेदार सब्जियां या कम ऊंचाई वाली फसलें जैसे धनिया, मेथी या पालक लगाई जाती हैं. 

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इसके बाद खेत में बांस, लकड़ी और तारों की मदद से एक मजबूत मचान या शेड नेट तैयार किया जाता है. इस मचान के ऊपर बेल वाली सब्जियां जैसे कुंदरू, परवल, करेला या लौकी फैला दी जाती हैं. इस तरह एक ही समय पर एक ही जमीन से तीन अलग-अलग लेयर में फसलें तैयार होती हैं. 

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होती ही रिस्क फ्री कमाई 

दो तल्ला खेती का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें किसानों का रिस्क लगभग जीरो हो जाता है. अगर मौसम की मार या किसी वजह से एक फसल खराब भी हो जाए तो बाकी की दो फसलें किसान को नुकसान से बचा लेती हैं. इसमें पानी और खाद की भी भारी बचत होती है. 

क्योंकि जो पानी आप ऊपर की बेल वाली फसलों को देते हैं वही रिसकर नीचे की फसलों को भी मिल जाता है.  तो साथ में मचान की वजह से नीचे की फसलें धूप से बची रहती हैं. जिससे नमी लंबे समय तक बनी रहती है. आज के वक्त में दो तल्ला खेती की यह तकनीक किसानों के मुनाफे को बढ़ाने में काफी मददगार साबित हो रही है. 

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