Microgreens Growing Tips: आज के समय में कम मेहनत और कम निवेश में तगड़ा मुनाफा कमाने के लिए माइक्रोग्रीन्स की खेती काफी फायदेमंद साबित हो रही है. माइक्रोग्रीन्स असल में वो छोटे-छोटे पौधे होते हैं. जिन्हें बीज बोने के महज 7 से 14 दिनों के भीतर तब काट लिया जाता है जब उनमें पहली दो पत्तियां निकल आती हैं. 

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ये न सिर्फ देखने में खूबसूरत होते हैं. बल्कि पोषण के मामले में बड़ी सब्जियों से 40 गुना ज्यादा हेल्दी माने जाते हैं. फिटनेस और ऑर्गेनिक फूड के प्रति बढ़ते क्रेज की वजह से इस सुपरफूड की डिमांड आसमान छू रही है. सबसे अच्छी बात यह है कि इसे शुरू करने के लिए किसी बड़े खेत की जरूरत नहीं है, इसे घर के एक छोटे से कमरे या बालकनी से भी आसानी से शुरू किया जा सकता है.

कम जगह और जीरो बजट से शुरुआत

माइक्रोग्रीन्स फार्मिंग की सबसे बड़ी खासियत इसका लो-इन्वेस्टमेंट मॉडल है. इसे शुरू करने के लिए महंगी मशीनों या जमीन की जरूरत नहीं पड़ती. मात्र 5 से 10 हजार रुपये में इसे घर की छत या बालकनी में प्लास्टिक ट्रे की मदद से उगाया जा सकता है. इसमें मिट्टी की जगह कोकोपीट या वर्मी कंपोस्ट का इस्तेमाल किया जाता है. 

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जिससे गंदगी कम होती है और पौधे तेजी से बढ़ते हैं. चूंकि यह वर्टिकल फार्मिंग का हिस्सा है इसलिए कम जगह में रैक लगाकर हजारों ट्रे रखी जा सकती हैं. यह उन लोगों के लिए बेहतरीन मौका है जो शहर में रहकर खेती का बिजनेस करने का प्लान कर रहे हैं.

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7 दिनों में हार्वेस्टिंग

यह दुनिया की सबसे कम समय में तैयार होने वाली फसलों में से एक है. मूली, सरसों, मेथी, ब्रोकली और पालक जैसे बीजों के माइक्रोग्रीन्स महज एक हफ्ते में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं. आजकल के फाइव-स्टार होटल्स, बड़े रेस्टोरेंट्स और हेल्थ-कॉन्शियस लोग इसे सलाद, सूप और सैंडविच की गार्निशिंग के लिए हाथों-हाथ खरीदते हैं.

बाजार में इसकी कीमत भी काफी ज्यादा मिलती है जिससे बहुत कम समय में इन्वेस्टमेंट वापस मिल जाता है. इसकी डिमांड सिर्फ लोकल लेवल पर नहीं, बल्कि एक्सपोर्ट मार्केट में भी बहुत है, क्योंकि इसे 'पोषक तत्वों का खजाना' माना जाता है.

किसान भाई कर सकते हैं तगड़ी कमाई

माइक्रोग्रीन्स का बिजनेस स्मार्ट फार्मिंग में यकीन रखने वालों के लिए सोने की खान है. एक छोटी सी ट्रे से 300 से 500 रुपये तक के माइक्रोग्रीन्स आसानी से निकाले जा सकते हैं. अच्छी क्वालिटी के बीजों का चुनाव और सही मार्केटिंग पर ध्यान देने से एक छोटे से कमरे से महीने के लाखों रुपये कमाए जा सकते हैं. 

चूंकि इसकी शेल्फ लाइफ कम होती है इसलिए इसे सीधे ग्राहकों या रेस्टोरेंट्स तक पहुंचाकर बिचौलियों का कमीशन भी बचाया जा सकता है. हेल्थ सप्लीमेंट्स और दवाओं के बजाय लोग अब इसे अपनी डाइट में शामिल कर रहे हैं.

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