अगर सही समय पर सही फसल चुन ली जाए तो कम मेहनत में भी तगड़ा मुनाफा कमाया जा सकता है. आजकल किसान पारंपरिक अनाजों से हटकर फूलों की खेती की तरफ तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं और इसमें भी गेंदे की खेती सबसे ज्यादा मुनाफे का सौदा साबित हो रही है. साल का यह वह वक्त होता है जब आगे चलकर त्योहारों की लाइन लगने वाली होती है. चाहे नवरात्रि हो, दशहरा हो, दीपावली हो या फिर शादियों का सीजन हर तरफ फूलों की डिमांड देखने को मिलती है. 

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अगर आप भी सितंबर के इन दिनों में अफ्रीकन और फ्रेंच गेंदे की फसल लगा देते हैं तो आने वाले कुछ ही हफ्तों में आपके खेत फूलों से लहलहा उठेंगे और मंडियों में इनके दाम आपको मालामाल कर देंगे. अफ्रीकन और फ्रेंच गेंदे के फूल सामान्य गेंदे से बड़े होते हैं इनकी डिमांड भी बाजार में काफी होती है. क्योंकि पूजा-पाठ से लेकरवट सजावट तक हर जगह इसकी सबसे ज्यादा मांग रहती है. चलिए आपको बताते हैं कि इसकी खेती कैसे शुरू की जाए.

सितंबर में गेंदे की रोपाई 

फूलों की खेती में टाइमिंग बहुत जरूरी होती है और सितंबर का महीना अफ्रीकन और फ्रेंचगेंदे की फसल के लिए सबसे सही समय माना जाता है. इस महीने मौसम में हल्की ठंडक और उमस होती है जो गेंदे के पौधों की ग्रोथ के लिए फायदेमंद साबित होता है. अगर आप इस समय नर्सरी से तैयार पौधे लाकर अपने खेत में रोपाई कर देते हैं. तो पौधे बहुत तेजी से जड़ पकड़ते हैं और बिना किसी बीमारी के मजबूत होते चले जाते हैं. 

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खेत की तैयारी के दौरान इस बात का ध्यान रखें कि मिट्टी में जलभराव बिल्कुल नहीं होना चाहिए. क्योंकि गेंदे की जड़ों को ज्यादा पानी पसंद नहीं है. खेत की अच्छी जुताई करके उसमें गोबर की सड़ी हुई खाद मिला दें. जिससे मिट्टी की उपजाऊ शक्ति दोगुनी हो जाती है. सही समय पर की गई यह रोपाई आगे चलकर आपको त्योहारों के सीजन में अच्छी पैदावार देती है.

त्योहारों के सीजन में मिलती है तगड़ी कीमतें

भारत में त्योहारों का दौर अक्टूबर और नवंबर के महीनों से शुरू हो जाता है. और यही वह समय होता है जब गेंदे के फूलों की मांग अपने पीक पर होती है. माता रानी के श्रृंगार से लेकर पंडालों की सजावट और घरों के मुख्य द्वारों को महकाने तक हर जगह सिर्फ गेंदे के फूलों की ही मालाएं नजर आती हैं. जब मांग इतनी ज्यादा बढ़ जाती है और सप्लाई थोड़ी सी भी कम होती है. 

तो मंडियों में फूलों के दाम रॉकेट की रफ्तार से ऊपर चले जाते हैं. किसानों को उस वक्त गेंदे के फूल के बहुत ही शानदार और मनचाहे दाम मिलते हैं. जिससे उनकी लागत महज कुछ ही हफ्तों में वसूल हो जाती है. इसके अलावा स्थानीय व्यापारी और फूल विक्रेता सीधे खेतों से ही माल बुक कर लेते हैं. 

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कम लागत और देखभाल में आसान

गेंदे की खेती की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसके लिए आपको बहुत ज्यादा भारी-भरकम बजट और महंगे उपकरणों की जरूरत नहीं होती है. बहुत ही कम लागत और सीमित संसाधनों के साथ कोई भी किसान अपने छोटे से खेत  में इसे आसानी से उगा सकता है. इसके पौधों पर कीटों और बीमारियों का खतरा भी दूसरी फसलों के मुकाबले काफी कम होता है. जिससे दवाइयों और कीटनाशकों का खर्चा लगभग न के बराबर आता है. 

पौधों की समय पर निराई-गुड़ाई और हल्की सिंचाई करने से इनकी टहनियां और ज्यादा घनी हो जाती हैं. जिससे फूलों का उत्पादन भी काफी बढ़ जाता है. एक बार पौधे फूल देना शुरू कर दें तो वे लगातार कई हफ्तों तक हार्वेस्टिंग देते रहते हैं. जिससे किसानों की रोज की कमाई का जरिया पक्का हो जाता है.

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