Makhana Subsidy Scheme: अगर आप पारंपरिक खेती के अलावा कुछ और उगाना चाहते हैं तो मखाना आज के दौर में बढ़िया ऑप्शन है. सेहत को लेकर बढ़ती जागरूकता के चलते सुपरफूड्स की मांग भी बहुत तेजी से बढ़ी है. मखाने की मांग न सिर्फ भारत में बल्कि पूरी दुनिया में दिन-प्रतिदिन आसमान छू रही है. इसी बढ़ती मांग को देखते हुए उद्यान विभाग और सरकार किसानों को मखाने की पारंपरिक के साथ-साथ वैज्ञानिक खेती की तरफ प्रोत्साहित कर रही है.

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अगर आप भी मखाने की खेती शुरू करने की सोच रहे हैं तो यह सही समय है. सरकार बागवानी और उद्यान विकास योजनाओं के तहत मखाने की खेती, उन्नत बीजों, ट्रेनिंग और इसकी प्रोसेसिंग पर बंपर सब्सिडी दे रही है. इस योजना का मकसद किसानों की लागत को कम करना और उनकी इनकम को बढ़ाना है. चलिए आपको बताते हैं कि सरकार इस पर कितनी आर्थिक मदद दे रही है और आवेदन करने का पूरा प्रोसेस क्या है.

मखाने की खेती पर कितनी सब्सिडी?

मखाने की खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार प्रति हेक्टेयर स्वीकृत लागत पर भारी छूट प्रदान करती है. योजना के तहत मखाने के उन्नत बीजों की रोपाई और खेत तैयार करने के लिए कुल लागत पर 50% से लेकर 75% तक की सब्सिडी दी जाती है.

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इसके अलावा मखाने की प्रोसेसिंग लावा बनाने, फोड़ने और ग्रेडिंग करने वाली मशीनों और पारंपरिक मशीनरी किट की खरीदारी पर भी अच्छी सब्सिडी मिलती है. सब्सिडी की यह राशि सीधे किसान के बैंक खाते में डीबीटी के जरिए भेजी जाती है. जिससे छोटे किसानों के लिए भी यह खेती करना बहुत आसान हो जाता है.

यूपी के मऊ जिले में मखाना खेती पर सब्सिडी

उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में उद्यान विभाग की ओर से मखाने की खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष पहल की जा रही है. योजना के तहत मऊ के किसानों को प्रति हेक्टेयर 80000 रुपये पर 50% तक की सब्सिडी यानी 40000 रुपये तक का अनुदान दिया जा रहा है.

इसके साथ ही जिला उद्यान विभाग किसानों को मखाने की वैज्ञानिक खेती और प्रोसेसिंग के लिए फ्री ट्रेनिंग भी उपलब्ध करा रहा है. मऊ के इच्छुक किसान जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय में जाकर सीधे संपर्क कर सकते हैं और आवेदन फॉर्म भरकर ट्रेनिंग और सब्सिडी दोनों का लाभ उठा सकते हैं.

मखाने की खेती से कमाई 

मखाने की खेती पानी वाले खेतों या तालाबों में आसानी से की जा सकती है. एक बार फसल तैयार हो जाने पर बाजार में इसका बहुत बढ़िया भाव मिलता है. एक एकड़ खेत से किसान आसानी से 10 से 12 क्विंटल तक मखाना निकाल सकते हैं. बाजार में मखाने का थोक और खुदरा रेट हमेशा अच्छा बना रहता है.

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जिससे प्रति एकड़ लाखों रुपये का शुद्ध मुनाफा होता है. सरकार की सब्सिडी मिलने से शुरुआती पूंजी का जोखिम बहुत कम हो जाता है. साथ ही, फसल कटने के बाद इसके बचे हुए अवशेषों का उपयोग जैविक खाद बनाने में भी किया जा सकता है.

सब्सिडी का लाभ उठाने के लिए योग्यताएं?

इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदक के पास खेती योग्य जमीन या लीज पर लिया गया तालाब या खेत होना जरूरी है. व्यक्तिगत किसानों के साथ-साथ किसान उत्पादक संगठन, स्वयं सहायता समूह और किसानों की समितियां भी इसके लिए पात्र हैं.

जरूरी कागजात की बात करें तो किसान के पास आधार कार्ड, जमीन या तालाब की खसरा-खतौनी के दस्तावेज, बैंक पासबुक की फोटोकॉपी, पासपोर्ट साइज फोटो और एक्टिव मोबाइल नंबर होना जरूरी है. कागजात सही होने पर आवेदन खारिज होने की गुंजाइश नहीं रहती.

आवेदन करने के ऑनलाइन प्रोसेस

मखाना सब्सिडी का लाभ लेने के लिए किसान को अपने राज्य के उद्यान विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन करना होता है. वेबसाइट पर योजना के ऑप्शन सिलेक्ट करें और अपना रजिस्ट्रेशन पूरा करें. वहां मांगे गए सभी जरूरी दस्तावेज अपलोड करें.

ऑफलाइन भी कर सकते हैं आवेदन

अगर आप ऑनलाइन आवेदन नहीं कर पा रहे हैं तो मऊ जिले की तर्ज पर अपने जिले के उद्यान कार्यालय में जाकर अधिकारी से सीधे संपर्क करके फॉर्म जमा कर सकते हैं. विभाग की ओर से आपकी जमीन और कागजों का वेरिफिकेशन होने के बाद सब्सिडी जारी कर दी जाती है.

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