Madhya Pradesh Bhavantar Yojana: मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों की मदद के लिए एक खास योजना शुरू की है, जिसका नाम है भावांतर भुगतान योजना. जिसका मकसद है किसानों को उनकी फसल का सही दाम दिलाना. कई किसानों की शिकायत रहती है कि उनको मंडी में अपनी फसल बेचने पर भी, उन्हें सरकार द्वारा तय किए गए MSP यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम दाम मिलता है. ऐसे में किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ता है. इसी समस्या को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने भावांतर भुगतान योजना शुरू की है, ताकि किसानों को उनके फसल के अनुसार आय मिले और उन्हें बाजार के उतार-चढ़ाव का डर न रहे. 

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यह योजना काम कैसे करती है?

बता दें कि इस योजना के तहत सरकार MSP और बाजार में मिलने वाले असली दाम के बीच के अंतर की राशि किसानों को देती है. यानी अगर किसान की फसल मंडी में MSP से कम दाम पर बिकती है, तो जितना अंतर होता है, उतनी राशि सरकार सीधे किसान के बैंक खाते में भेज देती है. यह पूरे भुगतान कि प्रतिक्रियाएं  DBT यानी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए किया जाता है, जिससे बीच में किसी दलाल की जरूरत नहीं पड़ती और पूरी प्रक्रिया साफ-सुथरी रहती है. 

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किन फसलों पर मिलता है फायदा?

इस जानकारी के बाद हर किसान के दिमाग में यह सवाल आता है कि क्या इस योजना का लाभ हर किसान को मिलेगा? ऐसे में बता दें कि पहले यह योजना मुख्य रूप से सोयाबीन जैसी फसलों के लिए लागू की गई थी. इसके बाद सरकार ने सरसों उगाने वाले किसानों को इसका फायदा दिया. आज कि स्थिति की बात करें तो  हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ऐलान करते हुए कहा कि अब मध्य प्रदेश के धान किसानों को भी इस योजना का लाभ मिलेगा.  इसके अलावा, सरकार ने बताया कि इस साल मध्यप्रदेश में 13.46 लाख किसानों से 104 लाख मीट्रिक टन गेहूं की रिकॉर्ड खरीद की गई, जिसमें 2,625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया गया है. 

कैसे उठा सकते हैं लाभ?

अब आता है सबसे जरूरी सवाल, कैसे उठा सकते है किसान इस योजना का फायदा? बता दें कि  अगर किसान इस योजना का फायदा लेना चाहते हैं, तो उन्हें तय समय के अंदर अपनी फसल की बिक्री के लिए पंजीयन करवाना जरूरी होता है. ध्यान दें की यह पंजीयन नजदीकी CSC सेंटर या MP किसान ऐप के जरिए किया जा सकता है. फिर  पंजीयन के बाद किसान अपनी फसल मंडी में बेचते हैं, और अगर बाजार भाव MSP से कम रहता है, तो अंतर की राशि सीधे उनके बैंक खाते में भेज दी जाती है.  इसलिए किसानों को चाहिए कि वे अपने ज़ले की मंडी या कृषि विभाग से पंजीयन की तारीखों की जानकारी जरूर लेते रहें, ताकि वे सही समय पर आवेदन कर सकें और इस योजना का पूरा फायदा उठा सकें. 

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