Gehun Ki Unnat Kismein: देश के ज्यादातर हिस्सों में गेहूं की बुवाई का समय शुरू हो गया है. ऐसे में किसान खेत तैयार करने और अच्छे बीज खरीदने में लग गए हैं. लेकिन गेहूं की खेती में एक बड़ी परेशानी सिंचाई की भी है. कई किसानों को फसल तैयार करने के लिए बार-बार खेत में पानी लगाना पड़ता है. इससे डीजल, बिजली और सिंचाई पर खर्च बढ़ जाता है. कई बार खेती की कमाई का बड़ा हिस्सा इसी में निकल जाता है. 

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इस साल कमजोर मॉनसून और कम बारिश की वजह से किसानों की चिंता और भी बढ़ गई है. ऐसे में अगर आप भी कम पानी में गेहूं की अच्छी फसल लेना चाहते हैं, तो कुछ ऐसी किस्मों के बारे में जान सकते हैं, जिन्हें कम सिंचाई में उगाने के लिए जाना जाता है.

कम पानी में उगाएं गेहूं की ये किस्में

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गेहूं की कुछ ऐसी किस्में हैं, जिनमें अनुकूल परिस्थितियों में एक से दो बार सिंचाई करके भी अच्छी पैदावार ली जा सकती है. इनमें लोकवन, शक्तिवर्धक 4282, शक्तिवर्धक 8292 और सरबती गेहूं शामिल हैं. जिन किसानों के पास पानी के साधन कम हैं या सिंचाई पर ज्यादा खर्च करना पड़ता है, वे इन किस्मों के बारे में जानकारी ले सकते हैं. हालांकि, इन किस्मों का चुनाव करने से पहले अपने इलाके की मिट्टी, मौसम और पानी की उपलब्धता को ध्यान में रखना जरूरी है. हर खेत में एक जैसा उत्पादन मिलना तय नहीं है.

120 दिन में तैयार हो सकती है फसल

इन किस्मों की फसल अनुकूल मौसम और सही देखभाल मिलने पर करीब 120 दिनों में तैयार हो सकती है. इनके दाने भी आकार में बड़े होते हैं. इससे उन किसानों को फायदा हो सकता है, जिन्हें सिंचाई के लिए ज्यादा खर्च करना पड़ता है. लेकिन सिर्फ किस्म चुन लेने से अच्छी पैदावार नहीं मिलती. सही समय पर बुवाई, अच्छी क्वालिटी के बीज और फसल की देखभाल भी जरूरी है.

बुवाई से पहले बीजों का जरूर करें उपचार

गेहूं की बुवाई से पहले बीजों का उपचार करना भी बहुत जरूरी है. कई किसान बिना बीजोपचार किए ही खेत में बीज डाल देते हैं. इससे बीज से फैलने वाली बीमारियों का खतरा बना रहता है. बुवाई से पहले कार्बेन्डाजिम या थायरम से बीजों का उपचार किया जा सकता है. इसकी मात्रा फसल और दवा के हिसाब से तय होती है, इसलिए पैकेट पर लिखे निर्देश या कृषि विशेषज्ञ की सलाह जरूर मानें.

समय पर बुवाई से मिलेगी अच्छी फसल

गेहूं की खेती में सही समय पर बुवाई करना भी काफी अहम है. खेत में पर्याप्त नमी हो, तो किसान बुवाई की तैयारी कर सकते हैं. साथ ही अपने खेत में पानी की उपलब्धता देखकर ही किस्म चुनें. कम सिंचाई वाली किस्मों के साथ समय पर बुवाई, बीजोपचार और सही देखभाल पर ध्यान देने से पानी और खेती की लागत बचाने में मदद मिल सकती है.