नींबू के पौधे में हरी-भरी पत्तियां उसकी अच्छी सेहत और बेहतर बढ़वार का संकेत होती हैं. लेकिन अगर पत्तियां धीरे-धीरे पीली पड़ने लगें तो किसान या बागवान को सतर्क हो जाना चाहिए. पत्तियों का पीला होना कई कारणों से हो सकता है. अक्सर पोषक तत्वों की कमी, अधिक या कम सिंचाई, जल निकासी की खराब व्यवस्था और कीटों का प्रकोप इसके पीछे जिम्मेदार होता है, ऐसे में समस्या का सही कारण पहचानकर ही उपाय करना चाहिए.

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नाइट्रोजन की कमी से भी पीली पड़ती हैं पत्तियां

नींबू के पौधे में नाइट्रोजन की कमी होने पर पुरानी पत्तियां हल्की हरी से पीली पड़ने लगती हैं. इसकी कमी से पौधे की बढ़वार भी धीमी हो जाती है. नाइट्रोजन पौधे के लिए महत्वपूर्ण पोषक तत्व है, लेकिन इसकी मात्रा का सही संतुलन भी जरूरी है. किसान को मिट्टी की जांच के आधार पर उचित खाद और उर्वरक का इस्तेमाल करना चाहिए.

आयरन की कमी में नई पत्तियां होती हैं पीली

अगर पौधे की नई पत्तियां पीली दिखाई दे रही हैं, जबकि उनकी नसें अपेक्षाकृत हरी बनी हुई हैं, तो आयरन की कमी एक संभावित कारण हो सकती है. यह समस्या ऐसी मिट्टी में अधिक दिखाई देती है जहां पौधे के लिए आयरन उपलब्धता कम हो. ऐसे मामले में केवल अनुमान के आधार पर उपचार करने के बजाय मिट्टी की जांच और कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहता है.

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ज्यादा पानी से भी हो सकती है समस्या

पत्तियां पीली होने का कारण हमेशा खाद की कमी नहीं होता. नींबू के पौधे की जड़ों के आसपास लंबे समय तक पानी जमा रहने पर जड़ों को पर्याप्त हवा नहीं मिलती. इससे जड़ों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है और पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं. इसलिए सिंचाई से ज्यादा जरूरी है कि खेत या गमले में जल निकासी अच्छी हो. मिट्टी की ऊपरी परत की नमी देखकर ही अगली सिंचाई का निर्णय लेना चाहिए.

कीटों पर भी रखें नजर

रस चूसने वाले कीट जैसे माहू, सफेद मक्खी और अन्य कीट पौधे की पत्तियों को नुकसान पहुंचाते हैं. इनके प्रकोप में पत्तियां कमजोर, मुड़ी हुई या पीली दिखाई देती हैं. यदि कीट दिखाई दें तो पहले उनकी पहचान करें और फिर कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार उचित नियंत्रण उपाय अपनाएं. बिना पहचान के किसी भी रसायन का छिड़काव करने से बचें.

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