Lal Palak Ki Kheti: अगर आपके पास फार्म हाउस है और आप वहां ताजी सब्जियां उगाना चाहते हैं, तो लाल पालक एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है. इसकी पत्तियां देखने में काफी खूबसूरत होती हैं और खाने में भी इस्तेमाल की जाती हैं. लाल पालक को उगाने के लिए बहुत बड़े खेत या जगह की जरूरत नहीं होती. 

Continues below advertisement

सही जगह, अच्छी मिट्टी और थोड़ी देखभाल के साथ इसे फार्म हाउस की क्यारी में भी उगाया जा सकता है. इसकी खास बात यह है कि फसल तैयार होने में ज्यादा समय नहीं लगता. ऐसे में घर के इस्तेमाल के लिए ताजा पालक मिल सकता है और ज्यादा उत्पादन होने पर इसे बेचने का विकल्प भी रहता है.

लाल पालक उगाने के लिए कैसी हो मिट्टी?

Continues below advertisement

लाल पालक की खेती के लिए ऐसी जगह चुनें, जहां पौधों को पर्याप्त धूप मिल सके और पानी जमा न हो. इसके लिए भुरभुरी और उपजाऊ मिट्टी अच्छी रहती है. बुवाई से पहले जमीन की अच्छी तरह खुदाई करें और मिट्टी में सड़ी हुई गोबर की खाद मिला दें. इससे मिट्टी को पोषण मिलता है और उसकी बनावट भी बेहतर होती है. अगर फार्म हाउस में जमीन कम है, तो आप क्यारियां बनाकर या बड़े गमलों में भी लाल पालक उगा सकते हैं.

बीज बोने का सही तरीका

लाल पालक की बुवाई बीज से की जाती है. सबसे पहले क्यारी की मिट्टी को समतल कर लें. इसके बाद बीजों को कतारों में बोएं और ऊपर से मिट्टी की हल्की परत डाल दें. बीज बहुत गहराई में न दबाएं, वरना उनके अंकुर निकलने में परेशानी हो सकती है. बुवाई के बाद हल्का पानी दें, ताकि मिट्टी में नमी बनी रहे. ध्यान रखें कि पानी इतना ज्यादा न हो कि क्यारी में भर जाए.

यह भी पढ़ें: चुकंदर की खेती कैसे होती है, इसके लिए कितनी जमीन और पैसे की जरूरत?

पानी और धूप का रखें ध्यान

लाल पालक के पौधों को बढ़ने के लिए धूप और नमी दोनों की जरूरत होती है. गर्मी के मौसम में मिट्टी जल्दी सूख सकती है, इसलिए जरूरत के अनुसार पानी देते रहें. हालांकि, बार-बार ज्यादा पानी डालने से बचें. क्यारी में उगने वाली घास और खरपतवार को समय-समय पर हटा दें, ताकि पौधों को पोषण और जगह मिल सके. पौधों की बढ़त कमजोर दिखे, तो खाद का इस्तेमाल मिट्टी और फसल की जरूरत के हिसाब से करें.

कितने दिन में तैयार होती है फसल?

लाल पालक की फसल आमतौर पर करीब 25 से 40 दिनों में पत्तियां तोड़ने लायक हो सकती है. हालांकि, यह समय किस्म, मौसम और देखभाल पर निर्भर करता है. जब पौधों की पत्तियां अच्छी तरह बढ़ जाएं, तो जरूरत के अनुसार उनकी कटाई की जा सकती है. कटाई करते समय पौधे के बढ़ने वाले हिस्से को पूरी तरह नुकसान न पहुंचाएं, ताकि दोबारा पत्तियां निकल सकें.

यह भी पढ़ें: तुलसी की पत्तियां पीली पड़ रही हैं? सर्दियों में ऐसे करें देखभाल