Kakora Farming Tips: बारिश का मौसम शुरू होते ही बाजारों में कई तरह की मौसमी सब्जियां दिखाई देने लगती हैं. लेकिन इनमें से एक ऐसी सब्जी है जिसका इंतजार लोग पूरे साल करते हैं. हम बात कर रहे हैं ककोड़ा की, जिसे कई जगहों पर खेखसा या मीठा करेला भी कहा जाता है. यह कोई आम सब्जी नहीं है. बल्कि इसे प्रकृति का एक अनोखा वरदान माना जाता है. यह सब्जी केवल मानसून के सीजन में वह भी सिर्फ एक से दो महीने के लिए ही मार्केट में आती है.

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स्वाद में लाजवाब होने के साथ-साथ यह सेहत के लिए किसी सुपरफूड से कम नहीं है. यही वजह है कि जैसे ही बरसात का मौसम शुरू होता हैं. बाजारों में इसकी डिमांड अचानक से आसमान छूने लगती है. लोग इसे महंगे दामों पर भी खरीदने के लिए तैयार रहते हैं क्योंकि यह सिर्फ स्वाद नहीं बल्कि अच्छी सेहत की भी गारंटी है.

जंगल में उगती है यह सब्जी

ककोड़ा की सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसकी खेती आम सब्जियों की तरह खेतों में बड़े पैमाने पर नहीं की जाती. यह मुख्य रूप से प्राकृतिक रूप से जंगलों, पहाड़ों और कटीली झाड़ियों के बीच अपने आप उगती है. बारिश का पानी मिलते ही इसकी बेलें तेजी से फैलने लगती हैं. ग्रामीण इलाकों के लोग और आदिवासी जंगलों में सांपों और बिच्छुओं के डर के बीच झाड़ियों की खाक छानकर इस दुर्लभ सब्जी को तोड़कर लाते हैं. 

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चूंकि इसे उगाने में किसी भी तरह के केमिकल या यूरिया का इस्तेमाल नहीं होता इसलिए यह पूरी तरह से ऑर्गेनिक और प्योर होती है. जंगलों से इसे ढूंढकर लाने में काफी मेहनत लगती है और इसकी सप्लाई बहुत कम होती है. इसी वजह से मार्केट में आते ही इसकी कीमत काफी ज्यादा होती है.

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औषधीय गुणों से भरपूर 

ककोड़ा दिखने में भले ही छोटा और कटीला सा लगे लेकिन न्यूट्रिशन और सेहत के मामले में इसका कोई मुकाबला नहीं है. डॉक्टरों और आयुर्वेद एक्सपर्ट्स के मुताबिक इसमें भरपूर मात्रा में प्रोटीन, फाइबर, विटामिंस और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं. जो हमारी इम्यूनिटी को बूस्ट करने में मदद करते हैं. बारिश के मौसम में होने वाले सर्दी-खांसी और सीजनल इन्फेक्शन से बचाने में यह बहुत कारगर है. 

इसके अलावा यह डाइजेशन को दुरुस्त रखता है और ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में भी मददगार माना जाता है. इसका स्वाद बिल्कुल भी कड़वा नहीं होता. बल्कि यह खाने में बेहद क्रंची और टेस्टी लगती है. कम समय के लिए मिलने और इतने सारे औषधीय गुणों से भरपूर होने के कारण ही बाजार में ककोड़ा की भारी डिमांड बनी रहती है.

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